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फूलों की खेती से महका गांव, थमा पलायन
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Mon, 27 Jun 2016 11:39 PM IST
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चंपावत में फूलों की खेती
- फोटो : अमर उजाला
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लोहाघाट (चंपावत)। अमूमन लोग खेत और खेती से दूरी बना रहे हैं। गांवों में कृषि को छोड़ शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं, लेकिन पाटी के रौलमेल ग्राम पंचायत के कोटा गांव में फूलों की खेती ने गांवों को खिलाने और पलायन से बचाने का जरिया बनी है। इस गांव के काफी लोग फूलों की खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं।
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दस साल पहले पाटी ब्लॉक के रौलामेल ग्राम पंचायत के कोटा गांव के पूर्णानंद भट्ट ने फूलों की खेती शुरू की थी। उनकी कामयाबी से प्रेरित होकर अब यहां 13 लोग फूल उगाने लगे हैं। यहां की जलवायु को देखते हुए किसान ग्लाइडर, मल्टीकलर, कारनेशन, गुलाब, गैंदा, गुलदावरी, लिलियम सहित दस प्रजाति के फूलों की खेती कर रहे हैं।
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इससे औसतन एक किसान को एक लाख से डेढ़ लाख रुपये की आय हो रही है। मगर नजदीक में फूलों की मंडी न होना किसानों के लिए सिरदर्द बन रहा है। इसके चलते किसानों को इसे बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। नजदीक में मंडी न होने के कारण किसान अपने फूलों को दिल्ली की मंडी में भेजने के लिए विवश होना पड़ता है। वहां पहुंचने तक काफी फूल खराब हो जाते हैं।
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स्थानीय स्तर पर फूलों की बिक्री की व्यवस्था न होने से किसानों का मुनाफा घट जाता है। इसकी वजह वातानुकूलित वाहन की व्यवस्था का नहीं होना है, जबकि इसका भरोसा कांग्रेस की पूर्व सरकार के उद्यान मंत्री द्वारा दिया गया था, जोकि पूरा नहीं हो सका।
फूलों की खेती के लिए राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त किसान पूर्णानंद भट्ट का कहना है कि अगर वातानुकूलित वाहन मिल जाए, तो किसान फूलों की बिक्री डिमांडेड मंडी में कर पाते। फूल भी देर तक सुरक्षित रहते और उनका मुनाफा भी बढ़ता।
प्रगतिशील किसान और राज्यपाल से फूलों की उत्कृष्ट खेती में दूसरा पुरस्कार विजेता मनोज भट्ट का कहना है कि वे फूलों के सीजन मे डेढ़ लाख रुपये तक का कारोबार करते हैं, लेकिन इस बार भारी बारिश, ओलावृष्टि की वजह से फसल बर्बाद हुई है। उनका कहना है कि मौसमी मार, आपदाओं से बचाव के लिए सरकार को किसानों के लिए योजना चलानी चाहिए।
जौलाड़ी गांव के किसान बहादुर सिंह मेहता ने बताया कि दूरी होने के कारण मंडी में पहुंचने तक फूल खराब होना आम हो गई है। जिसके कारण फूलों के भाव भी गिरने लगते हैं। इसका असर उनकी आय में पड़ता हैं।