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भिंगराड़ा आईटीआई का सामान खेतीखान भेजा
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भिंगराड़ा आईटीआई के बंद होने पर सामान व स्टाफ को शिफ्ट करने के विरोध में प्रदर्शन करते ग्रामीण।
- फोटो : CHAMPAWAT
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पाटी ब्लॉक के भिंगराड़ा के आईटीआई को बंद करने के बाद स्टाफ और फर्नीचर को दूसरी जगह शिफ्ट करने से लोगों में गहरी नाराजगी है। विरोध में शनिवार को गांव के लोगों ने भिंगराड़ा में जोरदार प्रदर्शन किया।
कहा कि अक्तूबर में अल्मोड़ा में हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में भवन निर्माण के लिए धन स्वीकृत किया गया लेकिन पहले से चल रहे आईटीआई को बंद किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि आईटीआई का दोबारा संचालन नहीं होने पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
नागरिकों ने कहा कि 2015 में स्टेट काउंसिल ऑन वोकेशनल ट्रेनिंग (एससीवीटी) से मान्यता प्राप्त श्रेणी का आईटीआई भिंगराड़ा में खुला।
इसमें भी दो में से सिर्फ एक ही ट्रेड चला। ट्रेडों की संख्या बढ़ाने के साथ सरकार इसे बेहतर बनाने के बजाय बंद करने पर तुली है। नागरिकों ने कहा कि यहां आईटीआई भवन निर्माण के लिए ग्रामीणों ने जमीन भी दान दी थी लेकिन निर्माण के बजाय अब आईटीआई के सामान और स्टाफ को दूसरी जगह भेज दिया गया है।
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कहा कि आईटीआई बंद करने से लधिया घाटी के गांवों के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने फिर से आईटीआई का संचालन नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। विरोध प्रदर्शन में ग्राम प्रधान रीता भट्ट, सतीश भट्ट, उमेश भट्ट, दीपक शर्मा, कमल भट्ट, दिनेश भट्ट, खीमानंद भट्ट, अशोक भट्ट, मदन सिंह, प्रकाश कुंवर, रमेश सिंह, दिवान सिंह आदि शामिल थे।
भिंगराड़ा सहित किसी भी एससीवीटी से मान्यता प्राप्त आईटीआई को संचालित करने का फिलहाल प्रस्ताव नहीं है। भिंगराड़ा का आईटीआई दो कमरों में चल रहा था। इसके बंद होने से यहां का सामान सबसे नजदीक के खेतीखान के आईटीआई में भेजा जा रहा है। इसी तरह यहां के रेग्युलर स्टाफ को भी जरूरत के हिसाब से दूसरी जगह भेजा जा रहा है। आरएस मर्तोलिया, निदेशक, आईटीआई, टनकपुर।
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कहा कि अक्तूबर में अल्मोड़ा में हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में भवन निर्माण के लिए धन स्वीकृत किया गया लेकिन पहले से चल रहे आईटीआई को बंद किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि आईटीआई का दोबारा संचालन नहीं होने पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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नागरिकों ने कहा कि 2015 में स्टेट काउंसिल ऑन वोकेशनल ट्रेनिंग (एससीवीटी) से मान्यता प्राप्त श्रेणी का आईटीआई भिंगराड़ा में खुला।
इसमें भी दो में से सिर्फ एक ही ट्रेड चला। ट्रेडों की संख्या बढ़ाने के साथ सरकार इसे बेहतर बनाने के बजाय बंद करने पर तुली है। नागरिकों ने कहा कि यहां आईटीआई भवन निर्माण के लिए ग्रामीणों ने जमीन भी दान दी थी लेकिन निर्माण के बजाय अब आईटीआई के सामान और स्टाफ को दूसरी जगह भेज दिया गया है।
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कहा कि आईटीआई बंद करने से लधिया घाटी के गांवों के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने फिर से आईटीआई का संचालन नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। विरोध प्रदर्शन में ग्राम प्रधान रीता भट्ट, सतीश भट्ट, उमेश भट्ट, दीपक शर्मा, कमल भट्ट, दिनेश भट्ट, खीमानंद भट्ट, अशोक भट्ट, मदन सिंह, प्रकाश कुंवर, रमेश सिंह, दिवान सिंह आदि शामिल थे।
भिंगराड़ा सहित किसी भी एससीवीटी से मान्यता प्राप्त आईटीआई को संचालित करने का फिलहाल प्रस्ताव नहीं है। भिंगराड़ा का आईटीआई दो कमरों में चल रहा था। इसके बंद होने से यहां का सामान सबसे नजदीक के खेतीखान के आईटीआई में भेजा जा रहा है। इसी तरह यहां के रेग्युलर स्टाफ को भी जरूरत के हिसाब से दूसरी जगह भेजा जा रहा है। आरएस मर्तोलिया, निदेशक, आईटीआई, टनकपुर।