फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Females are not getting proper facilities

बचत व संशोधित:अभियान, आधी आबादी की सेहत से बेफिक्र

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 27 Aug 2019 10:27 PM IST
विज्ञापन
Females are not getting proper facilities
चंपावत जिला अस्पताल में इलाज कराने आईं महिलाएं। - फोटो : CHAMPAWAT
जिले की 259648 की आबादी में 49.39 प्रतिशत (128253) महिलाएं हैं लेकिन इस आधी आबादी की सेहत को लेकर कोई चिंता नहीं है। सियासी नेता सेहत को सुधारने के कई दावे कर चुके हैं लेकिन अस्पतालों की हकीकत इन दावों को हवाई बताती है। नेपाल सीमा से लगे चंपावत जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के इलाज के लिए एक भी गायनाकोलोजिस्ट (वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ) नहीं है।
विज्ञापन

जिला अस्पताल सहित जिले के तमाम अस्पतालों में आने वाली औसतन प्रति माह 11304 ओपीडी में से 3733 महिलाओं से संबंधित मामले आते हैं लेकिन इन महिलाओं के इलाज की कारगर व्यवस्था नहीं है। जिले के छोटे-बड़े 23 सरकारी अस्पतालों को छोड़िए, सबसे बड़ा स्वास्थ्य केंद्र जिला अस्पताल भी गायनाकोलोजिस्ट से वंचित है। जिला अस्पताल में 23 जुलाई 2018 से गायनाकोलोजिस्ट की कुर्सी खाली है। जिले में एक गायनाकोलोजिस्ट और पांच स्त्री रोग विशेषज्ञ (एलएमओ) के पद हैं लेकिन इकलौती एलएमओ की तैनाती है।
विज्ञापन

स्वास्थ्य महानिदेशक ने 8 अगस्त को जिला अस्पताल में एक गायनाकोलोजिस्ट के स्थानांतरण आदेश किए लेकिन अब तक उन्होंने ज्वाइन नहीं किया है। विशेषज्ञ नहीं होने से गर्भवती महिलाओं के इलाज से लेकर जटिल प्रसव में समस्या आ रही है। शनिवार को अस्पताल आईं कमला, सरोज आदि का कहना है कि समुचित इलाज न मिलने से उन्हें निजी अस्पताल जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

और तो और 2018 से अब तक आठ गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं की मौत भी हो चुकी है। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि गायनोकोलाजिस्ट और तीन एलएमओ की तैनाती के लिए निदेशालय से आग्रह किया गया है।

13 महीने से गायनाकोलोजिस्ट नहीं होने से गर्भवती महिलाओं से संबंधित रोगों के इलाज और जटिल प्रसव में दिक्कत आ रही है। वे नियमित रूप से गायनाकोलोजिस्ट के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेज रहे हैं लेकिन अभी तक तैनाती नहीं हो सकी है। इस कारण जटिल मामलों को हायर सेंटर भेजना पड़ता है। डॉ. आरके जोशी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल

जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ.आरके जोशी।

जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ.आरके जोशी।- फोटो : CHAMPAWAT

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed