{"_id":"6004736a8ebc3e2f853c5d10","slug":"fort-of-vanasur-in-champawat-champawat-news-hld4115306127","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाणासुर किला अब दूर नहीं, आसान हुई सैलानियों की पहुंच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाणासुर किला अब दूर नहीं, आसान हुई सैलानियों की पहुंच
विज्ञापन
कर्णकरायत के बाणासुर के किले का ऊपरी हिस्सा।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। एतिहासिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध और खूबसूरती से भरपूर बाणासुर का किला जल्द ही चंपावत जिले के प्रमुख पर्यटन केंद्र में शुमार होगा। समुद्र तल से 1859 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस किले से हिम दर्शन भी होते हैं। सैलानियों को आकर्षित करने के लिए पर्यटन विभाग ने इसके सौंदर्यीकरण के साथ यहां तक जाने के लिए सीसी मार्ग बनाया है और यहां सुविधाओं का विस्तार भी किया है।
नगर से 21 किमी दूर कर्णकरायत की चोटी पर 90 मीटर लंबा और 25 मीटर चौड़ा बाणासुर का किला है। ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध का अपहरण करने पर श्रीकृष्ण ने इसी जगह पर बाणासुर का मान-मर्दन किया था। इस किले के एतिहासिक महत्व को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के माध्यम से इसे संरक्षित किया गया है। ऊंचाई और खास भौगोलिक स्थिति के चलते इस किले से चारों दिशाओं का नजारा साफ दिखाई देता है।
अभी तक यहां मार्ग कच्चा था। गेट से करीब सवा किमी कच्चे रास्ते पर लोगों को चलना पड़ता था। खतरनाक स्थानों पर रेलिंग न होने से दुर्घटना का खतरा भी रहता था। अब पर्यटन विभाग ने यहां सौंदर्यीकरण कराया है। कार्यदायी संस्था एडीबी अल्मोड़ा के निर्माण खंड के अभियंता डीसी पांडेय का कहना है कि 58 लाख रुपये से यहां सीसी मार्ग, रेलिंग और व्यू प्वाइंट बनाने का काम पूरा कराया जा चुका है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और स्थानीय उत्पादों को भी बढ़ावा मिल सकेगा।
विज्ञापन
सवा किमी पैदल चढ़ाई लांघ किले तक पहुंचना
बाणासुर का किला हल्द्वानी-लोहाघाट मार्ग पर चंपावत से 21 और लोहाघाट से आठ किमी दूरी पर है। वहां पहुंचने के लिए सड़क से सवा किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। चोटी पर होने से इस चढ़ाई को लांघ कर पहुंचने में अमूमन 25 से 30 मिनट का समय लगता है। किले के व्यू प्वाइंट से अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिले के कई हिस्सों के विहंगम दृश्यों समेत मायावती का अद्वैत आश्रम भी नजर आता है।
कौन था बाणासुर
बाणासुर राजा बलि के सौ पुत्रों में से एक था। वह भगवान शिव का अनन्य उपासक था। घोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने बाणासुर को चार वरदान दिए थे, लेकिन अपनी बुराइयों की वजह से राक्षस के रूप में जाना जाता है। पत्थरों से निर्मित बाणासुर का किला बाणासुर की ताकत दर्शाता था, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध के अपहरण पर श्रीकृष्ण ने बाणासुर का संहार किया।
बाणासुर के किले के सौंदर्यीकरण का काम पूरा हो चुका है। कार्यदायी संस्था के साथ संयुक्त निरीक्षण कर लिया गया है। सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के विस्तार से सैलानियों की संख्या बढ़ेगी। संचालन का जिम्मा ग्राम पंचायत को सौंपा जाएगा।
- लता बिष्ट, जिला पर्यटन विकास अधिकारी, चंपावत।
विज्ञापन
नगर से 21 किमी दूर कर्णकरायत की चोटी पर 90 मीटर लंबा और 25 मीटर चौड़ा बाणासुर का किला है। ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध का अपहरण करने पर श्रीकृष्ण ने इसी जगह पर बाणासुर का मान-मर्दन किया था। इस किले के एतिहासिक महत्व को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के माध्यम से इसे संरक्षित किया गया है। ऊंचाई और खास भौगोलिक स्थिति के चलते इस किले से चारों दिशाओं का नजारा साफ दिखाई देता है।
विज्ञापन
अभी तक यहां मार्ग कच्चा था। गेट से करीब सवा किमी कच्चे रास्ते पर लोगों को चलना पड़ता था। खतरनाक स्थानों पर रेलिंग न होने से दुर्घटना का खतरा भी रहता था। अब पर्यटन विभाग ने यहां सौंदर्यीकरण कराया है। कार्यदायी संस्था एडीबी अल्मोड़ा के निर्माण खंड के अभियंता डीसी पांडेय का कहना है कि 58 लाख रुपये से यहां सीसी मार्ग, रेलिंग और व्यू प्वाइंट बनाने का काम पूरा कराया जा चुका है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और स्थानीय उत्पादों को भी बढ़ावा मिल सकेगा।
विज्ञापन
सवा किमी पैदल चढ़ाई लांघ किले तक पहुंचना
बाणासुर का किला हल्द्वानी-लोहाघाट मार्ग पर चंपावत से 21 और लोहाघाट से आठ किमी दूरी पर है। वहां पहुंचने के लिए सड़क से सवा किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। चोटी पर होने से इस चढ़ाई को लांघ कर पहुंचने में अमूमन 25 से 30 मिनट का समय लगता है। किले के व्यू प्वाइंट से अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिले के कई हिस्सों के विहंगम दृश्यों समेत मायावती का अद्वैत आश्रम भी नजर आता है।
कौन था बाणासुर
बाणासुर राजा बलि के सौ पुत्रों में से एक था। वह भगवान शिव का अनन्य उपासक था। घोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने बाणासुर को चार वरदान दिए थे, लेकिन अपनी बुराइयों की वजह से राक्षस के रूप में जाना जाता है। पत्थरों से निर्मित बाणासुर का किला बाणासुर की ताकत दर्शाता था, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध के अपहरण पर श्रीकृष्ण ने बाणासुर का संहार किया।
बाणासुर के किले के सौंदर्यीकरण का काम पूरा हो चुका है। कार्यदायी संस्था के साथ संयुक्त निरीक्षण कर लिया गया है। सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के विस्तार से सैलानियों की संख्या बढ़ेगी। संचालन का जिम्मा ग्राम पंचायत को सौंपा जाएगा।
- लता बिष्ट, जिला पर्यटन विकास अधिकारी, चंपावत।

कर्णकरायत के बाणासुर किले का नजारा।- फोटो : CHAMPAWAT

चंपावत जिले के कर्णकरायत में स्थित बाणासुर के किले का प्रवेशद्वार।- फोटो : CHAMPAWAT