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शारदा का जल स्तर हुआ कम, अब भी शुरू नहीं हो पाई खनन की कवायद
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आपदा में ध्वस्त हुआ किरोड़ा पुल के पास आरबीएम से बनाया अस्थायी बंधा। विज्ञप्ति
- फोटो : TANAKPUR
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टनकपुर (चंपावत)। शारदा नदी का जल स्तर कम हो गया है। वन निगम का खनन प्रभाग भी तैयार है, लेकिन आदेश के बाद भी शारदा में खनन शुरू करवाने की कवायद आगे नहीं बढ़ सकी है। वन विभाग ने सीमांकन तक शुरू नहीं किया है। खनिज निकासी खुलने में देरी के कारण हजारों कारोबारी और श्रमिक बेरोजगार हैं।
वर्षाकाल खत्म होने के बाद दो अक्तूबर को ही खनन खोलने के आदेश हो चुके हैं, लेकिन विभागीय तैयारी न होने से खनिज निकासी शुरू नहीं हो सकी। इसी बीच 17 से 19 अक्तूबर तक की अतिवृष्टि में शारदा का जल स्तर बढ़ने से भी विभागीय तैयारी में रुकावट आई। अब नदी का जल स्तर कम हो चुका है, लेकिन विभाग ने खनन की तैयारी शुरू तक नहीं की है। इसके तहत वन विभाग को खनन क्षेत्र का सीमांकन करना है, जो विभागीय स्तर की अड़चन से शुरू नहीं हो पाया है।
वन निगम के खनन प्रबंधक हरीश पाल का कहना है कि सीमांकन करवाने के लिए डीएफओ और रेंजर को पत्र भेजा गया है। वन विभाग से खनन क्षेत्र का सीमांकन होने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी। वहीं वन विभाग के एसडीओ आरके मौर्य का कहना है कि विभागीय स्तर पर कार्यवाही चल रही है। जल्द ही खनन क्षेत्र के सीमांकन के बाद शारदा से खनिज निकासी की मात्रा तय होगी। जल एवं मृदा परीक्षण आयोग देहरादून से प्रारंभिक तौर पर डेढ़ लाख घन मीटर खनिज निकासी को मंजूरी मिल जाएगी।
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बाद में आयोग की सर्वे टीम की रिपोर्ट के आधार खनिज निकासी की मात्रा बढ़ाई जाएगी। फिलहाल खनन खुलने में देरी से कारोबारियों समेत श्रमिक बेचैन और परेशान हैं। मां शारदा शक्तिमान ट्रक खनन समिति के अध्यक्ष आनंद सिंह महर अन्नी का कहना है कि कारोबारी, वाहन मालिक खनन के लिए तैयार हैं लेकिन विभागीय स्तर पर विलंब हो रहा है।
खनन से करीब 6500 लोगों का जुड़ा है रोजगार
टनकपुर (चंपावत)। शारदा में खनन से करीब 6500 लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। खनन प्रबंधक हरीश पाल के मुताबिक 800 वाहन मालिकों के साथ ही करीब 3000 वाहनों के श्रमिक और 2500 खनन श्रमिकों को खनन से रोजगार मिलता है। शारदा के अप स्ट्रीम में इस बार भी खनन पर संशय की स्थिति है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने वर्ष 2013 में अप स्ट्रीम में खनन पर रोक लगा दी थी, लेकिन बाद में अनुमति की प्रत्याशा में छह साल तक खनन होता रहा और 2019 में वन विभाग ने अनुमति न मिलने की स्थिति में फिर अप स्ट्रीम में खनन पर रोक लगा दी।
लधिया और क्वेराला में बगैर सीमांकन नहीं होने देंगे खनन
टनकपुर (चंपावत)। पिछले माह आई बाढ़ से हुए नुकसान से चिंतित नौलापानी के ग्रामीणों ने इस बार लधिया और क्वेराला नदी में सीमांकन से पहले खनन न होने देने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अनियंत्रित खनन से आसपास के गांवों को खतरा हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से खनन का ठेका आवंटित करने से पहले खनन क्षेत्र का सीमांकन करवाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने बताया कि रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत लधिया और क्वेराला नदी में खनन के पट्टे आवंटित किए जाते हैं। इस वर्ष भी खनन पट्टों की नीलामी की तैयारी है, लेकिन पिछले वर्ष बगैर सीमांकन के हुए अनियंत्रित खनन से आसपास के गांवों के लिए खतरा हो गया है। ग्राम प्रधान गीता देवी, सरपंच राजेंद्र प्रसाद जोशी, मथुरा दत्त जोशी, रघुवर सिंह, दीपक जोशी, महेश चंद्र जोशी आदि ग्रामीणों का कहना है कि इस बार सीमांकन बगैर खनन नहीं होने दिया जाएगा। उनका कहना है कि वे सरकार की नीति के विरोध में नहीं है, लेकिन बगैर सीमांकन अनियंत्रित खनन नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए पिछले दिनों वह एसडीएम हिमांशु कफल्टिया को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं।
