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जंगल की आग पर भारी न पड़ जाए कम बारिश
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 14 Feb 2016 10:33 PM IST
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सोमवार से जंगलों का फायर सीजन शुरू हो जाएगा। इस बार जाड़ों में कम बारिश के चलते पड़े जबर्दस्त सूखे की मार खेतों से आगे बढ़ जंगलों तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। पुराने आंकड़े भी इसकी तस्दीक कर रहे हैं और वैसे भी अक्तूबर 2015 से अब तक मात्र 10 मिलीमीटर बारिश हुई है। विभाग भी आग के खतरों के बढ़ने की आशंका जता रहा है।
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जिले में 80549.1 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र के अलावा 34375.95 हेक्टेयर पंचायती वन और 22815.7 हेक्टेयर सिविल वन हैं। पिछले साल भरपूर बारिश के चलते साल 2015 में आग से कम नुकसान हुआ। 13 घटनाओं में सिर्फ 18 हेक्टेयर जंगल का नुकसान हुआ। सरपंच दीपक बोहरा सहित पर्यावरण के कई जानकारों का कहना है कि इस बार जाड़ों में बारिश नहीं होने से सूखापन और तपिश में जबर्दस्त इजाफा होगा और इसकी मार जंगलों पर पड़ सकती है। ऐसे में 15 फरवरी से 15 जून तक फायर सीजन अवधि में जंगलों की सुरक्षा के लिए खास बंदोबस्त की जरूरत होती है, मगर अब तक जिला अग्नि सुरक्षा समिति की बैठक नहीं हुई है। विभाग जल्द ही इस बैठक को कराने की बात कह रहा है।
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संवेदनशील हैं तीन वन क्षेत्र
चंपावत जिले में छह में से तीन रेंज दावाग्नि के नजरिए से संवेदनशीलता के दायरे में है। संवेदनशील वन क्षेत्र बूम, देवीधुरा एवं भिंगराड़ा रेंज के हैं। पहाड़ी इलाकों के वन में चीड़ एवं मैदानी हिस्से में बूम में साल के पेड़ और वन्य जंतु आग के नजरिए से संवेदनशील है। देवीधुरा रेंज के संवेदनशील वन क्षेत्र में 8 जून 2014 को आग बुझाने के दौरान एक श्रमिक दीपक कुमार की मौत भी हो चुकी है।
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फायर सीजन से पहले ही उठ रही लपटें
जंगल का फायर सीजन तो सोमवार से शुरू हो रहा है, मगर इसके आगाज से पहले ही जंगलों पर आग के खतरे शुरू हो चुके हैं। दिसंबर 2015 में क्रांतेश्वर, जनवरी, फरवरी में मानेश्वर तथा गर्सलेख में 10 हेक्टेयर से अधिक जंगल आग की भेंट चढ़ चुके हैं।
जंगलों को आग से बचाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। दावा किया कि विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। हर सेक्सन में क्रू स्टेशन स्थापित किया गया है। कंट्रोल बर्निंग भी की जा चुकी है। वॉच टावर और अस्थायी टावर बनाए गए हैं। इसके अलावा गांवों में आग से बचाव के लिए बैठकें की जा चुकी है। -एके गुप्ता, प्रभागीय वनाधिकारी, चंपावत।
छह वर्षों में दावाग्नि की घटनाएं
वर्ष घटनाएं प्रभावित क्षेत्र (हेक्टेयर में) क्षति (रुपये में)
2010 17 47 17625
2011 05 06 2000
2012 25 56 20293
2013 01 02 1000
2014 15 40 71000
2015 13 18 1800