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Champawat News: हैप्पी बर्थडे शारदा बैराज
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बनबसा स्थित शारदा बैराज। संवाद
- फोटो : TANAKPUR
बनबसा (चंपावत)। शारदा बैराज आज अपनी स्थापना का 95वां जन्मदिन मना रहा है। आज के ही दिन 11 दिसंबर 1928 में इस ऐतिहासिक बैराज को तत्कालीन यूपी संयुक्त प्रांत के गवर्नर सर मैलकम हेली ने राष्ट्र को समर्पित किया था। सिंचाई के लिए नहर निकालने के लिए बनाया गया बैराज 1960 के दशक से भारत-नेपाल के बीच आवागमन के लिए सेतु का भी कार्य कर रहा है। अलग राज्य बनने के बाद भी इस बैराज पर आज भी यूपी का ही अधिकार है।
104 वर्ष पूर्व 1918 में शारदा बैराज का निर्माण शुरू हुआ।
1856-57 में मद्रास इंजीनियर कोर के लेफ्टीनेंट एंडरसन ने नहर निकालने के लिए बनबसा को उपयुक्त पाया।
1857 के विद्रोह में इसके अभिलेख नष्ट होने पर एक डायरी के आधार पर सन 1867 में कैप्टन फारबेस ने सर्वे कराया।
1918 में बैराज का निर्माण शुरू किया गया। सर बरनार्ड डायरले ने बैराज का डिजाइन किया था तैयार
9.5 करोड़ की लागत से बने बैराज के निर्माण में लगे थे पच्चीस हजार श्रमिक
01 हजार लोगों की बैराज निर्माण में बीमारी, हादसे, डाकुओं से मुठभेड़ में गई थीं जानें
नियमित रखरखाव से बैराज अब भी कई साल तक सिंचाई में सहयोग देता रहेगा। बैराज से दस टन से अधिक का वजन का परिवहन बंद होने से बैराज लंबे समय तक कार्य करेगा और सुरक्षित रहेगा।
प्रशांत कुमार वर्मा, एसडीओ, शारदा हेडवर्क्स
बैराज की सुरक्षा उत्तराखंड पुलिस के जिम्मे है जिसके लिए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग से किसी तरह का आर्थिक सहयोग नहीं मिल रहा है। - अविनाश वर्मा, सीओ
लोगों को अचंभित करती है पिछली शताब्दी की तकनीक
बनबसा (चंपावत)। बैराज से निकली शारदा नहर के दक्षिण दिशा में करीब आठ किमी दूर धनुषपुल पर शारदा नहर का पानी साइफन विधि से आगे बहता है। नहर के ऊपर करीब डेढ़ सौ मीटर चौड़ा और ढाई सौ मीटर लंबा आरसीसी का प्लेटफार्म बनाया गया है जिससे पिछले साढ़े नौ दशकों से बरसाती नदी हुड्डी निरंतर बह रही है। नहर के ऊपर से नदी का बहना करीब पचानवे वर्ष पूर्व की तकनीक लोगों को अचंभित करती है।
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1. बैराज की लंबाई 598 मीटर।
2. नहर संचालन के लिए 16, बैराज संचालन के लिए बने 34 गेट।
4. नहर की फुललोड क्षमता है 11500 क्यूसेक।
5. छह लाख क्यूसेक है बैराज की जल घनत्व सहन क्षमता
6. नेपाल को भी उनकी जरूरत के मुताबिक दिया जाता है पानी।
9. बैराज से निकली नहर की लंबाई (बनबसा से रायबरेली तक) करीब 550 किमी।
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104 वर्ष पूर्व 1918 में शारदा बैराज का निर्माण शुरू हुआ।
1856-57 में मद्रास इंजीनियर कोर के लेफ्टीनेंट एंडरसन ने नहर निकालने के लिए बनबसा को उपयुक्त पाया।
1857 के विद्रोह में इसके अभिलेख नष्ट होने पर एक डायरी के आधार पर सन 1867 में कैप्टन फारबेस ने सर्वे कराया।
1918 में बैराज का निर्माण शुरू किया गया। सर बरनार्ड डायरले ने बैराज का डिजाइन किया था तैयार
9.5 करोड़ की लागत से बने बैराज के निर्माण में लगे थे पच्चीस हजार श्रमिक
01 हजार लोगों की बैराज निर्माण में बीमारी, हादसे, डाकुओं से मुठभेड़ में गई थीं जानें
नियमित रखरखाव से बैराज अब भी कई साल तक सिंचाई में सहयोग देता रहेगा। बैराज से दस टन से अधिक का वजन का परिवहन बंद होने से बैराज लंबे समय तक कार्य करेगा और सुरक्षित रहेगा।
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प्रशांत कुमार वर्मा, एसडीओ, शारदा हेडवर्क्स
बैराज की सुरक्षा उत्तराखंड पुलिस के जिम्मे है जिसके लिए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग से किसी तरह का आर्थिक सहयोग नहीं मिल रहा है। - अविनाश वर्मा, सीओ
लोगों को अचंभित करती है पिछली शताब्दी की तकनीक
बनबसा (चंपावत)। बैराज से निकली शारदा नहर के दक्षिण दिशा में करीब आठ किमी दूर धनुषपुल पर शारदा नहर का पानी साइफन विधि से आगे बहता है। नहर के ऊपर करीब डेढ़ सौ मीटर चौड़ा और ढाई सौ मीटर लंबा आरसीसी का प्लेटफार्म बनाया गया है जिससे पिछले साढ़े नौ दशकों से बरसाती नदी हुड्डी निरंतर बह रही है। नहर के ऊपर से नदी का बहना करीब पचानवे वर्ष पूर्व की तकनीक लोगों को अचंभित करती है।
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1. बैराज की लंबाई 598 मीटर।
2. नहर संचालन के लिए 16, बैराज संचालन के लिए बने 34 गेट।
4. नहर की फुललोड क्षमता है 11500 क्यूसेक।
5. छह लाख क्यूसेक है बैराज की जल घनत्व सहन क्षमता
6. नेपाल को भी उनकी जरूरत के मुताबिक दिया जाता है पानी।
9. बैराज से निकली नहर की लंबाई (बनबसा से रायबरेली तक) करीब 550 किमी।