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Champawat News: पिछली दुर्घटनाओं से नहीं लिया सबक
Thu, 23 Mar 2023 11:48 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Thu, 23 Mar 2023 11:48 PM IST
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टनकपुर (चंपावत)। पांच वर्ष पहले 18 मई 2018 को 11 श्रद्धालुओं, 9 अप्रैल 2022 को दो लोगों और बृहस्पतिवार को पांच श्रद्धालुओं की मौत होने से व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए है। पिछले पांच साल में इसके अलावा भी कई और घटनाएं हुईं बावजूद इसके प्रशासन ने ऐसा कुछ सबक नहीं लिया जिससे श्रद्धालुओं की जिंदगी बचाई जा सके।
मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पहली बार क्यूआरटी (त्वरित राहत दल) की तैनाती की गई मगर ये दल भी यातायात संचालन और दुर्घटनाओं को न्यून करने में मददगार नहीं बन सका। यहां तक कि ठुलीगाड़ पुलिस चौकी की नाक के नीचे (10 मीटर दूर) पार्किंग स्थल के पास हुए हादसे ने पांच जिंदगी असमय निगल लीं।
मां पूर्णागिरि मेले के 15वें दिन बृहस्पतिवार को हुई दुर्घटना ने एक बार फिर लापरवाही को उजागर किया है। तीन महीने तक चलने वाले मां पूर्णागिरि मेले में यातायात प्लान बस कागजी दस्तावेज भर रह गया। प्लान कागज में तो है लेकिन धरातल पर कहीं नजर नहीं आया। ओवरलोडिंग, तेज गति और यात्रियों को बस-जीप में बैठाने के लिए आपाधापी मेले में अक्सर देखी जा सकती है। इस पर पुलिस कहीं भी और कभी भी लगाम लगाती नहीं दिखी।
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मेले के 12 किलोमीटर हिस्से पर ठुलीगाड़ से टनकपुर तक तीन जगह पुलिस तैनात है लेकिन इन सभी स्थानों से लापरवाही से चलने वाले वाहनों की गति पर कहीं कोई नियंत्रण नहीं होता।
बाक्स सड़कों पर खड़ी रहती हैं जीप-टैक्सियां
टनकपुर (चंपावत)। पूर्णागिरि धाम जाने वाले श्रद्धालुओं से लेकर पहाड़ जाने वाले यात्रियों को ले जाने वाली जीप-टैक्सी सड़कों पर खड़ी रहती हैं और वहीं अक्सर आपाधापी मची रहती है। इससे दूरदराज के यात्रियों की ही असुरक्षा नहीं होती बल्कि वहां से गुजरने वाले राहगीरों के लिए भी खतरा बना रहता है। वहीं टनकपुर की सड़कों पर भी पैदल आवाजाही करने वाले श्रद्धालुओं को भी खतरे के बीच गुजरना पड़ रहा है। संवाद
पूर्णागिरि मेले को लेकर यातायात प्लान में कहीं कोई कमी नहीं थी। जगह-जगह पुलिस की टीमें लगाई गई थीं। ठुलीगाड़ हादसा पार्किंग स्थल से निकलते वक्त हुआ। हादसे में पुलिस के नियंत्रण से संबंधित खामी नहीं है। व्यवस्था को और चाक चौबंद किया जाएगा।
-अविनाश वर्मा, सीओ, टनकपुर।
2018 के 11 मृतक आश्रितों को नहीं मिला था मुआवजा
