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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   If the inspection can take the medicine on the wounds of patients!

तो मुआयने से लगेंगे मरीजों की जख्मों पर मरहम!

Wed, 16 Sep 2015 10:22 PM IST
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत Updated Wed, 16 Sep 2015 10:22 PM IST
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कमिश्नर ने बेशक बुधवार को जिला अस्पताल का मुआयना किया हो, लेकिन ऐसा नहीं कि अस्पताल की अव्यवस्था पहली बार उजागर हुई है। अभी इसी महीने डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने भी अस्पताल का दौरा किया था। इससे पूर्व भी यदा-कदा मुआयने होते रहे, लेकिन व्यवस्था में नाममात्र भी सुधार नहीं हुआ। सवाल यह कि क्या यह मुआयना मरीजों के दर्द को कम कर सकेगा। इसके उत्तर के लिए इंतजार करना होगा। वैसे ये जिला अस्पताल भी इस लायक भी नहीं है कि यहां ऑपरेशन हो सके।

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अक्तूबर 2012 से शुरू इस अस्पताल को 32 महीने बाद भी पहले ऑपरेशन का इंतजार है। अस्पताल में न ऑपरेशन टेबल है, न दूसरे उपकरण। इसकी जानकारी डीएम से लेकर सीएम तक सब को है। सुविधाओं और लापरवाही के अभाव में अब तक पांच मौतें हो चुकी हैं।
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अस्पताल में कुल 26 डॉक्टरों में से 11 ही तैनात है, जबकि स्वच्छक, वाहन चालक सहित कुल 18 पदों को आउटसोर्स किया जाना था, जो अब तक भरे नहीं गए हैं। एमएस एसबी ओली कहते हैं कि इन पदों को भरने के लिए बजट की मांग की गई है। सफाई के लिए इक्का-दुक्का स्वच्छक दूसरे अस्पतालों से संबद्ध किए गए हैं, लेकिन ये नाकाफी है और अस्पताल की गंदगी खुद मरीजों के लिए सिरदर्द बनी है। जिले के सबसे बड़े अस्पताल में वाहन भी नहीं है।
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दिसंबर 2011 से बंद है डॉक्टरों के आवास का काम
मरीजों को जिंदगी देने वाले डॉक्टरों को सरकारी छत नसीब नहीं है। जिला अस्पताल परिसर में डॉक्टर और अन्य मेडिकल स्टाफ की निर्माणाधीन कालोनी का काम 7 वर्ष में भी पूरा नहीं हो सका। चार साल से तो काम एकदम ठप है और अब भवन का ढांचा जर्जर होने के साथ ही झाड़ियां भी उग गई हैं। धन नहीं मिलने से काम में देरी हो रही है। साथ ही लागत भी 353 लाख बढ़ गई है। अगस्त 2008 से शुरू हुए आवासीय काम में 180.14 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। इस रकम के खर्च होने के बाद पैसा नहीं मिला। निर्माणदाई संस्था राजकीय निर्माण निगम का कहना है कि 401.52 लाख रुपये से बनने वाली आवासीय कालोनी की लागत अब बढ़कर 754.22 लाख हो गई है। दिसंबर 2011 से काम पूरी तरह ठप है। निगम का कहना है कि पैसा मिलने के बाद ही आगे काम शुरू होगा। अलबत्ता आयुक्त ने तीन दिन में संशोधित इस्टीमेट शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं।

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