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Champawat News: पुण्यतिथि पर याद किए गए सेनानी रामचंद्र चौड़ाकोटी
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स्वंतत्रता संग्राम सेनानी पंडित रामचंद्र चौड़ाकोटी। (फाइल फोटो)
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित रामचंद्र चौड़ाकोटी को पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी गई। चंपावत और सूखीढांग सेनानी स्मारक पर मंगलवार को हुए कार्यक्रम में लोगों ने आजादी की जंग में उनके योगदान का स्मरण किया गया। सूखीढांग क्षेत्र के चौड़ाकोटी स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत के लिए सिरदर्द बने रहे।
आजादी की लड़ाई के दस्तावेजों के मुताबिक भारत छोड़ो आंदोलन में अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाने वाले पंडित रामचंद्र को जुर्माने के साथ लंबी जेल काटनी पड़ी। सेनानी रामचंद्र ने आजादी की जंग ही नहीं, स्वतंत्रता के बाद इलाके के विकास के लिए भी जंग लड़ी।
उनके बेटे और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी कल्याण संगठन के जिलाध्यक्ष महेश चौड़ाकोटी बताते हैं कि वर्ष 1948 में साधन सहकारी समिति के सभापति, वमनजौल के सरपंच, ज्येष्ठ उप प्रमुख की जिम्मेदारी संभालने के अलावा 10 जनवरी 2001 को आखिरी सांस लेने से पहले तक वह इलाके की तरक्की के लिए लगे रहे।
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सेनानी के गांव में अब भी सड़क का इंतजार
चंपावत। सूखीढांग धूरा क्षेत्र का आमखर्क गांव स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित रामचंद्र चौड़ाकोटी और तीन (बेनीराम चौड़ाकोटी, पदमादत्त चौड़ाकोटी, बची सिंह राना) अन्य सेनानियों का क्षेत्र है लेकिन अब तक यहां सड़क नहीं है। इस कारण यह गांव विकास की मुख्य धारा से कटा है। सेनानी परिवारों का कहना है कि सड़क नहीं होने का खामियाजा यहां के 25 से ज्यादा परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।
आमखर्क तक पहुंचने के लिए ग्रामीण बृजनगर तक सवा किलोमीटर पैदल जाने के लिए मजबूर हैं। सेनानी उत्तराधिकारी कल्याण संगठन का कहना है कि प्रशासन से लेकर जन प्रतिनिधियों के समक्ष सड़क की मांग को उठाया जा चुका है लेकिन कुछ नहीं हुआ। सड़क नहीं होने से अस्पताल और आठवीं से आगे की पढ़ाई के लिए तीन किमी दूर जौल गांव की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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आजादी की लड़ाई के दस्तावेजों के मुताबिक भारत छोड़ो आंदोलन में अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाने वाले पंडित रामचंद्र को जुर्माने के साथ लंबी जेल काटनी पड़ी। सेनानी रामचंद्र ने आजादी की जंग ही नहीं, स्वतंत्रता के बाद इलाके के विकास के लिए भी जंग लड़ी।
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उनके बेटे और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी कल्याण संगठन के जिलाध्यक्ष महेश चौड़ाकोटी बताते हैं कि वर्ष 1948 में साधन सहकारी समिति के सभापति, वमनजौल के सरपंच, ज्येष्ठ उप प्रमुख की जिम्मेदारी संभालने के अलावा 10 जनवरी 2001 को आखिरी सांस लेने से पहले तक वह इलाके की तरक्की के लिए लगे रहे।
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सेनानी के गांव में अब भी सड़क का इंतजार
चंपावत। सूखीढांग धूरा क्षेत्र का आमखर्क गांव स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित रामचंद्र चौड़ाकोटी और तीन (बेनीराम चौड़ाकोटी, पदमादत्त चौड़ाकोटी, बची सिंह राना) अन्य सेनानियों का क्षेत्र है लेकिन अब तक यहां सड़क नहीं है। इस कारण यह गांव विकास की मुख्य धारा से कटा है। सेनानी परिवारों का कहना है कि सड़क नहीं होने का खामियाजा यहां के 25 से ज्यादा परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।
आमखर्क तक पहुंचने के लिए ग्रामीण बृजनगर तक सवा किलोमीटर पैदल जाने के लिए मजबूर हैं। सेनानी उत्तराधिकारी कल्याण संगठन का कहना है कि प्रशासन से लेकर जन प्रतिनिधियों के समक्ष सड़क की मांग को उठाया जा चुका है लेकिन कुछ नहीं हुआ। सड़क नहीं होने से अस्पताल और आठवीं से आगे की पढ़ाई के लिए तीन किमी दूर जौल गांव की दौड़ लगानी पड़ रही है।