टनकपुर (चंपावत)। पांच साल पहले 18 मई 2018 को राष्ट्रीय राजमार्ग पर बिचई के पास एक डंपर से कुचलकर जान गंवाने वाले उत्तर प्रदेश के 11 श्रद्धालुओं के परिजनों को सरकारी कोई मदद नहीं मिली थी। टनकपुर के एसडीएम सुंदर सिंह ने बताया कि मजिस्ट्रेटी जांच हुई थी लेकिन दुर्घटना राहत के मानकों के तहत नहीं आने की वजह से मृतकों के परिजनों को दुर्घटना राहत कोष से मदद नहीं मिल सकी थी। पूर्णागिरि मेला संचालन समिति ने अपने स्तर से मृतकों के घर जाकर कुछ राशि दी थी। संवाद
मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पहली बार क्यूआरटी (त्वरित राहत दल) की तैनाती की गई मगर ये दल भी यातायात संचालन और दुर्घटनाओं को न्यून करने में मददगार नहीं बन सका। यहां तक कि ठुलीगाड़ पुलिस चौकी की नाक के नीचे (10 मीटर दूर) पार्किंग स्थल के पास हुए हादसे ने पांच जिंदगी असमय निगल लीं।
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मां पूर्णागिरि मेले के 15वें दिन बृहस्पतिवार को हुई दुर्घटना ने एक बार फिर लापरवाही को उजागर किया है। तीन महीने तक चलने वाले मां पूर्णागिरि मेले में यातायात प्लान बस कागजी दस्तावेज भर रह गया। प्लान कागज में तो है लेकिन धरातल पर कहीं नजर नहीं आया। ओवरलोडिंग, तेज गति और यात्रियों को बस-जीप में बैठाने के लिए आपाधापी मेले में अक्सर देखी जा सकती है। इस पर पुलिस कहीं भी और कभी भी लगाम लगाती नहीं दिखी।
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मेले के 12 किलोमीटर हिस्से पर ठुलीगाड़ से टनकपुर तक तीन जगह पुलिस तैनात है लेकिन इन सभी स्थानों से लापरवाही से चलने वाले वाहनों की गति पर कहीं कोई नियंत्रण नहीं होता।
बाक्स सड़कों पर खड़ी रहती हैं जीप-टैक्सियां
टनकपुर (चंपावत)। पूर्णागिरि धाम जाने वाले श्रद्धालुओं से लेकर पहाड़ जाने वाले यात्रियों को ले जाने वाली जीप-टैक्सी सड़कों पर खड़ी रहती हैं और वहीं अक्सर आपाधापी मची रहती है। इससे दूरदराज के यात्रियों की ही असुरक्षा नहीं होती बल्कि वहां से गुजरने वाले राहगीरों के लिए भी खतरा बना रहता है। वहीं टनकपुर की सड़कों पर भी पैदल आवाजाही करने वाले श्रद्धालुओं को भी खतरे के बीच गुजरना पड़ रहा है। संवाद
पूर्णागिरि मेले को लेकर यातायात प्लान में कहीं कोई कमी नहीं थी। जगह-जगह पुलिस की टीमें लगाई गई थीं। ठुलीगाड़ हादसा पार्किंग स्थल से निकलते वक्त हुआ। हादसे में पुलिस के नियंत्रण से संबंधित खामी नहीं है। व्यवस्था को और चाक चौबंद किया जाएगा।
-अविनाश वर्मा, सीओ, टनकपुर।
2018 के 11 मृतक आश्रितों को नहीं मिला था मुआवजा
टनकपुर (चंपावत)। पांच साल पहले 18 मई 2018 को राष्ट्रीय राजमार्ग पर बिचई के पास एक डंपर से कुचलकर जान गंवाने वाले उत्तर प्रदेश के 11 श्रद्धालुओं के परिजनों को सरकारी कोई मदद नहीं मिली थी। टनकपुर के एसडीएम सुंदर सिंह ने बताया कि मजिस्ट्रेटी जांच हुई थी लेकिन दुर्घटना राहत के मानकों के तहत नहीं आने की वजह से मृतकों के परिजनों को दुर्घटना राहत कोष से मदद नहीं मिल सकी थी। पूर्णागिरि मेला संचालन समिति ने अपने स्तर से मृतकों के घर जाकर कुछ राशि दी थी। संवाद