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सड़क के मलबे की भेंट चढ़ा ऐतिहासिक टनकपुर-अस्कोट पैदल मार्ग
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बारहमासी सड़क निर्माण के मलबे से पटा ऐतिहासिक टनकपुर-अस्कोट पैदल मार्ग।
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। जिले में टनकपुर से पिथौरागढ़ तक निर्माणाधीन बारहमासी सड़क के मलबे की चपेट में आने से ऐतिहासिक टनकपुर-अस्कोट पैदल मार्ग का अस्तित्व पूरी तरह से मिट गया है। टनकपुर से अस्कोट तक करीब 140 किमी लंबे इस पैदल मार्ग का अधिकांश हिस्सा वर्तमान में मलबे की भेंट चढ़ गया है। चंपावत से टनकपुर के बीच करीब 55 किमी लंबा पैदल मार्ग पूरी तरह से खत्म हो गया है।
गौरतलब है कि 1960 के दशक में टनकपुर पिथौरागढ़ रोड बनने से पहले पहाड़ के लोग तराई भाबर पैदल ही आया जाया करते थे। लोग जिन रास्तों का प्रयोग करते थे, वह रास्ते चंद, कत्यूरी और पाल राजवंशों के बनाए हुए थे। एक दशक पूर्व तक लोनिवि की गैंग टनकपुर-अस्कोट पैदल मार्ग का रखरखाव करती थी। इतिहासकार डॉ.प्रशांत जोशी के अनुसार मुख्य रास्ते को टनकपुर अस्कोट पैदल मार्ग के रूप में आज भी जाना जाता है।
इसके कई शाखा मार्ग भी थे, उनमें से एक प्रमुख मार्ग चंपावत, हिंगलादेवी, बनलेख, मौराड़ी, बड़ोली, चानपुर होते हुए चल्थी तक था। यह रास्ता चल्थी में टनकपुर-अस्कोट पैदल मार्ग से जुड़ता था। ऐतिहासिक टनकपुर-अस्कोट पैदल मार्ग पर बारहमासी सडक़ के मलबे के कारण कई गांवों का आपस में संपर्क माध्यम भी खत्म हो गया है। बडोली के भुवन चंद्र, बनलेख के कमल जोशी, दुर्गादत्त, चंपावत के विवेक जोशी आदि का कहना है कि मलबे की वजह से धौन, बनलेख, ललुवापानी, हिंगलादेवी, चानपुर आदि गांवों का मुख्य पैदल मार्ग से संपर्क पूरी तरह समाप्त हो गया है।
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कई ग्रामीण कस्बों का अस्तित्व भी समाप्त
चंपावत। जिले में निर्माणाधीन टनकपुर-पिथौरागढ़ बारहमासी सड़क ने राष्ट्रीय राजमार्ग के कई ग्रामीण कस्बों का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया है। बारहमासी सड़क निर्माण ने चंपावत और टनकपुर के बीच पड़ने वाले धौन, बनलेख, स्वांला, अमोड़ी, बेलखेत, सूखीढांग आदि ग्रामीण कस्बाई इलाकों की सूरत ही बदल कर रख दी है, जबकि कुछ कस्बाई इलाकों का पूरी तरह से अस्तित्व खत्म हो गया है। (संवाद)
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गौरतलब है कि 1960 के दशक में टनकपुर पिथौरागढ़ रोड बनने से पहले पहाड़ के लोग तराई भाबर पैदल ही आया जाया करते थे। लोग जिन रास्तों का प्रयोग करते थे, वह रास्ते चंद, कत्यूरी और पाल राजवंशों के बनाए हुए थे। एक दशक पूर्व तक लोनिवि की गैंग टनकपुर-अस्कोट पैदल मार्ग का रखरखाव करती थी। इतिहासकार डॉ.प्रशांत जोशी के अनुसार मुख्य रास्ते को टनकपुर अस्कोट पैदल मार्ग के रूप में आज भी जाना जाता है।
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इसके कई शाखा मार्ग भी थे, उनमें से एक प्रमुख मार्ग चंपावत, हिंगलादेवी, बनलेख, मौराड़ी, बड़ोली, चानपुर होते हुए चल्थी तक था। यह रास्ता चल्थी में टनकपुर-अस्कोट पैदल मार्ग से जुड़ता था। ऐतिहासिक टनकपुर-अस्कोट पैदल मार्ग पर बारहमासी सडक़ के मलबे के कारण कई गांवों का आपस में संपर्क माध्यम भी खत्म हो गया है। बडोली के भुवन चंद्र, बनलेख के कमल जोशी, दुर्गादत्त, चंपावत के विवेक जोशी आदि का कहना है कि मलबे की वजह से धौन, बनलेख, ललुवापानी, हिंगलादेवी, चानपुर आदि गांवों का मुख्य पैदल मार्ग से संपर्क पूरी तरह समाप्त हो गया है।
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कई ग्रामीण कस्बों का अस्तित्व भी समाप्त
चंपावत। जिले में निर्माणाधीन टनकपुर-पिथौरागढ़ बारहमासी सड़क ने राष्ट्रीय राजमार्ग के कई ग्रामीण कस्बों का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया है। बारहमासी सड़क निर्माण ने चंपावत और टनकपुर के बीच पड़ने वाले धौन, बनलेख, स्वांला, अमोड़ी, बेलखेत, सूखीढांग आदि ग्रामीण कस्बाई इलाकों की सूरत ही बदल कर रख दी है, जबकि कुछ कस्बाई इलाकों का पूरी तरह से अस्तित्व खत्म हो गया है। (संवाद)