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साक्षर भारत मिशन बनेगा समतुल्यता मिशन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।
Updated Mon, 20 Feb 2017 11:04 PM IST
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Now study in IIMs will be more costly, Fees may rise
- फोटो : pic as demo
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चंपावत। देश के सभी लोगों को साक्षर बनाने के लिए चलाए जा रहे साक्षर भारत मिशन के स्थान पर अब समतुल्यता अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत देशभर की विभिन्न ग्राम पंचायतों में स्थित लोक साक्षरता केंद्रों में अंतिम बार 19 मार्च को बुनियादी साक्षरता परीक्षा का आयोजन किया जाएगा।
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साक्षर भारत मिशन के बाद चलाए जाने वाले समतुल्यता मिशन में तीन चरण होंगे। इसमें पहले लेवल में केवल निरक्षरों को शामिल किया जाएगा, जबकि दूसरे, तीसरे चरण में साक्षर भारत मिशन में साक्षर हो चुके महिला, पुरुषों को शामिल किया जाएगा। इन्हें पांचवीं, आठवीं कक्षा के सर्टिफिकेट की मान्यता मिलेगी।
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साक्षर भारत मिशन के जिला समन्वयक महेश चंद्र जोशी के अनुसार समतुल्यता मिशन उन नवसाक्षरों के लिए है, जो आगे पढ़ना चाहते हैं। मिशन के तहत पहले चरण में निरक्षरों को शामिल करने के साथ ही दूसरे चरण में पांचवीं कक्षा, तीसरे चरण में आठवीं कक्षा के स्तर का पाठ्यक्रम शामिल होगा।
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अब तक निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए लोक शिक्षा केंद्रों के माध्यम से शिक्षा दी जाती थी। इसके लिए निरक्षरों को केवल परीक्षा देने के लिए ही आना होता था। समतुल्यता मिशन लोक शिक्षा केंद्रों के स्थान पर स्कूलों में चलेगा। जहां पहले संस्थागत छात्र-छात्राओं की कक्षाएं चलेंगी, उसके बाद मिशन के माध्यम से साक्षरों की कक्षाएं संचालित की जाएंगी। जिला समन्वयक के अनुसार समतुल्यता मिशन कब से शुरू होगा और इसकी अन्य विशेषताओं को लेकर अभी किसी तरह की स्पष्ट गाइडलाइन नहीं मिली है, लेकिन समतुल्यता मिशन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं।
चंपावत। साक्षर भारत अभियान के तहत 19 मार्च को होने वाली अंतिम बुनियादी साक्षरता परीक्षा में डेढ़ हजार से अधिक नवसाक्षर प्रतिभाग करेंगे। अभियान के जिला समन्वयक महेश चंद्र जोशी ने बताया कि बुनियादी साक्षरता परीक्षा के लिए जिले के 289 साक्षरता केंद्रों में से पाटी ब्लॉक में 485, लोहाघाट में 450, चंपावत में 520 नामांकन किए जा चुके हैं। अभी नामांकन प्रक्रिया जारी है।
चंपावत। किन्हीं कारणों के चलते बुनियादी शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रहे लोगों को साक्षर करने के लिए पूर्व में जहां प्रौढ़ शिक्षा अभियान चलाया जाता था। वहीं वर्ष 2005 से 2010 तक सतत शिक्षा कार्यक्रम के माध्यम से निरक्षरों को साक्षर बनाया गया। उसके बाद जून 2010 से साक्षर भारत मिशन का संचालन किया गया।