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वर्षाकाल खत्म होने के बाद दो अक्तूबर को ही खनन खोलने के आदेश हो चुके हैं, लेकिन विभागीय तैयारी न होने से खनिज निकासी शुरू नहीं हो सकी। इसी बीच 17 से 19 अक्तूबर तक की अतिवृष्टि में शारदा का जल स्तर बढ़ने से भी विभागीय तैयारी में रुकावट आई। अब नदी का जल स्तर कम हो चुका है, लेकिन विभाग ने खनन की तैयारी शुरू तक नहीं की है। इसके तहत वन विभाग को खनन क्षेत्र का सीमांकन करना है, जो विभागीय स्तर की अड़चन से शुरू नहीं हो पाया है।
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वन निगम के खनन प्रबंधक हरीश पाल का कहना है कि सीमांकन करवाने के लिए डीएफओ और रेंजर को पत्र भेजा गया है। वन विभाग से खनन क्षेत्र का सीमांकन होने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी। वहीं वन विभाग के एसडीओ आरके मौर्य का कहना है कि विभागीय स्तर पर कार्यवाही चल रही है। जल्द ही खनन क्षेत्र के सीमांकन के बाद शारदा से खनिज निकासी की मात्रा तय होगी। जल एवं मृदा परीक्षण आयोग देहरादून से प्रारंभिक तौर पर डेढ़ लाख घन मीटर खनिज निकासी को मंजूरी मिल जाएगी।
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बाद में आयोग की सर्वे टीम की रिपोर्ट के आधार खनिज निकासी की मात्रा बढ़ाई जाएगी। फिलहाल खनन खुलने में देरी से कारोबारियों समेत श्रमिक बेचैन और परेशान हैं। मां शारदा शक्तिमान ट्रक खनन समिति के अध्यक्ष आनंद सिंह महर अन्नी का कहना है कि कारोबारी, वाहन मालिक खनन के लिए तैयार हैं लेकिन विभागीय स्तर पर विलंब हो रहा है।
खनन से करीब 6500 लोगों का जुड़ा है रोजगार
टनकपुर (चंपावत)। शारदा में खनन से करीब 6500 लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। खनन प्रबंधक हरीश पाल के मुताबिक 800 वाहन मालिकों के साथ ही करीब 3000 वाहनों के श्रमिक और 2500 खनन श्रमिकों को खनन से रोजगार मिलता है। शारदा के अप स्ट्रीम में इस बार भी खनन पर संशय की स्थिति है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने वर्ष 2013 में अप स्ट्रीम में खनन पर रोक लगा दी थी, लेकिन बाद में अनुमति की प्रत्याशा में छह साल तक खनन होता रहा और 2019 में वन विभाग ने अनुमति न मिलने की स्थिति में फिर अप स्ट्रीम में खनन पर रोक लगा दी।
लधिया और क्वेराला में बगैर सीमांकन नहीं होने देंगे खनन
टनकपुर (चंपावत)। पिछले माह आई बाढ़ से हुए नुकसान से चिंतित नौलापानी के ग्रामीणों ने इस बार लधिया और क्वेराला नदी में सीमांकन से पहले खनन न होने देने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अनियंत्रित खनन से आसपास के गांवों को खतरा हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से खनन का ठेका आवंटित करने से पहले खनन क्षेत्र का सीमांकन करवाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने बताया कि रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत लधिया और क्वेराला नदी में खनन के पट्टे आवंटित किए जाते हैं। इस वर्ष भी खनन पट्टों की नीलामी की तैयारी है, लेकिन पिछले वर्ष बगैर सीमांकन के हुए अनियंत्रित खनन से आसपास के गांवों के लिए खतरा हो गया है। ग्राम प्रधान गीता देवी, सरपंच राजेंद्र प्रसाद जोशी, मथुरा दत्त जोशी, रघुवर सिंह, दीपक जोशी, महेश चंद्र जोशी आदि ग्रामीणों का कहना है कि इस बार सीमांकन बगैर खनन नहीं होने दिया जाएगा। उनका कहना है कि वे सरकार की नीति के विरोध में नहीं है, लेकिन बगैर सीमांकन अनियंत्रित खनन नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए पिछले दिनों वह एसडीएम हिमांशु कफल्टिया को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं।