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खर्ककार्की की टूटी गूल वर्षों से नहीं बनी

Sat, 04 Feb 2017 10:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत Updated Sat, 04 Feb 2017 10:01 PM IST
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Goole years was not broken Krkkarki
खर्ककार्की की टूटी गूल वर्षों से नहीं बनी - फोटो : अमर उजाला
जिला मुख्यालय से बमुश्किल तीन किलोमीटर दूर के खर्ककार्की गांव के हाल पांच साल में खास नहीं बदले। वर्षों से लटकी समस्याएं आज भी समाधान की बाट जोह रही है। ग्रामीण कहते हैं बीते तीन बार के चुनाव के बाद भी कुछ खास नहीं हुआ।
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खर्ककार्की गांव में उत्तर प्रदेश के दौर तक धान और गेहूं की पैदावार होती थी। जो अब नदारद है। गांव के लोग कहते हैं कि पेयजल की कमी अब उनकी दिनचर्या में शामिल हो गया है। जंगली और लावारिस जानवरों का आतंक किसानों के लिए नई चुनौती बनी है।
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टूटी गूल की मरम्मत नहीं होने से सिंचाई की सुविधा कमी किसानों की कमर तोड़ रही है। ये तमाम समस्याएं आज भी वैसी ही हैं, जैसे दस साल पहले थी। विधानसभा में पहुंचने के बाद भी नेता गांव का रुख कम करते हैं। इस बार के विधानसभा चुनाव में भी गांव के लोग इन मुद्दों के आसरे राजनीतिक दलों का इम्तिहान लेंगे।
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लघु सिंचाई विभाग के इंजीनियर अनिल सिंह का कहना है कि आचार संहिता हटने के बाद प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत गूल की मरम्मत का प्रस्ताव रखा जाएगा।


 
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