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दस साल में भी नहीं खुल पाया शौचालय का ताला
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीरीठा साहिब/चंपावत
Updated Sun, 17 Jan 2016 10:28 PM IST
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लधिया घाटी की धुरी श्रीरीठा साहिब विश्व प्रसिद्ध गुरुद्वारे के लिए भी जाना जाता है। यहां पर तीर्थयात्रियों के लिए सार्वजनिक शौचालय की सुविधा तक नहीं है। यूं तो मोटी रकम खर्च कर यहां शौचालय बना है, मगर यह शौचालय कभी खुला ही नहीं।
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श्रीरीठा साहिब में राष्ट्रीय सम विकास योजना से वर्षो पूर्व 11 लाख रुपये से 10 सीट वाला शौचालय बना। मानव सेवा संस्थान ने इस शौचालय को बनाया। शौचालय भवन में कई खामियां रहीं और बनने के बाद से इसका उपयोग तो दूर बल्कि ताला तक नहीं खुल सका। जिला पंचायत सदस्य भोला सिंह बोहरा, पीएलवी हयात राम, भवान सिंह परवाल सहित तमाम लोगों का कहना है कि शौचालय को इस्तेमाल लायक बनाने के लिए कई बार प्रशासन से गुहार लगाई गई, मगर हालात नहीं सुधरे।
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ग्रामीणों ने बताया यह इलाके का एकमात्र शौचालय है बावजूद इसके इस्तेमाल लायक नहीं है। नागरिकों ने धन की बर्बादी रोकने के साथ ही इसे उपयोग लायक बनाने की मांग की है। इधर, टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मुख्यालय से करीब 43 किमी दूर सिन्याड़ी में 2008 में शौचालय बना था। लेकिन यह शौचालय बनने के बाद उपयोग में नहीं लाया जा सका। ग्रामीणों ने शौचालय को सार्वजनिक इस्तेमाल में लाने के लिए कई बार आग्रह भी किया, मगर नतीजा कुछ नहीं निकला।
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शौचालय ध्वस्त करने की रिपोर्ट का है इंतजार
धर्म और आस्था के केंद्र मां पूर्णागिरि दरबार में भी तीर्थयात्रियों को सुविधा देने के लिए 11 लाख रुपये में बनाए गए शौचालय का भी उपयोग नहीं हो सका। एक भी दिन इन शौचालयों का उपयोग नहीं हो सका। सितंबर में प्रशासनिक स्तर पर जांच के बाद खतरे की जद में आ रहे इस भवन को गिराने पर विचार हो रहा है। एसडीएम नरेश दुर्गापाल का कहना है कि टुन्नास क्षेत्र में बने इस शौचालय को रिपेयर करने अथवा रिपेयर नहीं होने की सूरत में गिराने के निर्देश बीडीओ को दिए थे। लेकिन ब्लॉक कार्यालय से अभी रिपोर्ट प्रशासन के पास नहीं पहुंची।
उपयोग में नहीं आ रहे 4800 शौचालय
चंपावत जिले में 49,209 परिवारों में से अब तक 35,676 में शौचालय बने हुए हैं। लेकिन ढेरों शौचालयों में ताला लटका है। विभागीय आकड़ों में ही करीब 4800 शौचालय बनने के बाद अब उपयोग में नहीं आ रहे हैं। गांवों से दूसरी जगह शिफ्ट होना, पानी की कमी और टूटने के बाद दोबारा नहीं बनाया जाना इसकी वजह है। जिले को 2017 तक शौचालय युक्त बना दिया जाएगा। 13,534 शौचालयों का निर्माण 2017 तक करने का लक्ष्य है।