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हत्यारों के न हाथ कांपे थे: न अंदर बैठा जमीर हिला...हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं; 10 साल बाद आया फैसला

Tue, 09 Apr 2024 01:45 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटर्वक, चंपावत
अमर उजाला नेटर्वक, चंपावत Published by: हीरा मेहरा Updated Tue, 09 Apr 2024 01:45 PM IST
सार

बनबसा के धस्माना अस्पताल में 2014 को फार्मासिस्ट विजय पाल गंगवार और नर्स निशा शर्मा की नृशंस हत्या के मामले में 10 साल बाद फैसला आया है। जिला जज की कोर्ट ने अस्पताल के संचालक और उसके ड्राइवर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 

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Life imprisonment to two for murder of pharmacist and nurse in champawat
फार्मासिस्ट और नर्स की हत्या में दो को उम्रकैद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बनबसा के धस्माना अस्पताल के फार्मासिस्ट विजयपाल गंगवार और नर्स निशा हत्याकांड में 10 साल बाद फैसला आया है। अस्पताल के संचालक आशीष धस्माना और ड्राइवर इदरीस अहमद को आजीवन करावास की सजा सुनाई गई है। विजय और निशा के परिजन 10 साल से न्याय की आस लगाए बैठे थे। यह मामला सितंबर 2014 में खूब चर्चित हुआ था। चर्चा इसलिए क्योंकि हत्यारों ने बेरहमी और योजनाबद्ध ढंग से ऐसी जान ली जिसे सुनकर हर किसी की रूह कांप गई थी।

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इंदिरा नगर इज्जतनगर बरेली निवासी निशा और न्यू सिद्धार्थनगर प्रेमनगर बरेली निवासी विजय बनबसा के धस्माना में साथ काम करते थे। उन्हें कभी आभास नहीं था कि जिस अस्पताल में वह सेवा दे रहे हैं वहां का संचालक इतना    क्रूर हो जाएगा कि उन्हें जान तक गंवानी पड़ेगी। 
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जब धस्माना पकड़ा गया तो उसने अस्पताल की बदनामी के पीछे एक डॉक्टर, निशा और विजयपाल को जिम्मेदार ठहराया था। वह डॉक्टर को अपने अस्पताल चौपट होने का कारण मानता था। इदरीस ने अपने पैंटल फार्म हाउस में दोनों की हत्या की फिर शवों को बनबसा से करीब 33 किमी दूर नानकसागर डैम के किनारे फेंका था। इतना ही नहीं सिर नानकसागर से छह किमी दूर खकरा नाले में फेंके गए थे।
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सितंबर 2014 की वे तारीखें
08 सितंबर : नानकसागर डैम में महिला और पुरुष की लाश मिलीं थी। बोरे में युवक का धड़ था। दूसरे में दोनों के कटे हाथ थे।
09 सितंबर : घटनास्थल से चार किमी दूर खकरा नाले से युवक-युवती के कटे सिर बरामद किए गए। इन्हें काले रंग की दो पॉलीथिन में फेंका गया था। युवती का मुंडन किया गया था। कान काटे गए थे।
09 सितंबर : लापता लोगों का डाटा कलेक्ट करने के लिए एसओजी समेत चार पुलिस टीमें यूपी के बरेली और पीलीभीत जनपद की खाक छानती रही।
10 सितंबर: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैवानियत का पता चला था। धारदार हथियार से सिर और हाथ पैर काटे गए थे। तड़पा-तड़पा कर जान ली गई थी।
12 सितंबर : मृतक युवक का स्केच जारी किया।
17 सितंबर : पुलिस ने इस मामले का खुलासा किया। बरेली से आए परिजनों ने शिनाख्त की। विजयपाल गंगवार के पिता ने नानकमत्ता पुलिस को तहरीर देकर धस्माना नर्सिंग होम के मालिक और स्टाफ की मिलीभगत से एक डॉक्टर पर हत्या का आरोप लगाया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की और नामजद डॉक्टर सहित तीन संदिग्धों से की पूछताछ की।

23 सितंबर : पुलिस ने आशीष धस्माना और वाहन चालक इरदीस अहमद को गिरफ्तार किया। दोनों ने जुर्म कुबूल कर लिया। बेहोश करने के लिए प्रयुक्त की गई सुई और इंजेक्शन, छुरा और चापड़ भी बरामद किए गए।       

ऐसे पकड़ा गया धस्माना
छह तारीख को आशीष धस्माना की लोकेशन बांध के पास मिली। सात को फिर उसकी लोकेश वहीं मिली। आठ को भी वह वहीं घूमता रहा। चूंकि वह आदतन अपराधी नहीं था इसलिए अपराध बोध से परेशान होकर वह टूट गया। पुलिस की पूछताछ में उसने पूरी बात सामने रख दी।      

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