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बनने के बाद कुछ सालों में डूब जाएंगे पांच स्कूलों के भवन

Fri, 24 Nov 2017 10:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। Updated Fri, 24 Nov 2017 10:33 PM IST
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Five school buildings will be submerged after some years
चंपावत के कोट अमोड़ी प्राथमिक स्कूल की उड़ी छत। - फोटो : अमर उजाला
 प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में चंपावत जिले के 26 गांव आ रहे हैं। इन गांवों के लोगों के विस्थापन और पुनर्वास को लेकर कवायद भी चल रही है। लेकिन शासन ने इस डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों में पांच स्कूलों में के क्षतिग्रस्त भवन के स्थान पर नए भवन स्वीकृत कर दिए हैं। इन स्कूलों के भवनों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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शिक्षा विभाग के मुताबिक 2016-17 में जिले के 16 राजकीय प्राथमिक विद्यालयों के भवन स्वीकृत हुए हैं। पुराने व जीर्णशीर्ण होने से इन भवनों के स्थान पर नए भवन बनाए जाने के प्रस्ताव भेजे गए थे। इन स्वीकृत भवनों में से पांच भवन अब पंचेश्वर डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। बरयूड़ी, पांचपीपल, चामा, जमरसौं व सिमलखेत के राजकीय प्राथमिक स्कूल भवन इस दायरे में आ रहे हैं। 2001 में बने चामा के भवन को छोड़ शेष चार स्कूल भवन करीब पांच दशक पुराने हैं। 
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विभाग का कहना है कि प्रत्येक भवन की निर्माण लागत 12.86 लाख रुपये हैं। इस राशि में से 50 प्रतिशत शासन अवमुक्त कर चुका है। अवमुक्त धनराशि में से कार्यदाई संस्था को प्रति विद्यालय 2.08 लाख रुपये दिए भी जा चुके हैं।
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कोट अमोड़ी स्कूल की छत के लिए धन नहीं
चंपावत विकासखंड के कोट अमोड़ी राजकीय प्राथमिक स्कूल के भवन की छत इस साल अप्रैल को क्षतिग्रस्त हो गई थी। 1952 में शुरू हुए इस स्कूल के भवन की खस्ताहालत के चलते यहां के 26 छात्र-छात्राओं को रामलीला मंच में पढ़ाया जा रहा है। मगर भवन की छत के लिए अभी तक एक भी रुपया नहीं मिला है। शिक्षा विभाग का कहना है कि अमोड़ी प्राथमिक स्कूल की चहारदीवारी के लिए 3.50 लाख रुपये स्वीकृत किए गए है। भवन की छत की मरम्मत के लिए एक भी रुपया नहीं मिला है। खंड शिक्षाधिकारी अंशुल बिष्ट ने इस मामले की जांच भी की। जांच के बाद चहारदीवारी मद में मिले धन को छत की मरम्मत के लिए खर्च नहीं करने का निर्णय लिया गया। वहीं अमोड़ी क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य उमाशंकर भट्ट का कहना है कि छत की मरम्मत के बजाय जीर्णशीर्ण भवन के स्थान पर नए भवन को बनाने की मांग की गई थी। मगर नया भवन तो दूर, छत की मरम्मत के लिए जरूरी 7.50 लाख रुपये तक नहीं मिल सका है।


डूब क्षेत्र की संभावना के चलते बैंक ने वित्त पोषण से इंकार किया
एक तरफ डूब क्षेत्र में स्कूलों के नए भवनों के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है, वहीं डूब क्षेत्र के उद्यमियों को कर्ज में अड़चन आ रही है। उत्तराखंड ग्रामीण पर्यटन उत्थान योजना के अंतर्गत पंचेश्वर क्षेत्र के चार नागरिकों ने होटल निर्माण के लिए पत्रावली तैयार की। पर्यटन विभाग के मुताबिक बैंकों ने डूब क्षेत्र की संभावना के मद्देनजर पंचेश्वर क्षेत्र की इन फाइलों को अस्वीकार कर दिया।


कोट
स्कूल भवनों के भविष्य में प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई थी। उच्चाधिकारियों द्वारा हरी झंडी मिलने के बाद इन भवनों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई है। वैसे भी बांध निर्माण में अभी लंबा वक्त लगने की संभावना है।
सत्यनारायण, जिला शिक्षाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) चंपावत। 
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