{"_id":"584053704f1c1b0c1ede7a77","slug":"it-takes-two-days-to-reach-the-door-of-the-bank","type":"story","status":"publish","title_hn":"बैंक के दरवाजे तक पहुंचने में लग जाते हैं दो दिन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बैंक के दरवाजे तक पहुंचने में लग जाते हैं दो दिन
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
Updated Thu, 01 Dec 2016 10:14 PM IST
विज्ञापन
बैंक
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
डांडा के 70 साल के पूरन सिंह पूर्व फौजी है, लेकिन इस बुजुर्ग को अपनी पेंशन की रकम पाने के लिए एड़ियां रगड़नी पड़ती है। ऐसे ही हाल पूर्व सैनिक बहादुर सिंह की विधवा सहित अन्य ग्रामीण लोगों के हैं। वजह डांडा और इससे लगी चार ग्राम पंचायत के नौ गांवों में बैंकिंग की किसी तरह की सुविधा का न होना है। बैंक तक जाने के लिए एक तरफ का 35 किलोमीटर पैदल और 24 किलोमीटर सड़क की दूरी तय करना इस इलाके के लोगों की मजबूरी है। अधिक फासले के चलते उन्हें बैंक के काम के लिए दूसरा दिन लग जाता है।
डांडा, ककनई, बुड़म, मथियाबांज ग्राम पंचायत के 11 गांवों की करीब 4100 की आबादी के लिए बैंक का दरवाजा देखना नई दुनिया से रूबरू होना सरीखा है। ग्राम प्रधान खष्टी देवी, सदानंद सहित इन इलाकों के ग्रामीण बताते हैं कि एनएच पर स्थित सूखीढांग से डांडा की पैदल दूरी 35 किमी और बुड़म से दूरी 26 किमी है।
उतार-चढ़ाव वाले इस पैदल रास्ते को पार करने में 6 से 8 घंटे तक लगते हैं। और फिर सूखीढांग से सड़क मार्ग से 24 किलोमीटर दूर टनकपुर के बैंकों तक पहुंचा जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह कहते हैं कि डांडा के लोगों को बैंक जाने और वापस आने में तीन दिन लग जाते हैं।
विज्ञापन
इस दौरान दो रात उन्हें टनकपुर में काटनी पड़ती है। इस अवधि में खाने और रहने में 700 रुपए खर्च हो जाते हैं। ग्रामीण काफी समय से बैंक की शाखा खुलने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है।
जिले के ढेरों ग्रामीण इलाके अभी बैंकिंग सुविधा से दूर हैं। दूरस्थ डांडा में फिलहाल बैंक खोले जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। अलबत्ता हालात के मुताबिक समीक्षा कर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
आनंद सिंह रावत, लीड बैंक अधिकारी, चंपावत।
डांडा, ककनई, बुड़म, मथियाबांज ग्राम पंचायत के 11 गांवों की करीब 4100 की आबादी के लिए बैंक का दरवाजा देखना नई दुनिया से रूबरू होना सरीखा है। ग्राम प्रधान खष्टी देवी, सदानंद सहित इन इलाकों के ग्रामीण बताते हैं कि एनएच पर स्थित सूखीढांग से डांडा की पैदल दूरी 35 किमी और बुड़म से दूरी 26 किमी है।
विज्ञापन
उतार-चढ़ाव वाले इस पैदल रास्ते को पार करने में 6 से 8 घंटे तक लगते हैं। और फिर सूखीढांग से सड़क मार्ग से 24 किलोमीटर दूर टनकपुर के बैंकों तक पहुंचा जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह कहते हैं कि डांडा के लोगों को बैंक जाने और वापस आने में तीन दिन लग जाते हैं।
विज्ञापन
इस दौरान दो रात उन्हें टनकपुर में काटनी पड़ती है। इस अवधि में खाने और रहने में 700 रुपए खर्च हो जाते हैं। ग्रामीण काफी समय से बैंक की शाखा खुलने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है।
जिले के ढेरों ग्रामीण इलाके अभी बैंकिंग सुविधा से दूर हैं। दूरस्थ डांडा में फिलहाल बैंक खोले जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। अलबत्ता हालात के मुताबिक समीक्षा कर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
आनंद सिंह रावत, लीड बैंक अधिकारी, चंपावत।