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अग्निकाल खत्म, आग की 80 घटनाओं में 52 हेक्टेयर जंगल प्रभावित
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चंपावत। फायर सीजन 15 फरवरी से शुरू हुआ था। इसकी अवधि औपचारिक रूप से 15 जून को खत्म हो गई लेकिन भीषण और गर्मी की तपिश अब भी बनी हुई है। पहाड़ में ही बुधवार को 29 डिग्री सेल्सियस तापमान था। इस साल पिछले तीन वर्षों की अपेक्षा गर्मी ज्यादा रही, लेकिन पिछले साल की तुलना में जंगल की आग कम रही। रिकॉर्ड तपिश के बावजूद वन विभाग जंगल के नुकसान को कम करने में कामयाब रहा। इस बार पिछले साल की अपेक्षा साढ़े पांच हेक्टेयर वन संपदा को कम नुकसान हुआ है।
चंपावत क्षेत्र में 62098.32 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र, 36780.563 हेक्टेयर पंचायती वन, 22815.7 हेक्टेयर सिविल वन हैं। डीएफओ आरसी कांडपाल का कहना है कि आरक्षित वन क्षेत्र की 80 घटनाओं में 52.25 हेक्टेयर वन संपदा प्रभावित हुई। इसमें 43.15 आरक्षित और 9.10 सिविल, पंचायती वन शामिल है। आग से प्रभावित हुई वन संपदा की कीमत 1.34 लाख रुपये आंकी गई है। डीएफओ का कहना है कि तपिश बढ़ने और कुछ जगह अराजक तत्वों ने भी आग लगाई। इसके बावजूद इस बार क्रू स्टेशनों के बेहतर प्रबंधन और फायर वाचर की संख्या बढ़ाने से हालात में सुधार हुआ है।
उत्तराखंड बनने के बाद जंगलों को सबसे कम नुकसान का रिकॉर्ड 2020 में बना था, लेकिन ये नुकसान कोरोना में लॉकडाउन की वजह से रहा था। तब आरक्षित और पंचायती वन में आग की सिर्फ आठ घटनाएं हुईं थी, जिसमें साढ़े सात हेक्टेयर जंगल को नुकसान हुआ था लेकिन इस बार वर्ष 2021 की अग्नि काल की अपेक्षा जंगल की आग पर काबू पाने में ज्यादा सफलता मिली है।
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जंगल में आग की घटनाएं
वर्ष घटनाएं प्रभावित क्षेत्र (हेक्टेयर में)
2018 84 133.46
2019 111 161.39
2020 08 07.50
2021 73 57.77
2022 80 52.25
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चंपावत क्षेत्र में 62098.32 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र, 36780.563 हेक्टेयर पंचायती वन, 22815.7 हेक्टेयर सिविल वन हैं। डीएफओ आरसी कांडपाल का कहना है कि आरक्षित वन क्षेत्र की 80 घटनाओं में 52.25 हेक्टेयर वन संपदा प्रभावित हुई। इसमें 43.15 आरक्षित और 9.10 सिविल, पंचायती वन शामिल है। आग से प्रभावित हुई वन संपदा की कीमत 1.34 लाख रुपये आंकी गई है। डीएफओ का कहना है कि तपिश बढ़ने और कुछ जगह अराजक तत्वों ने भी आग लगाई। इसके बावजूद इस बार क्रू स्टेशनों के बेहतर प्रबंधन और फायर वाचर की संख्या बढ़ाने से हालात में सुधार हुआ है।
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उत्तराखंड बनने के बाद जंगलों को सबसे कम नुकसान का रिकॉर्ड 2020 में बना था, लेकिन ये नुकसान कोरोना में लॉकडाउन की वजह से रहा था। तब आरक्षित और पंचायती वन में आग की सिर्फ आठ घटनाएं हुईं थी, जिसमें साढ़े सात हेक्टेयर जंगल को नुकसान हुआ था लेकिन इस बार वर्ष 2021 की अग्नि काल की अपेक्षा जंगल की आग पर काबू पाने में ज्यादा सफलता मिली है।
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जंगल में आग की घटनाएं
वर्ष घटनाएं प्रभावित क्षेत्र (हेक्टेयर में)
2018 84 133.46
2019 111 161.39
2020 08 07.50
2021 73 57.77
2022 80 52.25