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खत्म हुआ 10 साल का ‘वनवास’, आंखों ही आंखों में हुई बात

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 20 Nov 2019 10:00 PM IST
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ITPB soilder return back to back after 10 years
चंपावत में दोनों भाई, पत्नी और बेटों के साथ विक्रम सिंह। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। ‘लंबे अरसे बाद उनसे यूं मुलाकात हुई, आंखों ही आंखों में सारी बात हुई, यूं तो मिलना तय न था, फिर भी सरेराह ये बरसात हुई...।’ यह बारिश आसमान से नहीं बल्कि पति विक्रम और पत्नी मंजू की आंखों से हो रही थी जो 10 साल बाद एक दूसरे से मिल रहे थे। बुधवार सुबह 9:25 बजे, पूरे 10 साल से लापता विक्रम की घर वापसी पर हुई इस मुलाकात के साक्षी दोनों भाई, भाभी, बेटे, बहु और पूरा परिवार था। हर किसी की आंखों में खुशी के आंसू थे। सभी ने पूजा-अर्चना और मंगल गीत गाकर विक्रम का स्वागत किया।
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आईटीबीपी कानपुर में तैनात एसआई दो फरवरी 2010 से लापता थे। सुराग लगने पर दिल्ली से उनके दो रिश्तेदार नरेश माहरा और सुरेश सिंह बुधवार को विक्रम सिंह को लेकर डुंगरासेठी गांव पहुंचे। विक्रम सिंह को देखकर पत्नी मंजू, बड़े भाई आईटीबीपी के रिटायर्ड अधिकारी डूंगर सिंह व नारायण सिंह, भाभी जैमंती देवी, गीता देवी, बेटे संदीप, प्रदीप आदि का खुशी का ठिकाना न रहा। परिजनों का कहना है कि बेशक 10 साल का यह वनवास खत्म हो गया, लेकिन यह वक्त पूरे परिवार के लिए तकलीफों भरा रहा।
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खोजबीन, पूछताछ और तमाम तरह की धार्मिक गतिविधियों में मोटी रकम भी खर्च हुई। अलबत्ता कभी भी उन्होंने विक्रम के सकुशल वापसी की उम्मीदें नहीं छोड़ी। परिजन बताते हैं कि इस दौरान आईटीबीपी की ओर से उन्हें विक्रम सिंह की जमा राशि के तीन लाख रुपये जरूर मिले। परिजनों का कहना है कि उनके स्वास्थ्य को लेकर डॉक्टरों को दिखाया जाएगा। साथ ही परिजन फरवरी 2010 में की गई गुमशुदगी की रिपोर्ट को निरस्त कराएंगे।
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सब कुछ बदल गया : विक्रम
चंपावत। विक्रम अपने गांव से आखिरी बार 20 दिसंबर 2009 को निकले थे। पूरे नौ सा 11 महीने बाद उनकी घर वापसी हुई है। अब 58 साल के हो चुके विक्रम का कहना है कि छुट्टी पूरी होने के बाद वे जब अंतिम बार नौकरी के लिए निकले थे, तब गांव में रोड नहीं थी। काफी हिस्सा पैदल चल कर जाना था। अब जब वे घर पहुंचे हैं, तो घर तक सड़क पहुंच गई है। 10 वर्ष के दौरान दोनों बेटियों रेखा, हेमा और एक बेटे संदीप का विवाह हो चुका है। दूसरा बेटा प्रदीप अभी पढ़ रहा है। इन सब काम में उनके बड़े भाइयों और रिश्तेदारों ने मदद की। अभी विक्रम सिंह को कई चीजें ठीक से याद नहीं है।
दस साल तक क्या किया, कहां रहे, विक्रम को याद नहीं
आसान नहीं था बेसुध विक्रम को पहचानना, खोज निकालने में दो रिश्तेदारों की अहम भूमिका
अमर उजाला ब्यूरो
चंपावत। विक्रम सिंह को बीते दस वर्षों का घटनाक्रम याद नहीं है। वे इस दौरान कहां-कहां गए, कैसे रहे, कहां खाया और क्या-क्या किया ये बातें उन्हें याद नहीं। रिश्तेदारों ने जब उन्हें खोज निकाला तो उनकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी, कपड़े गंदे थे और बेसुध हाल में थे।
विक्रम के परिजन बताते हैं कि अवकाश के बाद 20 दिसंबर 2009 को आईटीबीपी कानपुर पहुंचने के बाद जनवरी 2010 के आखिर में विभागीय कार्य से चंडीगढ़ उच्च न्यायालय जाना पड़ा। वहां से एक फरवरी को वे वापस कानपुर आए। आईटीबीपी पहुंचने के बाद दो फरवरी की सुबह को वे अपने बिस्तर से गायब मिले। परिजन बताते हैं कि तब अधिकारियों ने बताया था कि सुबह करीब पांच बजे चाय देने के लिए पहुंचे कर्मी ने उनके गायब होने की सूचना दी। आईटीबीपी, परिजन और चंपावत पुलिस के प्रयासों के बावजूद उनकी तब से कोई खोज-खबर नहीं थी। विक्रम के बड़े भाई की माने तो कानपुर आते वक्त विक्रम ने रास्ते में कुछ खा लिया था।
