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रेलवे की तकनीकी सुरक्षा पर भी खड़े हो रहे सवाल
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टनकपुर रेलवे स्टेशन में इस तरह चैन से बांधकर खड़ी की जाती है ट्रेन की रैक।
- फोटो : TANAKPUR
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टनकपुर (चंपावत)। पूर्णागिरि जन शताब्दी एक्सप्रेस टनकपुर से रोलडाउन (उल्टी दिशा) में क्यों दौड़ी इसका पता तो जांच कमेटी की रिपोर्ट से ही चलेगा। प्रारंभिक जांच में लोको पायलट और गार्ड को दोषी मानते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
इन सबके बीच रेल लाइन की तकनीकी सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल टनकपुर से बनबसा तक रेल लाइन में काफी ढलान है, लेकिन तकनीकी दस्तावेज में इस ढलान का जिक्र तक नहीं है।
बुधवार शाम चार बजे दिल्ली से टनकपुर आ रही पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस स्टेशन से पहले ही होम सिग्नल के पास एक गोवंश से टकराकर कुछ पल बाद ही उल्टी दिशा में दौड़ पड़ी थी।
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मशक्कत के बाद ट्रेन को 24 किलोमीटर दूर खटीमा से पहले किसी तरह रोकने में सफलता मिल पाई थी। ट्रेन अगर पटरी से उतर जाती तो जान-माल का भी नुकसान हो सकता था। पर गनीमत रही कि रेलवे की सजगता से हादसा टल गया।
घटना के कारणों का पता लगाने को जेए ग्रेड के तीन अधिकारियों की जांच कमेटी गठित की गई है। रेलवे सूत्रों की माने तो टनकपुर स्टेशन से होम सिग्नल तक लाइन में 1000 फीट पर एक फीट ढलान है, जबकि होम सिग्नल से आगे ढलान का यह ग्राफ और ज्यादा है, मगर सोचने वाली बात यह है कि लाइन में ढलान होने के बाद भी रेलवे के तकनीकी दस्तावेज में इस ढलान का जिक्र नहीं है। अगर ढलान का जिक्र होता तो रेलवे के अधिकारी इस दिशा में काम जरूर करते।
जंजीर से बांधकर खड़ी की जाती है ट्रेनें
रेलवे के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि लाइन में ढलान होने पर उसी के अनुरूप सतर्कता और सुरक्षा के उपाय किए जाते हैं। ढलान होने से ही टनकपुर स्टेशन में ट्रेनों के पहुंचने के बाद यार्ड में खड़े रैक और बंद इंजनों को लोहे की जंजीरों से बांधकर रखा जाता है।
निर्धारित समय पर टनकपुर से दिल्ली रवाना हुई जनशताब्दी
टनकपुर से उल्टी दौड़ी जनशताब्दी एक्सप्रेस बृहस्पतिवार को अपने निर्धारित समय पूर्वाह्न 11:15 बजे टनकपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुई। ट्रेन को नए लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड लेकर रवाना हुए हैं।
बताया गया कि बुधवार शाम हादसे के बाद खटीमा के पास क्रॉसिंग गेट संख्या 35 सी के पास ट्रेन के रुकने पर पीलीभीत से राहत इंजन मंगाकर ट्रेन को रवाना किया गया। ट्रेन रात करीब साढ़े नौ बजे टनकपुर पहुंची, जबकि खराब इंजन को खटीमा स्टेशन में खड़ा किया गया था।
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इन सबके बीच रेल लाइन की तकनीकी सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल टनकपुर से बनबसा तक रेल लाइन में काफी ढलान है, लेकिन तकनीकी दस्तावेज में इस ढलान का जिक्र तक नहीं है।
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बुधवार शाम चार बजे दिल्ली से टनकपुर आ रही पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस स्टेशन से पहले ही होम सिग्नल के पास एक गोवंश से टकराकर कुछ पल बाद ही उल्टी दिशा में दौड़ पड़ी थी।
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मशक्कत के बाद ट्रेन को 24 किलोमीटर दूर खटीमा से पहले किसी तरह रोकने में सफलता मिल पाई थी। ट्रेन अगर पटरी से उतर जाती तो जान-माल का भी नुकसान हो सकता था। पर गनीमत रही कि रेलवे की सजगता से हादसा टल गया।
घटना के कारणों का पता लगाने को जेए ग्रेड के तीन अधिकारियों की जांच कमेटी गठित की गई है। रेलवे सूत्रों की माने तो टनकपुर स्टेशन से होम सिग्नल तक लाइन में 1000 फीट पर एक फीट ढलान है, जबकि होम सिग्नल से आगे ढलान का यह ग्राफ और ज्यादा है, मगर सोचने वाली बात यह है कि लाइन में ढलान होने के बाद भी रेलवे के तकनीकी दस्तावेज में इस ढलान का जिक्र नहीं है। अगर ढलान का जिक्र होता तो रेलवे के अधिकारी इस दिशा में काम जरूर करते।
जंजीर से बांधकर खड़ी की जाती है ट्रेनें
रेलवे के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि लाइन में ढलान होने पर उसी के अनुरूप सतर्कता और सुरक्षा के उपाय किए जाते हैं। ढलान होने से ही टनकपुर स्टेशन में ट्रेनों के पहुंचने के बाद यार्ड में खड़े रैक और बंद इंजनों को लोहे की जंजीरों से बांधकर रखा जाता है।
निर्धारित समय पर टनकपुर से दिल्ली रवाना हुई जनशताब्दी
टनकपुर से उल्टी दौड़ी जनशताब्दी एक्सप्रेस बृहस्पतिवार को अपने निर्धारित समय पूर्वाह्न 11:15 बजे टनकपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुई। ट्रेन को नए लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड लेकर रवाना हुए हैं।
बताया गया कि बुधवार शाम हादसे के बाद खटीमा के पास क्रॉसिंग गेट संख्या 35 सी के पास ट्रेन के रुकने पर पीलीभीत से राहत इंजन मंगाकर ट्रेन को रवाना किया गया। ट्रेन रात करीब साढ़े नौ बजे टनकपुर पहुंची, जबकि खराब इंजन को खटीमा स्टेशन में खड़ा किया गया था।