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ऑक्सीजन तो भरपूर लेकिन अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत दूर
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लोहाघाट ट्रामा सेंटर भवन। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
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कोरोना की दूसरी लहर के बाद पिथौरागढ़ और चंपावत जिले में ऑक्सीजन भरपूर है। चंपावत में ऑक्सीजन जनरेशन के तीन प्लांट के अलावा जिला अस्पताल या उप जिला अस्पताल ही नहीं, बल्कि पाटी, बाराकोट, बनबसा जैसे छोटे अस्पतालों में भी ऑक्सीजनयुक्त बेड हैं। पिथौरागढ़ के जिला अस्पताल में दो ऑक्सीजन प्लांट, बेस अस्पताल में 800 एलपीएम, धारचूला अस्पताल में 300 एलपीएम, मुनस्यारी में 110 एलपीएम, डीडीहाट में 20, गंगोलीहाट में 50-50 एलपीएम के तीन प्लांट लगाए गए हैं लेकिन ऑक्सीजन सुविधा से युक्त इन अस्पतालों में इलाज की अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। यहां तक कि एक्सरे, खून की मामूली जांचें भी इन अस्पतालों में नहीं हो पा रहीं हैं। कई बार मामूली उपचार के लिए भी मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
बनबसा पीएचसी में एक्सरे तक की सुविधा नहीं
बनबसा/पाटी। चंपावत जिले के प्रवेशद्वार बनबसा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ऑक्सीजन सुविधा युक्त चार बेड हैं लेकिन यहां न तो एक्सरे होता है और न ही खून की सामान्य जांचें। ब्लॉक मुख्यालय बाराकोट के पीएचसी की तस्वीर भी इससे अलग नहीं है। यहां खून की जांच तो हो रही है लेकिन एक्सरे से लेकर गर्भवती महिलाओं के इलाज की कोई सुविधा नहीं है। बाराकोट के लोगों को इन सुविधाओं के लिए 15 किमी दूर लोहाघाट जाना पड़ता है। ब्लॉक मुख्यालय पाटी के अस्पताल में एक्सरे मशीन होने के बावजूद एक्सरे नहीं हो पा रहे हैं।
चंपावत में हफ्ते में एक दिन हो रहे अल्ट्रासाउंड
चंपावत। आईसीयू की सुविधा वाला जिला अस्पताल पिछले तीन महीने से अल्ट्रासाउंड परीक्षण की नियमित सुविधा नहीं दे पा रहा है। यहां नवंबर से लोहाघाट के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एलएम रखोलिया बृहस्पतिवार को सप्ताह में सिर्फ एक दिन अल्ट्रासाउंड करते हैं। नियमित रूप से परीक्षण न होने से लोगों को दिक्कत होने के साथ ही निजी अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ रही है। पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी का कहना है कि चंपावत के रेडियोलॉजिस्ट के अस्वस्थ होने के कारण नियमित रूप से परीक्षण नहीं हो पा रहे हैं।
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जिला अस्पताल में छह महीने से पोर्टेबल एक्सरे मशीन का संचालन शुरू नहीं हो सका है। इंजीनियरों के न आने से जिले की पहली पोर्टेबल एक्सरे मशीन को इंस्टॉल नहीं किया जा सका है। इस कारण चलने-फिरने में अक्षम मरीज इस मशीन का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
काम के नहीं, बस नाम के उप जिला अस्पताल
टनकपुर/लोहाघाट। इस जिले के मैदान और पहाड़ में एक-एक उप जिला अस्पताल (एसडीएच) है लेकिन इन अस्पतालों की हालत मरीजों के लिए मुफीद नहीं है। टनकपुर एसडीएच में 19 जनवरी 2019 से एक्सरे परीक्षण जैसी बेहद सामान्य सुविधा भी नहीं है। एक्सरे तकनीशियन की तैनाती न होने से तीन साल ये यहां एक्सरे कक्ष में ताला लगा है। लोग निजी अस्पताल में 400 से 500 रुपये खर्च कर एक्सरे कराने के लिए मजबूर हैं। ये हाल सिर्फ एक्सरे का ही नहीं है। अल्ट्रासाउंड परीक्षण भी जून 2015 से बंद हैं। साढ़े पांच साल बाद दिसंबर 2020 से अल्ट्रासाउंड की अस्थायी सुविधा शुरू हुई।
लोहाघाट के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एलएम रखोलिया हफ्ते में दो दिन टनकपुर में परीक्षण करते हैं। सर्जन और निश्चेतक होने पर भी यहां सर्जरी शुरू नहीं हो सकी है। वैसे टनकपुर अस्पताल में 24 डॉक्टरों के सृजित पदों में से (गायनाकोलॉजिस्ट, फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट, ईएनटी सर्जन, नेत्र रोग, पैथोलॉजिस्ट, हृदयरोग, चर्म रोग विशेषज्ञ) आदि विशेषज्ञों के अधिकतर पद भी खाली हैं। वहीं लोहाघाट एसडीएच में छह साल से महिलाओं के इलाज की व्यवस्था नहीं है। गायनाकोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से लोहाघाट सहित तीन ब्लॉकों की 85 हजार की आबादी में प्रसव कराना भी मुश्किल हो रहा है।
