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सम्मान को तरसे स्वंतत्रता संग्राम सेनानी
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्णानंद जोशी। (फाइल फोटो)
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर के नामी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित पूर्णानंद जोशी ने जंग-ए-आजादी में उत्साह से हिस्सा लिया था, लेकिन आजादी के 73 साल बाद भी इस सेनानी को सम्मान नहीं मिल सका है। टनकपुर औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) का नामकरण सेनानी के नाम पर करने की औपचारिकता के सवा दो साल बाद भी पूरी नहीं की जा सकी है, जबकि इस पर किसी तरह का वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ना है। प्रदेश सरकार ने 2015 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर स्कूल, अस्पताल आदि के नाम रखने का आदेश जारी किया था। शासन ने मई 2018 को तकनीकी शिक्षा विभाग को सेनानी के नामकरण पर टनकपुर आईटीआई रखने के लिए कार्यवाही के निर्देश दिए थे। इस पर टनकपुर आईटीआई से औचित्यपूर्ण प्रस्ताव भेजा गया। अक्तूबर 2018 में विधायक कैलाश गहतोड़ी ने भी संबंधित पत्र भेजा। सेनानी के बेटे हरीश, मुरली मनोहर, शंकर दत्त, मोहन, गणेश जोशी मगर इन तमाम कागजी कार्यवाही के बावजूद आईटीआई का नाम पंडित पूर्णानंद जोशी के नाम पर नहीं रखा जा सका है।
एकमात्र सूखीढांग जीआईसी का हुआ सेनानी के नाम पर नामकरण
चंपावत। जिले में 32 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, लेकिन इस जीओ के मुताबिक सिर्फ एक सेनानी के नाम पर ही कॉलेज का नामकरण हो सका। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के जिलाध्यक्ष महेश चंद्र चौड़ाकोटी ने आरोप लगाया कि शासन के स्तर पर सेनानियों को न तो सम्मान मिल रहा है और न ही जीओ का पालन हो रहा है। इसके तहत जिले में एकमात्र शिक्षण संस्थान का नाम सेनानी के नाम पर रखा गया। सूखीढांग जीआईसी का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित रामचंद्र चौड़ाकोटी के नाम पर रखा गया। बेहद सामान्य किसान परिवार में जन्मे पूर्णानंद जोशी ने स्वाधीनता आंदोलन में अंग्रेजों के खिलाफ खूब संघर्ष किया। इसकी उन्हें भरपूर कीमत भी चुकानी पड़ी। शारीरिक यातनाओं समेत उन्हें जेल भी जाना पड़ा। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन पर अर्थदंड भी लगाया गया।
टनकपुर आईटीआई का नाम सेनानी पूर्णानंद जोशी के नाम पर रखने के लिए आईटीआई ने प्रस्ताव भेजा था। कार्यवाही न होने की दशा में इस मामले में फिर से अनुस्मारक भेजने को आईटीआई से कहा जाएगा। मंजूरी मिलते ही संस्थान का नाम सेनानी के नाम पर कर दिया जाएगा।
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- सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।
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एकमात्र सूखीढांग जीआईसी का हुआ सेनानी के नाम पर नामकरण
चंपावत। जिले में 32 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, लेकिन इस जीओ के मुताबिक सिर्फ एक सेनानी के नाम पर ही कॉलेज का नामकरण हो सका। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के जिलाध्यक्ष महेश चंद्र चौड़ाकोटी ने आरोप लगाया कि शासन के स्तर पर सेनानियों को न तो सम्मान मिल रहा है और न ही जीओ का पालन हो रहा है। इसके तहत जिले में एकमात्र शिक्षण संस्थान का नाम सेनानी के नाम पर रखा गया। सूखीढांग जीआईसी का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित रामचंद्र चौड़ाकोटी के नाम पर रखा गया। बेहद सामान्य किसान परिवार में जन्मे पूर्णानंद जोशी ने स्वाधीनता आंदोलन में अंग्रेजों के खिलाफ खूब संघर्ष किया। इसकी उन्हें भरपूर कीमत भी चुकानी पड़ी। शारीरिक यातनाओं समेत उन्हें जेल भी जाना पड़ा। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन पर अर्थदंड भी लगाया गया।
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टनकपुर आईटीआई का नाम सेनानी पूर्णानंद जोशी के नाम पर रखने के लिए आईटीआई ने प्रस्ताव भेजा था। कार्यवाही न होने की दशा में इस मामले में फिर से अनुस्मारक भेजने को आईटीआई से कहा जाएगा। मंजूरी मिलते ही संस्थान का नाम सेनानी के नाम पर कर दिया जाएगा।
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- सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।