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Champawat News: फायर सीजन से पहले ही धधकने लगे जंगल
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लोहाघाट के बलांई गांव में घास के लुट्टों में लगी आग को बुझाते दमकल कर्मी।
- फोटो : LOHAGHAT
लोहाघाट (चंपावत)। शहर से चार किमी दूर बलाई गांव के जंगल में लगी आग से एक खेत में घास के तीन लुट्टे जल गए। अग्निशमन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंच आग पर काबू पाया जबकि वन विभाग में वनाग्नि काल की शुरुआत 15 फरवरी से होती है लेकिन इससे 18 दिन पहले ही जंगल जलने लगे हैं।
बलाई गांव में अशोक कुमार कालाकोटी के खेत जंगल से सटे हैं। पास के जंगल में शनिवार शाम लगी आग एकाएक खेत तक पहुंच गई। इससे खेत के पास रखे घास के लुट्टे जल गए। पहले ग्रामीणों ने खुद आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन आग बढ़ने पर अग्निशमन टीम को सूचना दी गई। अग्निशमन विभाग के द्वितीय अधिकारी श्याम बहादुर थापा के निर्देशन में लीडिंग फायरमैन नीरज राणा, सुनील जोशी, चंचल माहरा, प्रमोद कुमार, पूरन गिरि आदि ने मौके पर पहुंच आग पर काबू पाया।
घास जलने से अशोक को मवेशियों के लिए चारे की कमी हो गई। उन्हें बीस हजार रुपये का नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने प्रभावित व्यक्ति को मुआवजा दिलाने की मांग की है। इससे पूर्व 23 जनवरी को चंपावत के धौन के पास के जंगल में भी आग लगी। लोहाघाट के रेंजर दीप चंद्र जोशी का कहना है कि जंगल में आग लगने की सूचना नहीं है। जंगल में लगने वाली आग रोकने के लिए वनकर्मियों को मुस्तैद किया जा रहा है।
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बारिश न होने से नमी में कमी से बढ़ा खतरा
चंपावत। वर्ष 2022 के वनाग्नि काल में जंगल में आग की 80 घटनाएं हुईं थीं। इनमें 52.25 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ था जबकि 2021 में 73 घटनाओं में 57.77 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा था। डीएफओ आरसी कांडपाल का कहना है कि जंगल में आग लगने का कारण पता नहीं चल सका लेकिन बारिश कम होने से जमीन में नमी कम है। इससे आग के खतरे बढ़ गए हैं।
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बलाई गांव में अशोक कुमार कालाकोटी के खेत जंगल से सटे हैं। पास के जंगल में शनिवार शाम लगी आग एकाएक खेत तक पहुंच गई। इससे खेत के पास रखे घास के लुट्टे जल गए। पहले ग्रामीणों ने खुद आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन आग बढ़ने पर अग्निशमन टीम को सूचना दी गई। अग्निशमन विभाग के द्वितीय अधिकारी श्याम बहादुर थापा के निर्देशन में लीडिंग फायरमैन नीरज राणा, सुनील जोशी, चंचल माहरा, प्रमोद कुमार, पूरन गिरि आदि ने मौके पर पहुंच आग पर काबू पाया।
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घास जलने से अशोक को मवेशियों के लिए चारे की कमी हो गई। उन्हें बीस हजार रुपये का नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने प्रभावित व्यक्ति को मुआवजा दिलाने की मांग की है। इससे पूर्व 23 जनवरी को चंपावत के धौन के पास के जंगल में भी आग लगी। लोहाघाट के रेंजर दीप चंद्र जोशी का कहना है कि जंगल में आग लगने की सूचना नहीं है। जंगल में लगने वाली आग रोकने के लिए वनकर्मियों को मुस्तैद किया जा रहा है।
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बारिश न होने से नमी में कमी से बढ़ा खतरा
चंपावत। वर्ष 2022 के वनाग्नि काल में जंगल में आग की 80 घटनाएं हुईं थीं। इनमें 52.25 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ था जबकि 2021 में 73 घटनाओं में 57.77 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा था। डीएफओ आरसी कांडपाल का कहना है कि जंगल में आग लगने का कारण पता नहीं चल सका लेकिन बारिश कम होने से जमीन में नमी कम है। इससे आग के खतरे बढ़ गए हैं।