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सैनिक कल्याण कार्यालय में वित्तीय अनियमितताएं उजागर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।
Updated Mon, 01 May 2017 10:19 PM IST
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यहां सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के माध्यम से पूर्व सैनिक कल्याण कार्यालय में वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुई हैं। सैनिक कल्याण कार्यालय में तैनात एक पूर्व सैनिक केदार दत्त रैंसवाल ने आरटीआई के माध्यम से वित्तीय अनियमितताएं उजागर करने के साथ ही सभी मामलों की डीएम से शिकायत कर जांच की मांग उठाई थी, जिस पर डीएम डॉ. अहमद इकबाल ने एसडीएम सदर को जांच सौंपी थी।
जांच में पूर्व सैनिक के सभी आरोप सही पाए गए, जिसके बाद डीएम ने सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास निदेशक को नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की है। चंपावत जीआईसी रोड निवासी केदार सिंह सेना से सूबेदार क्लर्क पद से 30 जून 2012 को सेवानिवृत्त होने के बाद 16 जनवरी 2014 को जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय में नियुक्त हुए।
जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में सेवा के दौरान वहां की अनियमितताओं की जानकारी होने पर उन्होंने डीएम को शिकायत की। उन्होंने विभागीय विश्राम गृह में रहने वाले अनुसेवक को नियम विरुद्ध कई सालों से आवास भत्ता देने, सैनिक कल्याण अधिकारी की ओर से अनधिकृत रूप से एक सेविका और तीन पालतू कुत्ते को विश्राम गृह में रखने, नियमों के खिलाफ लंबे समय तक सैनिक विश्रामगृह में निवास करने, टनकपुर सैनिक विश्रामगृह परिसर में बिना अनुमति के शीशम के दो पेड़ कटवा कर बिक्री किए जाने और उसकी धनराशि तीन माह बाद जमा करने, वर्ष 2014-15 में बोनस की धनराशि का भुगतान एक कर्मचारी को छोड़कर सबको करने के आरोप लगाए थे।
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उन्होंने इन आरोपों के संबंध में आरटीआई से जानकारी जुटाई और डीएम से शिकायत की। डीएम डॉ. अहमद इकबाल के अनुसार एसडीएम की जांच में जिला सैनिक कल्याण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगाए गए आरोप सिद्ध पाए गए हैं। उन्होंने सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास विभाग के निदेशक को नियमानुसार कार्रवाई की संस्तुति भेज दी गई है।
अनियमितताओं से आजिज आकर दिया था इस्तीफा
पूर्व सैनिक कल्याण कार्यालय में व्याप्त अनियमितताओं को उजागर करने वाले पूर्व सैनिक केदार सिंह ने पहले विभागीय अधिकारियों को अनियमितताओं की जानकारी दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने आजिज आकर आठ जुलाई 2016 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने इस्तीफे में वित्तीय अनियमितताओं को जिम्मेदार बताते हुए इनके निस्तारण नहीं होने तक सेवा में असमर्थ होने की बात कही। पूर्व सैनिक का कहना है कि यदि वह चाहते तो उस विभाग में अभी नौ साल तक और सेवा कर सकते थे।
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जांच में पूर्व सैनिक के सभी आरोप सही पाए गए, जिसके बाद डीएम ने सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास निदेशक को नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की है। चंपावत जीआईसी रोड निवासी केदार सिंह सेना से सूबेदार क्लर्क पद से 30 जून 2012 को सेवानिवृत्त होने के बाद 16 जनवरी 2014 को जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय में नियुक्त हुए।
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जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में सेवा के दौरान वहां की अनियमितताओं की जानकारी होने पर उन्होंने डीएम को शिकायत की। उन्होंने विभागीय विश्राम गृह में रहने वाले अनुसेवक को नियम विरुद्ध कई सालों से आवास भत्ता देने, सैनिक कल्याण अधिकारी की ओर से अनधिकृत रूप से एक सेविका और तीन पालतू कुत्ते को विश्राम गृह में रखने, नियमों के खिलाफ लंबे समय तक सैनिक विश्रामगृह में निवास करने, टनकपुर सैनिक विश्रामगृह परिसर में बिना अनुमति के शीशम के दो पेड़ कटवा कर बिक्री किए जाने और उसकी धनराशि तीन माह बाद जमा करने, वर्ष 2014-15 में बोनस की धनराशि का भुगतान एक कर्मचारी को छोड़कर सबको करने के आरोप लगाए थे।
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उन्होंने इन आरोपों के संबंध में आरटीआई से जानकारी जुटाई और डीएम से शिकायत की। डीएम डॉ. अहमद इकबाल के अनुसार एसडीएम की जांच में जिला सैनिक कल्याण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगाए गए आरोप सिद्ध पाए गए हैं। उन्होंने सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास विभाग के निदेशक को नियमानुसार कार्रवाई की संस्तुति भेज दी गई है।
अनियमितताओं से आजिज आकर दिया था इस्तीफा
पूर्व सैनिक कल्याण कार्यालय में व्याप्त अनियमितताओं को उजागर करने वाले पूर्व सैनिक केदार सिंह ने पहले विभागीय अधिकारियों को अनियमितताओं की जानकारी दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने आजिज आकर आठ जुलाई 2016 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने इस्तीफे में वित्तीय अनियमितताओं को जिम्मेदार बताते हुए इनके निस्तारण नहीं होने तक सेवा में असमर्थ होने की बात कही। पूर्व सैनिक का कहना है कि यदि वह चाहते तो उस विभाग में अभी नौ साल तक और सेवा कर सकते थे।