विक्रम को खोज निकालने में सबसे अहम भूमिका उनके दो रिश्तेदारों नरेश माहरा और विक्रम के साले सुरेश सिंह की है। किसी से मिली जानकारी के बाद 18 नवंबर को दोनों रिश्तेदार कनाट प्लेस के हनुमान मंदिर गए तो उन्हें मिलते-जुलते हुलिये का एक बुजुर्ग व्यक्ति सीढ़ी पर नजर आया। लंबी दाढ़ी, गंदे कपड़े के चलते उन्हें पहचानना काफी मुश्किल था।
काफी देर तक विक्रम ने उनसे कोई बात नहीं की। दोनों रिश्तेदारों ने जब पहाड़ी में बोलना शुरू किया, तो बेसुध विक्रम भी जवाब देने लगे। उन्हें थोड़ा बहुत अपने गांव और परिवार की याद आने लगी। इसके बाद दोनों रिश्तेदारों ने उनके हुलिये को ठीक कर उनके फोटो को परिजनों को व्हाट्सएप किया। परिजनों ने फोटो वाले व्यक्ति के विक्रम सिंह होने की पुष्टि की। जिसके बाद बुधवार सुबह उन्हें घर लाया जा सका।
दल्ली में होने का ऐसे चला पता
चंपावत। करीब छह माह पहले दिल्ली में काम करने वाले चंपावत के सल्ली गांव के निवासी नाथ सिंह की मुलाकात दिल्ली के हनुमान मंदिर में भटकते विक्रम सिंह से हुई। दोनों एक दूसरे को जानते नहीं थे। मगर बात-बात में विक्रम सिंह ने अपने गांव डुंगरासेठी का जिक्र किया। इस बात को नाथ सिंह भूल भी गए। कुछ दिनों पहले नाथ सिंह छुट्टी में घर आए, तो डूंगरासेठी के रिटायर्ड शिक्षक देव सिंह चौधरी से मुलाकात होने पर विक्रम सिंह के हनुमान मंदिर में बेसुध हाल में होने की बात कही। शिक्षक देव सिंह ने विक्रम सिंह के परिजनों को पूरी बात बताई, जिसके बाद विक्रम को ढूंढा जा सका।
आईटीबीपी के करीब दस साल तक लापता रहे उप निरीक्षक विक्रम सिंह के संबंध में होने वाली किसी भी कार्यवाही का इस कार्यालय से कोई संबंध नहीं है। इस संबंध में कोई भी कार्यवाही या जानकारी मुख्यालय से ही मिल सकेगी। - वीरेंद्र कुमार, डिप्टी कमांडेंट, आईटीबीपी, लोहाघाट।
12 साल बाद वापस आया था गागरी का प्रेम
रीठा साहिब (चंपावत)। 2005 से गायब पाटी ब्लाक के गागरी गांव निवासी प्रेम सिंह बोहरा का भी 12 साल बाद पिछले साल फरवरी में सुराग लगा था। डाक से उनके गांव के पते पर पहुंचे आधार कार्ड में दर्ज मोबाइल नंबर से उनकी लोकेशन पता चली। इसके बाद एसपी धीरेंद्र गुंज्याल ने पुलिस टीम भेज प्रेम सिंह को 6 फरवरी 2018 को राजस्थान से खोज निकाला था। अब प्रेम सिंह सड़क निर्माण के कार्य में लगा हुआ है।
चार माह से लापता दीपक हरियाणा मेें मिला
टनकपुर (चंपावत)। पत्नी से झगड़ा हुआ तो फेसबुक पर जिंदगी को अलविदा कहकर लापता हुआ टनकपुर का युवक चार माह बाद पुलिस ने हरियाणा से खोज निकाला। युवक के मिलने से परिजनों को राहत मिली है। पूछताछ के बाद पुलिस ने युवक को परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।
शहर के वार्ड संख्या एक निवासी दीपक (30) बीते 13 अगस्त को अपने फेसबुक एकाउंट पर जिंदगी को अलविदा कहने का संदेश वायरल कर अचानक लापता हो गया था। उसने फेसबुक में संदेश वायरल किया था कि मैं दुनिया से जा रहा हूं क्योंकि मेरी बीबी ने मुझे कुछ नहीं समझा, हमेश मारती रहती है। सबूत सामने है और देखना है तो पंचमुखी धर्मशाला के सीसीटीवी कैमरे में देख लेना। शक का कोई ईलाज नहीं वही बात साबित हुई है। इस संदेश को पढ़ने के बाद से परिजन परेशान थे।
दीपक के पिता आलोक कुमार ने संदेश पढ़ने के बाद 13 अगस्त को कोतवाली में बेटे की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। मामले की छानबीन कर रहे उप निरीक्षक तेज कुमार ने बताया कि संदेश वायरल करने के बाद दीपक ने बरेली के एक मोबाइल शॉप पर मोबाइल को फॉरमेट करने के बाद बेच दिया था।

सर्विलांस की मदद से पहले बरेली के बटलर प्लाजा से उसका मोबाइल बरामद किया गया है और फिर सुरागकशी कर उसे सुकराली माता मंदिर वाली गली सेक्टर 17 गुरुग्राम, हरियाणा से सकुशल बरामद कर परिजनों के सुपुर्द किया गया है। पुलिस टीम में उप निरीक्षक तेज कुमार के अलावा कांस्टेबल विजय कुमार, भुवन पांडेय और कांस्टेबल सद्दाम हुसैन शामिल थे।

जश्न: दस साल से लापता विक्रम सिंह के घर पहुंचने पर खुशी में मुंह मीठा करते परिजन।

जश्न: दस साल से लापता विक्रम सिंह के घर पहुंचने पर खुशी में मुंह मीठा करते परिजन।- फोटो : CHAMPAWAT

दस साल तक लापता रहने के बाद घर पहुंचने पर विक्रम सिंह का फूल-मालाओं से स्वागत करते परिजन।

दस साल तक लापता रहने के बाद घर पहुंचने पर विक्रम सिंह का फूल-मालाओं से स्वागत करते परिजन।- फोटो : CHAMPAWAT

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