16 माह से बंद टनकपुर का जन औषधि केंद्र
टनकपुर (चंपावत)। टनकपुर में सस्ती दवाओं के लिए चार साल पहले खुला प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र भी सितंबर 2020 से बंद है। केंद्र में ताला लटकने की मार आम लोगों की जेब पर पड़ रही है। लोग खुले बाजार से महंगी ब्रांडेड दवाएं खरीदने के लिए मजबूर हैं।
दो ट्रामा सेंटर संचालन एक का भी नहीं
चंपावत। स्वास्थ्य सेवाओं की बीमार होने की एक बानगी यह भी है कि यहां दो करोड़ रुपये से बनाए गए दो ट्रामा सेंटरों में से एक का भी संचालन शुरू नहीं किया जा सका है। लोहाघाट के ट्रामा सेंटर में अस्पताल में वाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) चल रही है, तो वहीं टनकपुर के ट्रामा सेंटर की स्थिति भी इलाज लायक नहीं है।
जिले के संबद्ध डॉक्टर और फार्मासिस्ट
निश्चेतक डॉ. अभिलाषा कोहली : लोहाघाट से देहरादून।
माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. हर्षा शर्मा : लोहाघाट से ऊधमसिंह नगर।
चीफ फार्मासिस्ट एमके घिड़ियाल : लोहाघाट से कोटद्वार।
अस्पतालों में कई विशेषज्ञों के पद खाली हैं। रेडियोलॉजिस्ट की कमी से अल्ट्रासाउंड परीक्षण पर असर पड़ा है। गायनकोलॉजिस्ट भी जिले में सिर्फ चंपावत में है। टनकपुर और पाटी में एक्सरे परीक्षण शुरू कराने के लिए एक्सरे तकनीशियन की तैनाती के लिए आउटसोर्स एजेंसी से आग्रह किया गया है। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।
पिथौरागढ़ जिले में एक भी हृदयरोग विशेषज्ञ नहीं
पिथौरागढ़। ऑक्सीजन प्लांट की सुविधा भले ही अस्पतालों में शुरू कर दी हो लेकिन जिला अस्पताल को छोड़कर कहीं भी विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। पांच लाख की आबादी वाले पिथौरागढ़ जिले में जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ का पद पांच साल से खाली है। गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, धारचूला, डीडीहाट, मुनस्यारी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें हड्डी रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, महिला चिकित्सक के पद भी सृजित हैं लेकिन किसी भी अस्पताल विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। इन अस्पतालों में आने वाले मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। महिला चिकित्सक और विशेषज्ञ चिकित्सक समेत करीब 60 पद खाली हैं। सबसे अधिक परेशानी हृदय रोग विशेषज्ञ के न होने से मरीजों को उठानी पड़ती है। किसी को हृदयाघात होने पर यहां से 230 किलोमीटर दूर हल्द्वानी ले जाना पड़ता है। अधिकतर मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
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बनबसा पीएचसी में एक्सरे तक की सुविधा नहीं
बनबसा/पाटी। चंपावत जिले के प्रवेशद्वार बनबसा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ऑक्सीजन सुविधा युक्त चार बेड हैं लेकिन यहां न तो एक्सरे होता है और न ही खून की सामान्य जांचें। ब्लॉक मुख्यालय बाराकोट के पीएचसी की तस्वीर भी इससे अलग नहीं है। यहां खून की जांच तो हो रही है लेकिन एक्सरे से लेकर गर्भवती महिलाओं के इलाज की कोई सुविधा नहीं है। बाराकोट के लोगों को इन सुविधाओं के लिए 15 किमी दूर लोहाघाट जाना पड़ता है। ब्लॉक मुख्यालय पाटी के अस्पताल में एक्सरे मशीन होने के बावजूद एक्सरे नहीं हो पा रहे हैं।
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चंपावत में हफ्ते में एक दिन हो रहे अल्ट्रासाउंड
चंपावत। आईसीयू की सुविधा वाला जिला अस्पताल पिछले तीन महीने से अल्ट्रासाउंड परीक्षण की नियमित सुविधा नहीं दे पा रहा है। यहां नवंबर से लोहाघाट के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एलएम रखोलिया बृहस्पतिवार को सप्ताह में सिर्फ एक दिन अल्ट्रासाउंड करते हैं। नियमित रूप से परीक्षण न होने से लोगों को दिक्कत होने के साथ ही निजी अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ रही है। पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी का कहना है कि चंपावत के रेडियोलॉजिस्ट के अस्वस्थ होने के कारण नियमित रूप से परीक्षण नहीं हो पा रहे हैं।
