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प्रवेशोत्सव का खूब मचा शोर, लेकिन कम हुआ सरकारी स्कूलों को जोर
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राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय बौनकोट।
- फोटो : PITHORAGARH
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चंपावत। प्रवेशोत्सव के बीच चालू शिक्षा सत्र में 1331 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया। इसके बावजूद एक भी छात्र न होने से जिले में सात प्राइमरी और उच्च प्राथमिक स्कूल बंद हो गए हैं। वहां तैनात शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में संबद्ध किया गया है।
वर्तमान शिक्षा सत्र 2022-23 में एक झटके में सात विद्यालय बंद हो गए हैं। इन स्कूलों की छात्र संख्या दस से कम होने के कारण इनमें ताले लटक गए। बाराकोट ब्लॉक का जमाड़ राजकीय प्राथमिक स्कूल अब संचालित नहीं होगा। जिला शिक्षाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) चंदन सिंह बिष्ट ने बताया कि इन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या शून्य होने से ये स्कूल बंद हो गया है। बंद हुए स्कूलों में से छह प्राइमरी और एक जूनियर हाईस्कूल में पिछले शिक्षा सत्र में दो से नौ तक छात्र थे। पांचवीं और आठवीं कक्षा के सभी छात्र-छात्राओं के पास होने के बाद वे दूसरे कॉलेज में चले गए हैं। वहीं नए शिक्षा सत्र में यहां कोई नया प्रवेश नहीं हुआ है। इन स्कूलों में तैनात 11 शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में समायोजित किया गया है जबकि भोजन माताओं को अन्यत्र संबद्ध किया जाएगा।
उत्तराखंड बनने के बाद बंद हुए 50 स्कूल
चंपावत। नवंबर 2000 में बने उत्तराखंड राज्य में कई नए स्कूल खुले, लेकिन दूसरी तरह स्कूलों के बंद होने का सिलसिला भी तेज है। चंपावत जिले में इन 22 वर्षों में 43 राजकीय प्राथमिक और सात जूनियर हाईस्कूल बंद हो चुके हैं। इस कारण प्राथमिक स्कूलों की संख्या 516 से घटकर 472 हो गई है। वहीं जिले में 97 राजकीय जूनियर हाईस्कूल कम होकर 90 रह गए हैं। प्राथमिक स्कूलों में अभी 12269 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।
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ये स्कूल हुए हैं बंद
प्राथमिक स्कूल - कुलौली, कुलियालगांव, बुंगाख्याली, गड़कोट, मझेड़ा, भीजर।
उच्च प्राथमिक विद्यालय - पाटी ब्लॉक का चमतोला।
चंपावत जिले में इस शिक्षा सत्र में छह राजकीय प्राथमिक और एक उच्च प्राथमिक स्कूल छात्र संख्या शून्य होने की वजह से स्कूल बंद हो गए हैं। इन गांवों में छोटे बच्चों की कम होती संख्या और आसपास निजी स्कूल खुलने से ये नौबत आई है। - चंदन सिंह बिष्ट, डीईओ (प्रारंभिक शिक्षा), चंपावत।
बौनकोट विद्यालय बंद होने से पलायन का खतरा
झूलाघाट (पिथौरागढ़)। मूनाकोट विकासखंड के दुर्गम क्षेत्र ग्राम पंचायत तड़ीगांव में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (हाईस्कूल) बौनकोट बंद होने की सूचना से क्षेत्रवासी चिंतित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर विद्यालय बंद होता है तो क्षेत्र से पलायन बढ़ेगा और गांव खाली होने लगेंगे। पहले भी विद्यालय न होने के कारण बेहतर शिक्षा, सुविधाओं के लिए गांव के करीब 150 परिवार पलायन कर चुके हैं। अब यह विद्यालय बंद होता है तो जायल, सालपीपली, तड़ीगांव, बौनकोट, टाकुला, पीपलतड़, बलतड़ी गांव के बच्चों का जीवन शिक्षा के अभाव में प्रभावित हो जाएगा। बच्चों को घर से रोजाना सबसे नजदीकी विद्यालय गौड़ीहाट या झूलाघाट तक जाने के लिए 10 से 12 किमी की यात्रा करनी पड़ेगी, जिससे उन्हें परेशानी होगी।
विद्यालय बंद होने से बच्चों का भविष्य अधर में लटक जाएगा। नेपाल सीमा पर स्थित इस स्कूल के बंद होने से लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। पढ़ाई के लिए बच्चों को गौड़ीहाट और झूलाघाट जाने के लिए 12 किमी तक की यात्रा करनी पड़ेगी। - नीरज भट्ट, बौनकोट।
पूर्व में विद्यालय न होने के कारण 150 परिवार पलायन कर चुके हैं। यदि स्कूल बंद होता है तो क्षेत्र से पलायन बढ़ने लगेगा, इससे गांव खाली हो जाएंगेे। शासन-प्रशासन को सीमा से सटे गांवों में बेहतर मूलभूत सुविधाएं दिलाने का प्रयास करना चाहिए। - सुरेश भट्ट, बलतड़ी।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय बौनकोट बंद नहीं किया जा रहा है। शासन से आदेश आया है कि जिन स्कूल में छात्र संख्या शून्य है उन स्कूलों को अन्य स्कूलों में समायोजित किया जाए। बौनकोट स्कूल में हाईस्कूल में दो साल से छात्र संख्या शून्य है। जूनियर कक्षाओं में 13 विद्यार्थी हैं। विद्यालय के दो शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में समायोजित किया गया है। दो से आवेदन मांगे गए हैं। उनके आवेदन आने पर उन्हें भी समायोजित किया जाएगा। छात्र संख्या बढ़ते ही शिक्षकों की पुन: तैनाती की जाएगी। - हवलदार प्रसाद, डीईओ प्राथमिक।
