फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Heritage of KMVN

एक धरोहर को सहेजने में निकल गए पसीने!

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 25 Jan 2021 12:38 AM IST
विज्ञापन
Heritage of KMVN
चंपावत। कुमाऊं के चंद राजाओं की चंपावत 843 साल तक राजधानी रही। चंद राजाओं के राजबुंगा (किला) में मौजूदा तहसील और एसडीएम कार्यालय हैं। राजबुंगा के मूल स्वरूप को यथावत रखते हुए म्यूजियम (संग्रहालय) बनाने के लिए पांच साल पहले कार्ययोजना बनी थी। एडीबी के सहयोग से 15 करोड़ रुपये से सौंदर्यीकरण के अलावा बहुमंजिली पार्किंग और ऑडिटोरियम का निर्माण होना था। साथ ही यहां स्थित कार्यालयों को रोजिन फैक्ट्री की जमीन पर बनाया जाना था, लेकिन इनमें से एक भी काम शुरू नहीं हो सका। फिलहाल यह परियोजना ही खटाई में पड़ गई है।
विज्ञापन

सातवीं सदी में सोमचंद की ओर से स्थापित चंद राजवंश की 843 साल तक ऐतिहासिक नगरी चंपावत राजधानी रही। 13वीं सदी में स्थापित राजबुंगा के प्रवेशद्वार के पास नागनाथ का मंदिर भी है। राजबुंगा को मूल रूप में संजोने के काम के लिए तीन करोड़ रुपये की डीपीआर का 2015 में अनुमोदन भी हुआ। इसमें राजबुंगा को पुराने रूप-रंग में लाकर उसकी ऐतिहासिकता को बनाए रखने के अलावा संग्रहालय, हिमालयन आर्ट्स गैलरी, सूचना केंद्र, अध्ययन कक्ष आदि का निर्माण होना था, लेकिन राजबुंगा में स्थित कार्यालयों के नई जगह शिफ्ट होने की व्यवस्था न होने से यह काम शुरू नहीं हो सका। अब एडीबी से इस काम को छीन लिया गया है, लेकिन नई एजेंसी तय नहीं की गई है। एडीबी निर्माण खंड अल्मोड़ा के अभियंता डीसी पांडेय का कहना है कि यह परियोजना अब एडीबी से छीन ली गई है।
विज्ञापन

घटिया गुणवत्ता के बाद निर्माण कंपनी को किया निष्कासित
चंपावत। सबसे पुरानी तहसीलों में से एक चंपावत तहसील कार्यालय के नई जगह शिफ्ट होने के आसार कम हो गए हैं। 1873 में सृजित इस तहसील के कार्यालय के साथ एसडीएम, उप कोषागार, भूमि पंजीयन कार्यालय को रोजिन फैक्ट्री परिसर की जमीन पर बनाया जाना था, लेकिन ये काम पूरा होना टेढ़ी खीर हो गया है। न केवल तीन साल से काम बंद है, बल्कि अब तक निर्माण में लग चुके 1.51 करोड़ रुपये के भी बर्बाद होने का खतरा पैदा हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पुरानी लीसा फैक्ट्री के पास केएमवीएन की 28 नाली भूमि पर 5.61 करोड़ की लागत से पांच साल पहले तहसील परिसर में स्थित कार्यालयों का काम शुरू हुआ, लेकिन नमी वाली जमीन में आवासीय भवन के झुके बीम के अलावा घटिया गुणवत्ता के चलते काम रोक दिया गया। सीबीआरआई रुड़की की जांच रिपोर्ट के बाद काम करा रही सिमप्लेक्स कंपनी की निविदा को निष्कासित (टर्मिनेट) कर दिया गया।

गुणवत्ताहीन काम के चलते सिमप्लेक्स कंपनी को टर्मिनेट कर दिया गया है। एडीबी निर्माण खंड की पीआईयू को भी इस काम से हटा दिया गया है, लेकिन निर्माण के लिए नई एजेंसी तय नहीं की गई है। नई एजेंसी के निर्धारण के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। तहसील के नए भवन का काम पूरा होने के बाद ही राजबुंगा को पुराने रंग रूप मे बनाए रखते हुए ऐतिहासिक स्वरूप दिया जाएगा। सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed