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हस्तनिर्मित उत्पादों को महिलाएं दिला रही हैं विशिष्ट पहचान

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2020 11:09 PM IST
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Handmade products are giving women unique recognition
चंपावत के बमनपुरी गांव में हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार करती महिलाएं। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। जिले के बनबसा में स्थित थारू जनजाति बाहुल्य गांव बमनपुरी की महिलाएं हस्तनिर्मित उत्पादों को विशिष्ट पहचान दिला रही हैं। यहां भूमि स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं रिंगाल, कांस तथा मौज घास को अपना आजीविका का साधन बना कर टोकरी, फूलदान, हॉटपॉट आदि का निर्माण कर अच्छी आय अर्जित करने में लगी हैं। इससे पूर्व तक यह महिलाएं परंपरागत खेती किसानी के कार्य से आजीविका चलाती थी, लेकिन अब हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार करने में कम समय लगने के साथ उन्हें मुनाफा भी हो रहा है।
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जिला परियोजना निदेशक विम्मी जोशी के अनुसार बमनपुरी गांव की कुछ महिलाएं अपने खुद के उपयोग के लिए घास से निर्मित टोकरियां, फूलदान और अन्य वस्तुएं बनाती थीं। उनके कौशल को देखते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत उन्हें ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) से प्रशिक्षण दिया गया। बाद में महिलाओं को संगठित कर एक समूह का गठन किया गया। भूमि स्वयं सहायता समूह से जुड़ी गांव की महिला नीरू राणा बताती हैं कि पहले वह अपने उपयोग के लिए मौज घास, रिंगाल से टोकरी, फूलदान, रोटी रखने का हॉटपॉट, डलिया, सूप आदि वस्तुओं को बनाती थीं। बाद में आरसेटी में मिले एक माह के प्रशिक्षण के बाद बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर दिया है।
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समूह की अन्य महिलाएं बताती हैं कि पहले वह खेतों में काम करते थे, जिसमें काफी श्रम के साथ समय लगता था। लेकिन समूह में जुड़कर हस्तनिर्मित सामान बनाने से उन्हें लाभ हो रहा है। महिलाओं की ओर से तैयार टोकरी, फूलदान या अन्य सामान 200 से 400 रुपये तक में आसानी से बिक जा रहे हैं।
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उत्पादों की मांग बढ़ने पर प्रशासन ने की विपणन की व्यवस्था
चंपावत। भूमि स्वयं सहायता समूह की ओर से हस्तनिर्मित उत्पादों की मांग बढ़ने पर प्रशासन की ओर से विपणन की व्यवस्था की गई है। एडीपी विम्मी जोशी के अनुसार वर्तमान में गांव की 50 से अधिक महिलाएं इस कार्य से जुड़ी हुई हैं। जिनकी ओर से तैयार उत्पादों को आजीविका मिशन योजना के तहत ग्रोथ सेंटरों के माध्यम से बेचा जा रहा है। संवाद
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