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वर्तमान शिक्षा सत्र 2022-23 में एक झटके में सात विद्यालय बंद हो गए हैं। इन स्कूलों की छात्र संख्या दस से कम होने के कारण इनमें ताले लटक गए। बाराकोट ब्लॉक का जमाड़ राजकीय प्राथमिक स्कूल अब संचालित नहीं होगा। जिला शिक्षाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) चंदन सिंह बिष्ट ने बताया कि इन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या शून्य होने से ये स्कूल बंद हो गया है। बंद हुए स्कूलों में से छह प्राइमरी और एक जूनियर हाईस्कूल में पिछले शिक्षा सत्र में दो से नौ तक छात्र थे। पांचवीं और आठवीं कक्षा के सभी छात्र-छात्राओं के पास होने के बाद वे दूसरे कॉलेज में चले गए हैं। वहीं नए शिक्षा सत्र में यहां कोई नया प्रवेश नहीं हुआ है। इन स्कूलों में तैनात 11 शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में समायोजित किया गया है जबकि भोजन माताओं को अन्यत्र संबद्ध किया जाएगा।
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उत्तराखंड बनने के बाद बंद हुए 50 स्कूल
चंपावत। नवंबर 2000 में बने उत्तराखंड राज्य में कई नए स्कूल खुले, लेकिन दूसरी तरह स्कूलों के बंद होने का सिलसिला भी तेज है। चंपावत जिले में इन 22 वर्षों में 43 राजकीय प्राथमिक और सात जूनियर हाईस्कूल बंद हो चुके हैं। इस कारण प्राथमिक स्कूलों की संख्या 516 से घटकर 472 हो गई है। वहीं जिले में 97 राजकीय जूनियर हाईस्कूल कम होकर 90 रह गए हैं। प्राथमिक स्कूलों में अभी 12269 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।
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ये स्कूल हुए हैं बंद
प्राथमिक स्कूल - कुलौली, कुलियालगांव, बुंगाख्याली, गड़कोट, मझेड़ा, भीजर।
उच्च प्राथमिक विद्यालय - पाटी ब्लॉक का चमतोला।
चंपावत जिले में इस शिक्षा सत्र में छह राजकीय प्राथमिक और एक उच्च प्राथमिक स्कूल छात्र संख्या शून्य होने की वजह से स्कूल बंद हो गए हैं। इन गांवों में छोटे बच्चों की कम होती संख्या और आसपास निजी स्कूल खुलने से ये नौबत आई है। - चंदन सिंह बिष्ट, डीईओ (प्रारंभिक शिक्षा), चंपावत।
बौनकोट विद्यालय बंद होने से पलायन का खतरा
झूलाघाट (पिथौरागढ़)। मूनाकोट विकासखंड के दुर्गम क्षेत्र ग्राम पंचायत तड़ीगांव में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (हाईस्कूल) बौनकोट बंद होने की सूचना से क्षेत्रवासी चिंतित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर विद्यालय बंद होता है तो क्षेत्र से पलायन बढ़ेगा और गांव खाली होने लगेंगे। पहले भी विद्यालय न होने के कारण बेहतर शिक्षा, सुविधाओं के लिए गांव के करीब 150 परिवार पलायन कर चुके हैं। अब यह विद्यालय बंद होता है तो जायल, सालपीपली, तड़ीगांव, बौनकोट, टाकुला, पीपलतड़, बलतड़ी गांव के बच्चों का जीवन शिक्षा के अभाव में प्रभावित हो जाएगा। बच्चों को घर से रोजाना सबसे नजदीकी विद्यालय गौड़ीहाट या झूलाघाट तक जाने के लिए 10 से 12 किमी की यात्रा करनी पड़ेगी, जिससे उन्हें परेशानी होगी।
विद्यालय बंद होने से बच्चों का भविष्य अधर में लटक जाएगा। नेपाल सीमा पर स्थित इस स्कूल के बंद होने से लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। पढ़ाई के लिए बच्चों को गौड़ीहाट और झूलाघाट जाने के लिए 12 किमी तक की यात्रा करनी पड़ेगी। - नीरज भट्ट, बौनकोट।
पूर्व में विद्यालय न होने के कारण 150 परिवार पलायन कर चुके हैं। यदि स्कूल बंद होता है तो क्षेत्र से पलायन बढ़ने लगेगा, इससे गांव खाली हो जाएंगेे। शासन-प्रशासन को सीमा से सटे गांवों में बेहतर मूलभूत सुविधाएं दिलाने का प्रयास करना चाहिए। - सुरेश भट्ट, बलतड़ी।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय बौनकोट बंद नहीं किया जा रहा है। शासन से आदेश आया है कि जिन स्कूल में छात्र संख्या शून्य है उन स्कूलों को अन्य स्कूलों में समायोजित किया जाए। बौनकोट स्कूल में हाईस्कूल में दो साल से छात्र संख्या शून्य है। जूनियर कक्षाओं में 13 विद्यार्थी हैं। विद्यालय के दो शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में समायोजित किया गया है। दो से आवेदन मांगे गए हैं। उनके आवेदन आने पर उन्हें भी समायोजित किया जाएगा। छात्र संख्या बढ़ते ही शिक्षकों की पुन: तैनाती की जाएगी। - हवलदार प्रसाद, डीईओ प्राथमिक।