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हिंदी की दुर्दशा के लिए बढ़ती अंग्रेजियत जिम्मेदार
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
Updated Tue, 15 Sep 2015 10:31 PM IST
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राजकीय पीजी कॉलेज में हिंदी सप्ताह के तहत आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने अपने ही देश में राष्ट्रभाषा के शरणार्थी बनने पर लोगों में बढ़ती अंग्रेजियत को जिम्मेदार ठहराया। प्राचार्य प्रो.केकेएस नेगी की अध्यक्षता एवं हिंदी विभागाध्यक्ष डा.जगदीश जोशी के संचालन में हुई गोष्ठी में मुख्य अतिथि डा.परमानंद चौबे ने कहा कि हिंदी लोगों को आत्मा से जोड़ती है। आज इसे देश से अधिक विदेशों में लोग अपनाने लगे हैं।
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उन्होंने प्रख्यात साहित्यकार हिमांशु जोशी और उनके पुत्र अमित जोशी के प्रयासों को सराहा, जो विदेशों में जाकर हिंदी साहित्य की धवल पताका को फहरा रहे हैं। इस अवसर पर डा.स्वाति मेलकानी, डा.रुचिर जोशी, डा.धर्मेंद्र राठौर, डा.ऊषा जोशी, डा.कमलेश भाकुनी, डा.विमला देवी ने भी विचार रखे। प्राचार्य ने मुख्य अतिथि को महाविद्यालय की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस दौरान हुई वाद-विवाद प्रतियोगिता में शशांक पांडेय, अभय चतुर्वेदी, संजीव कुमार, निबंध प्रतियोगिता में यमुना प्रसाद जोशी, सपना, ज्योति पहले तीन स्थान में रहीं।
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