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जिला अस्पताल में छह महीने से पोर्टेबल एक्सरे मशीन का संचालन शुरू नहीं हो सका है। इंजीनियरों के न आने से जिले की पहली पोर्टेबल एक्सरे मशीन को इंस्टॉल नहीं किया जा सका है। इस कारण चलने-फिरने में अक्षम मरीज इस मशीन का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
काम के नहीं, बस नाम के उप जिला अस्पताल
टनकपुर/लोहाघाट। इस जिले के मैदान और पहाड़ में एक-एक उप जिला अस्पताल (एसडीएच) है लेकिन इन अस्पतालों की हालत मरीजों के लिए मुफीद नहीं है। टनकपुर एसडीएच में 19 जनवरी 2019 से एक्सरे परीक्षण जैसी बेहद सामान्य सुविधा भी नहीं है। एक्सरे तकनीशियन की तैनाती न होने से तीन साल ये यहां एक्सरे कक्ष में ताला लगा है। लोग निजी अस्पताल में 400 से 500 रुपये खर्च कर एक्सरे कराने के लिए मजबूर हैं। ये हाल सिर्फ एक्सरे का ही नहीं है। अल्ट्रासाउंड परीक्षण भी जून 2015 से बंद हैं। साढ़े पांच साल बाद दिसंबर 2020 से अल्ट्रासाउंड की अस्थायी सुविधा शुरू हुई।
लोहाघाट के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एलएम रखोलिया हफ्ते में दो दिन टनकपुर में परीक्षण करते हैं। सर्जन और निश्चेतक होने पर भी यहां सर्जरी शुरू नहीं हो सकी है। वैसे टनकपुर अस्पताल में 24 डॉक्टरों के सृजित पदों में से (गायनाकोलॉजिस्ट, फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट, ईएनटी सर्जन, नेत्र रोग, पैथोलॉजिस्ट, हृदयरोग, चर्म रोग विशेषज्ञ) आदि विशेषज्ञों के अधिकतर पद भी खाली हैं। वहीं लोहाघाट एसडीएच में छह साल से महिलाओं के इलाज की व्यवस्था नहीं है। गायनाकोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से लोहाघाट सहित तीन ब्लॉकों की 85 हजार की आबादी में प्रसव कराना भी मुश्किल हो रहा है।
16 माह से बंद टनकपुर का जन औषधि केंद्र
टनकपुर (चंपावत)। टनकपुर में सस्ती दवाओं के लिए चार साल पहले खुला प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र भी सितंबर 2020 से बंद है। केंद्र में ताला लटकने की मार आम लोगों की जेब पर पड़ रही है। लोग खुले बाजार से महंगी ब्रांडेड दवाएं खरीदने के लिए मजबूर हैं।
दो ट्रामा सेंटर संचालन एक का भी नहीं
चंपावत। स्वास्थ्य सेवाओं की बीमार होने की एक बानगी यह भी है कि यहां दो करोड़ रुपये से बनाए गए दो ट्रामा सेंटरों में से एक का भी संचालन शुरू नहीं किया जा सका है। लोहाघाट के ट्रामा सेंटर में अस्पताल में वाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) चल रही है, तो वहीं टनकपुर के ट्रामा सेंटर की स्थिति भी इलाज लायक नहीं है।
जिले के संबद्ध डॉक्टर और फार्मासिस्ट
निश्चेतक डॉ. अभिलाषा कोहली : लोहाघाट से देहरादून।
माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. हर्षा शर्मा : लोहाघाट से ऊधमसिंह नगर।
चीफ फार्मासिस्ट एमके घिड़ियाल : लोहाघाट से कोटद्वार।
अस्पतालों में कई विशेषज्ञों के पद खाली हैं। रेडियोलॉजिस्ट की कमी से अल्ट्रासाउंड परीक्षण पर असर पड़ा है। गायनकोलॉजिस्ट भी जिले में सिर्फ चंपावत में है। टनकपुर और पाटी में एक्सरे परीक्षण शुरू कराने के लिए एक्सरे तकनीशियन की तैनाती के लिए आउटसोर्स एजेंसी से आग्रह किया गया है। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।
पिथौरागढ़ जिले में एक भी हृदयरोग विशेषज्ञ नहीं
पिथौरागढ़। ऑक्सीजन प्लांट की सुविधा भले ही अस्पतालों में शुरू कर दी हो लेकिन जिला अस्पताल को छोड़कर कहीं भी विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। पांच लाख की आबादी वाले पिथौरागढ़ जिले में जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ का पद पांच साल से खाली है। गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, धारचूला, डीडीहाट, मुनस्यारी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें हड्डी रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, महिला चिकित्सक के पद भी सृजित हैं लेकिन किसी भी अस्पताल विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। इन अस्पतालों में आने वाले मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। महिला चिकित्सक और विशेषज्ञ चिकित्सक समेत करीब 60 पद खाली हैं। सबसे अधिक परेशानी हृदय रोग विशेषज्ञ के न होने से मरीजों को उठानी पड़ती है। किसी को हृदयाघात होने पर यहां से 230 किलोमीटर दूर हल्द्वानी ले जाना पड़ता है। अधिकतर मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।