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भारतीय सेना एवं देश के लिए खास है 16 दिसंबर का दिन

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 15 Dec 2019 10:54 PM IST
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India-pakistan war
देश के लिए 16 दिसंबर का दिन विजय दिवस के रूप में याद रखने लायक है। सैनिकों एवं सैन्य शास्त्र (मिलेट्री साइंस) के छात्रों के लिए 1971 का भारत- पाक युद्ध पढ़ने लायक है। इस दिन भारतीय सेना के तत्कालीन जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा ने पाकिस्तानी फौज के कमांडर ले. जनरल आमिर अब्दुल्ला खान नियाजी समेत 95 हजार सैनिकों को सरेंडर कराया था।
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3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने अचानक भारत पर हवाई हमला बोल दिया था। तत्कालीन पाक राष्ट्रपति याहया खान की इस हरकत का जवाब देने को तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष एसएचएफजे मानिक शाह (सैम मानिक शाह) से विचार-विमर्श कर युद्ध की घोषणा की। 13 दिनों तक भारतीय सेना ने जांबाजी से युद्ध लड़ने के बाद पाक सेना को धूल चटा दी।
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भारतीय सेना के जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा ने पाक फौज कमांडर ले. जनरल आमिर अब्दुल्ला नियाजी को उनके 95 हजार सैनिकों के साथ सरेंडर करने को मजबूर कर दिया था। युद्ध में भारतीय फौज को फतह मिली लेकिन 2473 भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए। भारतीय फौज ने पूर्वी पाकिस्तान की मुक्ति वाहिनी के साथ मिलकर युद्ध लड़ा था। यह जीत भारतीय सेना के स्वर्णिम इतिहास में दर्ज है। वर्ष 1971 के युद्ध के बाद बांग्ला देश नया राष्ट्र बना जिसके पहले राष्ट्राध्यक्ष बंगबंधु मुजीबुर्रहमान बने थे ।
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वर्ष 1971 के युद्ध की कुछ खास बातें
1. 1युद्ध के बाद पाकिस्तान का तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान नया राष्ट्र बांग्ला देश बना।
2. पाक सेना के जनरल ने अपने 95 हजार सैनिकों और अन्य लोगों के साथ भारतीय जनरल के समक्ष सरेंडर किया था जो विश्व का सबसे बड़ा सरेंडर था।
3. भारतीय जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष सरेंडर करने वाले पाक जनरल ले. जनरल आमिर अब्दुल्ला नियाजी (दोनो) देहरादून स्थित सैन्य अकादमी (आईएमए) में सहपाठी थे।
4. भारतीय सेना ने तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) की मुक्ति वाहिनी के साथ युद्ध लड़ा था। मुक्ति वाहिनी को भारतीय अर्ध सेना बल एसएसबी ने प्रशिक्षित किया था। यह युद्ध एसएसबी के प्रशिक्षण की भी जीत थी।
6. बांग्ला देश का राष्ट्रगान आमार सोनार बांग्ला भारत के लिए पहला नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले साहित्यकार गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर की रचना है। किसी दूसरे देश का राष्ट्रगान भारतीय साहित्यकार की रचना से लिया जाना देश के लिए गौरव की बात है।

7. युद्ध के बाद तत्कालीन भारतीय थल सेनाध्यक्ष सैम मानिक शाह को पहले फील्ड मार्शल की उपाधि दी गई थी।
8. युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को विश्व की ताकतवर महिला के रूप में पहचान मिली। तत्कालीन गैर कांग्रेसी नेता अटल बिहारी बाजपेई ने इंदिरा गांधी को मां दुर्गा की संज्ञा दी थी।
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