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चाय फैक्ट्री ने बढ़ाया रकबा, बढ़ाया रोजगार
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Thu, 29 Sep 2016 11:24 PM IST
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चंपावत में बढ़ी चाय की खेती
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत। कफलांग में 13 नाली 7 मुट्ठी जमीन पर चाय फैक्ट्री बनेगी। इस फैक्ट्री के लिए चाय बोर्ड डिटेल प्रोग्रेस रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर रहा है। डीपीआर बनने के बाद शासन से धन की मांग की जाएगी। अभी केएमवीएन से लीज पर ली गई रोजिन फैक्ट्री वाली जमीन पर चल रही चाय फैक्ट्री को नए स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा।
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जून 2013 में चाय फैक्ट्री लगने के बाद से चाय की खेती बढ़ी है। इस दौरान चाय का रकबा 33 हेक्टेयर से बढ़कर 198 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। रोजगार भी बढ़ा है। चाय की खेती से 482 लोगों को रोजगार मिल रहा है। इनमें 94 प्रतिशत कामगार महिलाएं हैं।
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उत्तराखंड टी बोर्ड की चंपावत यूनिट के प्रभारी डेसमेंड बर्कबेक ने बताया कि कफलांग की चाय फैक्ट्री के लिए 13.7 नाली जमीन का आवंटन हुआ है। यहां बनने वाली फैक्ट्री की प्रोसेसिंग क्षमता 25 हजार किग्रा होगी। बजट मिलने पर एक वर्ष के भीतर फैक्ट्री का निर्माण हो जाएगा।
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वहीं निष्प्रयोज्य रोजिन फैक्ट्री के पास स्थापित टी फैक्ट्री में चाय की प्रोसेसिंग की जा रही है। फैक्ट्री के मोहन सिंह भंडारी ने बताया कि फैक्ट्री में सबसे पहले विदरिंग ट्रफ मेें चाय की हरी पत्तियों को पंखे के जरिए सूखाया जाता है। फिर रोलिंग मशीन से इसकी मढ़ाई होती है। ड्रायर मशीन से इसे हीट देकर सुखाया जाता है। सोर्टिंग मशीन में छानने के बाद ग्रेडिंग की जाती है। इस साल करीब आठ हजार किग्रा चाय प्रोसेस की जा चुकी है।
आमतौर पर बाजार में बिकने वाली चायों में बहुतायत में रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल होता है। जैविक होने के साथ ही उम्दा महक और अनूठे स्वाद के लिए यहां की चाय मशहूर है। यहां उत्पादित चाय में किसी भी तरह के केमिकल, टेनिन, कलर (सीटीसी) का प्रयोग नहीं किया जाता है।
ताजगी देने वाली जैविक चाय सेहतमंद भी है। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट होता है, जो शारीरिक क्षमता की गिरावट की गति को भी कम करता है। यहां की चाय उत्तराखंड टी बोर्ड के जरिए 2014 से कोलकाता में होने वाली नीलामी में भी भेजी जा रही है। करीब छह हजार किग्रा चाय नीलामी बाजार में जा चुकी है।
उत्तराखंड की चाय के स्वाद को अन्य क्षेत्रों में भी पहुंचाने के लिए महोत्सव में भी हिस्सा लिया जा रहा है। दिल्ली में पिछले सप्ताह आयोजित उत्तराखंड एप्पल महोत्सव में यहां की चाय का स्टॉल भी लगा। इस स्टॉल के माध्यम से लोगों को चंपावत और उत्तराखंड के दूसरे क्षेत्रों की चाय की खूबियां बताई गईं। दो दिन तक लगे इस स्टॉल में करीब 9 हजार रुपये की चाय की ब्रिकी हुई।