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भूगर्भीय जल स्तर को घटा रहे हैं मोटर चालित कुएं

Wed, 04 Apr 2018 10:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत।
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत। Updated Wed, 04 Apr 2018 10:49 PM IST
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Ground water levels are reduced by motorized wells
चंपावत में भूमिगत जल स्तर गिराने का कारण बन रहे हैं मोटर चालित कुएं। - फोटो : Bank employees start three-day strike

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चंपावत।
जिले में समय से पर्याप्त बरसात नहीं होने और गर्मी का प्रभाव बढ़ने के कारण हर साल गर्मियों के मौसम में पानी का संकट पैदा हो रहा है। पेयजल स्रोतों के जल स्तर में गिरावट आने के साथ ही भूगर्भीय जल स्तर भी लगातार कम हो रहा है। भूगर्भीय जल स्तर को घटाने में मोटर चालित कुएं प्रमुख कारण बनते जा रहे हैं। आलम ये है कि नगरीय इलाकों में औसतन हर दूसरे घर में भूगर्भीय पानी का प्रयोग किया जा रहा है।

भूगर्भीय जल के प्रयोग के लिए किसी प्रकार के कायदे कानून न होने के कारण इसका मनमाना प्रयोग किया जा रहा है। हालात यह है कि चंपावत क्षेत्र में जहां कुछ वर्षोेें पूर्व तक 10 से 15 फिट में की खुदाई में पानी निकल आता था, वहीं अब 30 फिट की गहराई में भी पानी नहीं मिल रहा है। कमोवेश यही हाल लोहाघाट नगर के भी हैं। जहां वर्तमान में 40 फिट की खुदाई के बाद ही भूमिगत जल बाहर निकल रहा है।
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पर्यावरणविद विवेकानंद जोशी बताते हैं कि एक दशक पूर्व तक जिले में पानी की समस्या गंभीर नहीं थी। वर्तमान में जंगलों का अत्यधिक दोहन होने से धरती में पानी की कमी हो रही है। पहले प्राकृतिक जल स्रोतों के आस पास पेड़ लगाना अनिवार्य होता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार के अनुसार बीते एक दशक में पेयजल योजनाओं के स्रोतों में 40 से 50 फीसदी पानी की कमी हो गई है। जल स्तर घटने का सिलसिला प्रतिवर्ष बढ़ता जा रहा है।
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नौलों का संरक्षण न होने से भी बढ़ी दिक्कतें
चंपावत। जिले के पर्वतीय भूभाग में पेयजल संकट गहराने के पीछे प्राकृतिक नौलों का संरक्षण न होना भी प्रमुख कारण बनता जा रहा है। पूर्व में गर्मियों के मौसम में पहाड़ के नौले पानी से लबालब भरे होते थे। लेकिन इन नौलों के संरक्षण की कोई कार्ययोजना नहीं बनाए जाने प्राकृतिक जलाशय लगातार सूखते जा रहे हैं। कुछ स्थानों में जो नौले बचे भी हैं तो उनमें एक बाल्टी पानी भरने में भी लोगों को मशक्कत करनी पड़ती है।
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