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कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट नहीं, तो बगवाल में एंट्री नहीं

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 12 Aug 2021 11:57 PM IST
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If there is no negative report of Corona, then no entry in Bagwal
मां बाराही धाम देवीधुरा में होने वाली बगवाल। (फाइल फोटो) - फोटो : CHAMPAWAT
पाटी (चंपावत)। मां बाराही धाम देवीधुरा में 22 अगस्त को होने वाली बगवाल (फल-फूलों से खेली जाने वाली) सांकेतिक रूप से होगी। ये लगातार दूसरा अवसर है, जब बगवाल सांकेतिक रूप से होगी। सभी चारों खामों (चम्याल, गहरवाल, लमगड़िया और वालिग) के 11-11 प्रतिनिधि कोविड नियमों का पालन करते हुए बगवाल और पूजा-अर्चना में हिस्सा ले सकेंगे। इसके अलावा पुजारी और बगवाल से जुड़े 31 और लोगों को आने की इजाजत होगी। बगवाल में आने वाले सभी लोगों को कोरोना आरटीपीसीआर परीक्षण की निगेटिव रिपोर्ट लाना अनिवार्य होगा। दोनों टीके लगा चुके लोगों को भी परीक्षण कराना जरूरी होगा। ये निर्णय डीएम विनीत तोमर की अध्यक्षता और मां बाराही धाम मंदिर के पीठाचार्य कीर्ति बल्लभ शास्त्री के संचालन में मंदिर परिसर में बृहस्पतिवार को हुई बैठक में लिया गया। व्यापारियों के आग्रह पर इस बार बगवाल वाले दिन देवीधुरा में शराब को छोड़ अन्य दुकानें खोलने की अनुमति दी गई है।
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मंदिर समिति के अध्यक्ष खीम सिंह लमगड़िया, मुख्य पुजारी पंडित धर्मानंद, चम्याल खाम के मुखिया गंगा सिंह चम्याल, वालिक ख़ाम के बद्री सिंह बिष्ट, लमगड़िया खाम के वीरेंद्र सिंह और गहरवाल के मुखिया त्रिलोक सिंह बिष्ट ने कहा कि प्रशासन के दिशा-निर्देश और कोविड नियमों का पालन करते हुए बगवाल की परंपरा को निभाया जाएगा। एसपी लोकेश्वर सिंह ने बताया कि सांकेतिक रूप से बगवाल के आयोजन के लिए पुख्ता सुरक्षा बंदोबस्त किए जाएंगे। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने बताया कि कोरोना के आरटीपीसीआर परीक्षण के लिए 19 और 20 अगस्त को वालिग, देवीधुरा और पाटी में शिविर लगाए जांएगे। 21 अगस्त से एंटीजन परीक्षण की व्यवस्था की गई है।
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ये लोग मौजूद थे:
ब्लॉक प्रमुख सुमनलता, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी राजेश कुमार, एसडीएम अनिल गर्ब्याल, सीओ अशोक कुमार सिंह, तहसीलदार सचिन कुमार, एसओ हरीश प्रसाद, एआरटीओ रश्मि भट्ट, जिला पर्यटन विकास अधिकारी लता बिष्ट, बीडीओ अमित ममगांई, रेंजर सुनील कुमार शर्मा, हयात सिंह, बिशन सिंह चम्याल, मोहन सिंह बिष्ट, रमेश राणा, लाल सिंह, दीपक बिष्ट, तारा चम्याल, ईश्वर बिष्ट, चंदन बिष्ट, लक्ष्मी दत्त, प्रकाश महरा, त्रिभुवन चम्याल, रमेश राम, दीपक चम्याल आदि।
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परंपरा निभाने को खेली जाती है बगवाल
पाटी (चंपावत)। चारों खाम (चम्याल, गहरवाल, लमगड़िया और वालिग) सहित कुल सात थोकों के योद्धा पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना के बाद फल-फूलों से बगवाल खेलते हैं। माना जाता है कि पूर्व में यहां नरबलि दिए जाने का रिवाज था, लेकिन जब चम्याल खाम की एक वृद्धा के एकमात्र पौत्र की बलि के लिए बारी आई, तो वंशनाश के डर से बुजुर्ग महिला ने मां बाराही की तपस्या की। देवी मां के प्रसन्न होने के बाद बगवाल की यह परंपरा शुरू हुई। तभी से ही बगवाल का सिलसिला चला आ रहा है। वैसे कोरोना से पहले 2019 तक खेली जाने वाली बगवाल के एक लाख से अधिक लोग साक्षी रहते थे। साथ ही दो सप्ताह तक बगवाल का मेला भी चलता था। ये मेला कोरोना महामारी की वजह से पिछले साल से नहीं हो रहा है।
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