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हिंदी दिवस के लिए:हिंदी के जरिए सामाजिक अभियान को धार दे रहे शूल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 13 Sep 2020 11:33 PM IST
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For Hindi Divas: Shul is giving edge to social campaign through Hindi
जनकवि प्रकाश जोशी शूल। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। जन कवि प्रकाश जोशी शूल के लिए हिंदी सिर्फ भाषा नहीं है, बल्कि समाज को सुधारने का बड़ा हथियार है। हिंदी माध्यम से सरल तरीके से वे 2011 से लोगों को सामाजिक मुद्दों के लिए जागरूक कर रहे हैं। नशाखोरी के खिलाफ बिगुल बजाते हुए उन्होंने बाकायदा जनि पिया शराब की रचना की। इसी तरह भ्रूण हत्या पर लगाम लगाने को मनैकि तीस काव्य संग्रह लिखा।
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चंपावत के जन कवि शूल शराब और नशाखोरी पर लगाम लगाने को लोगों को सामाजिक अभियान के साथ अपनी रचनाधर्मि
ता से युवा और विद्यार्थी समाज को झकझोर रहे हैं। जनपियो शराब में लिखते हैं-जन खाया अत्तर-गांजो, जन पिया शराब। बिड़ि-सिकरट-सुर्ति दाज्यू, भौते छन खराब।
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यानि अत्तर, गांजा, शराब, बीड़ी, सिगरेट और सुर्ती की नुकसानदायक बताते हुए इसे नहीं पीने को प्रेरित किया गया है। कहते हैं कि हिंदी भाषा के साथ कुमाऊंनी बोली को जोड़ने से समाज की बुराइयों को दूर करने की आवाज अधिक सशक्त तरीके से नगरों के साथ ही गांव-देहात तक पहुंच रही है। इस काम में शिक्षा विभाग से लेकर समाज के बड़े वर्ग का सहयोग भी मिल रहा है।
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प्रकाशित की ये पुस्तकें:
मेरे देश की माटी चंदन, मनैकि तीस, जन पिया शराब, ठेकुवा, म्यारा पहाड़कि चेलि व शूल पथ।
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