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मड़ुवे की खेती का किसानों को नहीं है चार्म
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
Updated Thu, 29 Oct 2015 10:46 PM IST
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प्रदेश सरकार भले ही मड़ुवा को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाने की बात कह रही है, लेकिन किसान इसे लेकर कतई उत्साहित नहीं है। मड़ुवे का उत्पादन करना आसान नहीं है। वैसे भी गुणकारी मड़ुवे के कद्रदान बढ़ नहीं रहे हैं। इसकी खेती लगातार हाशिये पर आ रही है। रकवे में लगातार गिरावट आ रही है। 15 वर्षों में इसकी खेती में 1891 हेक्टेयर की कमी आ गई है।
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मड़ुवा खरीफ की सबसे प्रमुख फसल है। औषधीय गुणों से भरपूर होने के चलते डेढ़ दशक पहले तक पहाड़ पर इसकी अच्छी-खासी खेती होती थी, लेकिन अब इसकी पैदावार में कमी आई है। उत्तराखंड बनने के वक्त 2000-2001 में जिले में मड़ुवे की खेती 8061 हेक्टेयर में होती थी, जो अब घटकर 6170 हेक्टेयर तक आ पहुंची है। कृषि विभाग के मुताबिक मड़ुवे की खेती में 13 वर्षों में 1891 हेक्टेयर की कमी आई है।
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प्रोत्साहन के लिए अब प्रदेश सरकार ने प्रति क्विंटल 200 रुपये बोनस देने का एलान किया है, लेकिन इस घोषणा के बावजूद किसानों का रवैया उत्साहजनक नहीं है। उनकी आशंकाएं बनी हुई है। सुअर का उत्पात सबसे बड़ा खतरा है। साथ ही मार्केटिंग की भी ठीकठाक व्यवस्था नहीं है।
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प्रोत्साहन से किसानों में नहीं है उत्साह
यहां ज्यादातर किसानों को मड़ुवे की खेती में सरकार द्वारा प्रोत्साहन योजना से खास उत्साहित नहीं है। त्रिलोक सिंह, वजीर खाती, भावना, मीनाक्षी आदि किसानों का कहना है कि एक दशक पहले तक मड़ुवे की फसल खूब लहलहाती थी। 20 क्विंटल से अधिक पैदावार करते थे, लेकिन अब ये पैदावार 3 क्विंटल से भी कम हो गई है। इन किसानों का कहना है कि सुअर के दखल ने मड़ुवे की फसल को बर्बाद कर दिया है और इस बार तो बचीखुची उम्मीद कम बारिश से खत्म हो गई है। किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा प्रति क्विंटल 200 रुपये बोनस देने की घोषणा अच्छा कदम तो है, लेकिन ये नाकाफी है। सुअर से बचाव के उपाय, बारिश नहीं होने पर सिंचाई के वैकल्पिक उपाय और मार्केटिंग के पुख्ता प्रबंध करने चाहिए। फिलहाल मात्र घोषणा के चलते ये किसान अगले सीजन से अधिक खेती पर राजी नहीं है।
मड़ुवे की खेती में कमी की बड़ी वजह किसानों का मोटे अनाज के प्रति कम होता रुझान है। अब किसानों की प्रवृत्ति अधिक कीमत वाली फसलों की ओर हो रही है। मड़ुवे की मार्केटिंग के लिए जिला स्तर पर व्यवस्था नहीं है। अलबत्ता टीडीसी इसे खरीदता है। -आरएल चंद्रवाल, मुख्य कृषि अधिकारी, चंपावत।
गरम तासीर के चलते मड़ुवा सर्दी में लाभकारी है। साथ ही यह पेट के कई रोगों में भी फायदा पहुंचाता है। मड़ुवे में कैल्शियम, विटामिन ए, बी, सी, लौह, खनिज और प्रोटीन बहुतायत होता है। इस कारण यह पाचन तंत्र को सक्रिय करता है। -डा.मोहम्मद शाहिद, आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी, टनकपुर।