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Champawat News: मौसम चक्र में बदलाव से बंजर हो रहे हैं उपजाऊ खेत
Sat, 17 Feb 2024 10:43 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sat, 17 Feb 2024 10:43 PM IST
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चंपावत के खेतीखान क्षेत्र में जल संरक्षण के लिए खोले गए तालाब। संवाद
चंपावत। जिले में मौसम चक्र में हो लगातार हो रहे बदलाव के कारण उपजाऊ खेत बंजर होते जा रहे हैं। भूमिगत जल स्रोतों के जल स्तर के सूखने और उसमें आ रही गिरावट के कारण खेतों की नमी सूख रही है। बाएफ डेवलपमेंट रिसर्च फाउंंडेशन की ओर से जिले के खेतीखान क्षेत्र के दस गांवों में एक दशक तक किए गए शोध और अध्ययन के बाद इस बात का दावा किया गया है।
शोध में यह बात सामने आई कि मौसम चक्र में बदलाव आने के कारण 50 फीसदी से अधिक सदाबहार जल स्रोत स्थायी रूप से सूख चुके हैं। जिन स्रोतों में पानी है, उनका जलस्तर काफी कम हो गया। रिसर्च फाउंडेशन के टीम लीडर डॉ. दिनेश रतूड़ी के अनुसार चंपावत जिले में औसत 11 से 13 सौ मिलीमीटर वर्षा होती है लेकिन वर्तमान में वर्षा मौसम के अनुरूप नहीं हो रही है। इसका असर उपजाऊ खेतों में पड़ रहा है और वह बंजर होते जा रहे हैं। शोध में कहा गया कि इस स्थिति से निपटने के लिए बरसाती पानी का संग्रह कर टपक सिंचाई को बढ़ावा देना होगा। जल स्रोतों के जल स्तर को बनाए रखने के लिए स्रोत के आसपास उतीस जैसे पानी के पोषक पौधों का रोपण करना होगा। मुख्य कृषि अधिकारी गोपाल सिंह भंडारी के अनुसार किसानों को मौसम चक्र के हिसाब से खेती के तौर- तरीके अपनाने होंगे।
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बाएफ की ओर से इन गांवों में किया गया शोध
चंपावत। बाएफ रिसर्च फाउंडेशन की ओर से खेतीखान क्षेत्र के त्यारसों, गोशनी, मानर, तपनीपाल, नरसिंहडांडा, बांजगांव, खलकंडिय़ा, डिंगडई, पुनाबे और सुयालखर्क गांवो में जल स्रोतों पर शोध कार्य किया गया है। इस दौरान कई आयु वर्ग के लोगों के साथ ही किसानों से संवाद भी किया गया। संवाद
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बर्फबारी नहीं होने से प्रभावित हो रहा है सेब का उत्पादन
चंपावत। जिले के ऊंचाई वाले स्थानों में वर्तमान में बर्फबारी नहीं होने से सेब का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। पहले दिसंबर से मार्च तक कई बार जमकर बर्फबारी होती थी। अब या तो बर्फबारी होती नहीं या होती है तो बहुत कम। डीएचओ टीएन पांडेय के अनुसार सेब की डेलिशियस प्रजाति के लिए एक हजार घंटे चिलिंग तापमान न मिलने से सेब से लदे रहने वाले पेड़ों को भी फायदा नहीं मिल पा रहा है। संवाद
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शोध में यह बात सामने आई कि मौसम चक्र में बदलाव आने के कारण 50 फीसदी से अधिक सदाबहार जल स्रोत स्थायी रूप से सूख चुके हैं। जिन स्रोतों में पानी है, उनका जलस्तर काफी कम हो गया। रिसर्च फाउंडेशन के टीम लीडर डॉ. दिनेश रतूड़ी के अनुसार चंपावत जिले में औसत 11 से 13 सौ मिलीमीटर वर्षा होती है लेकिन वर्तमान में वर्षा मौसम के अनुरूप नहीं हो रही है। इसका असर उपजाऊ खेतों में पड़ रहा है और वह बंजर होते जा रहे हैं। शोध में कहा गया कि इस स्थिति से निपटने के लिए बरसाती पानी का संग्रह कर टपक सिंचाई को बढ़ावा देना होगा। जल स्रोतों के जल स्तर को बनाए रखने के लिए स्रोत के आसपास उतीस जैसे पानी के पोषक पौधों का रोपण करना होगा। मुख्य कृषि अधिकारी गोपाल सिंह भंडारी के अनुसार किसानों को मौसम चक्र के हिसाब से खेती के तौर- तरीके अपनाने होंगे।
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बाएफ की ओर से इन गांवों में किया गया शोध
चंपावत। बाएफ रिसर्च फाउंडेशन की ओर से खेतीखान क्षेत्र के त्यारसों, गोशनी, मानर, तपनीपाल, नरसिंहडांडा, बांजगांव, खलकंडिय़ा, डिंगडई, पुनाबे और सुयालखर्क गांवो में जल स्रोतों पर शोध कार्य किया गया है। इस दौरान कई आयु वर्ग के लोगों के साथ ही किसानों से संवाद भी किया गया। संवाद
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बर्फबारी नहीं होने से प्रभावित हो रहा है सेब का उत्पादन
चंपावत। जिले के ऊंचाई वाले स्थानों में वर्तमान में बर्फबारी नहीं होने से सेब का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। पहले दिसंबर से मार्च तक कई बार जमकर बर्फबारी होती थी। अब या तो बर्फबारी होती नहीं या होती है तो बहुत कम। डीएचओ टीएन पांडेय के अनुसार सेब की डेलिशियस प्रजाति के लिए एक हजार घंटे चिलिंग तापमान न मिलने से सेब से लदे रहने वाले पेड़ों को भी फायदा नहीं मिल पा रहा है। संवाद