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जिला अस्पताल में सिर्फ दुआओं का आसरा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Thu, 24 Sep 2015 11:13 PM IST
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जिला अस्पताल जिले का सबसे बड़ा स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन ये अस्पताल लोगों को जिंदगी देने का भरोसा नहीं दे पा रहा है। काफी बड़ी संख्या में यहां के सामान्य मरीजों को आगे जाना पड़ता है। और तो और गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह अस्पताल खुशी की सौगात कम ही लाता है। इसकी वजह अस्पताल में गायिनीकोलॉजिस्ट का न होना है। ब्लड बैंक की सुविधा भी नदारद है।
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जिला अस्पताल में 26 में से संविदा मिलाकर 11 डॉक्टर हैं। इनमें भी दो डॉक्टर लंबे समय से गैर हाजिर हैं। उपलब्ध स्टाफ में भी डिलीवरी की जटिलता से निपटने के लिए डॉक्टरों की कमी है। वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायिनीकोलॉजिस्ट), फिजिशियन, बाल रोग विशेषज्ञ और निश्चेतक नहीं है। ये तमाम विशेषज्ञ डॉक्टर जच्चे-बच्चे की सुरक्षा के मद्देनजर जरूरी हैं। अधिक रक्तस्राव होने पर खून की जरूरत होती है, लेकिन जिला अस्पताल में इसकी भी व्यवस्था नहीं है।
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ब्लड बैंक भवन बने तीन साल से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अधिसूचना नहीं होने से ये भी लटका हुआ है। जाहिर है ऐसे में खतरे भी बने रहेंगे और गर्भवती रेफर करने की मजबूरी भी बनी रहेगी। चिकित्साधीक्षक डा.एसबी ओली ने बताया कि अस्पताल की जरूरतों को लगातार उच्चाधिकारियों के सम्मुख रखा जाता रहा है, लेकिन फिलहाल कोई कारगर उपाय नहीं हो सके हैं।
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रेफर किया पर अस्पताल में ही हो गई डिलीवरी
बुड़ाखेत गांव की रेखा देवी ने बेटे को जन्म दिया। मां और शिशु की सेहत अब बेहतर है, लेकिन जिला अस्पताल के हाल रेखा की डिलीवरी लायक नहीं थे। उसे बुधवार की आधी रात को यहां से उच्च केंद्र के लिए रेफर कर दिया गया था। एंबुलेंस 108 को भी इसके लिए बुला लिया गया था, मगर रेखा के साथ आई बाजरीकोट की देवकी देवी इसके लिए तैयार नहीं हुई और रात करीब 1 बजे बाद रेखा ने पांचवीं संतान को जन्म दिया। उधर, डा.राशि भटनागर और डा.प्रदीप बिष्ट का कहना है कि रेखा की तबियत बेहद खराब थी। रक्तचाप बढ़ा (180/120) हुआ था। तमाम प्रयास करने के बाद भी रक्तचाप सामान्य नहीं हो रहा था। साथ ही कुछ अन्य दिक्कतें भी हो रही थी। जेडी डा.आरके जोशी का कहना है कि ऐसे में गर्भवती को दौरे पड़ने के साथ ही शिशु की जिंदगी पर भी खतरा था। अस्पताल में पर्याप्त सुविधा नहीं होने से गर्भवती को रेफर किया गया था।
दो डॉक्टर टनकपुर अटैच
जिला अस्पताल के कई डॉक्टरों का अटैचमेंट किया गया है। पूर्व सीएमओ ने रेडियोलॉजिस्ट को सप्ताह के तीन दिन टनकपुर संबद्ध किया। इसी तरह यहां के निश्चेतक को भी टनकपुर अटैच किया गया है। जिला अस्पताल में संविदा पर तैनात निश्चेतक का भी नवीनीकरण नहीं किया गया।
जिला अस्पताल सहित जिले के दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों की कमियों को दूर करने के लिए शनिवार को देहरादून में स्वास्थ्य महानिदेशक से आग्रह किया जाएगा। जिले में जरूरी पदों को भरने और बेवजह हुए संबद्धीकरणों को निरस्त किया जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा। -डा.विनोद सिंह टोलिया, सीएमओ