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मौसम ही नहीं, मौसम बीमा योजना से भी भरोसा उठा

Sun, 23 Jun 2019 10:22 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन गिरीश बिष्ट चंपावत।
गिरीश बिष्ट चंपावत। Published by: बृजमोहन बृजमोहन Updated Sun, 23 Jun 2019 10:22 PM IST
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Farmers did not get insurance amount
प्रतीकात्मक - फोटो : अमर उजाला

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अदरक की फसल के बीमा कराने वाले मंच गांव के करीब 63 किसानों के नुकसान की भरपाई नहीं हो पाई। इन किसानों ने करीब 2.15 लाख रुपये का प्रीमियम समय से भरा, लेकिन क्लेम की बारी आई तो बताया गया कि फसल मानकों के हिसाब से नुकसान की जद में नहीं आई है। अब जिला उद्यान विभाग बीमा कंपनी से बात करने और किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए कोशिश का इरादा जता रहा है।

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चंपावत जिले में 2018-19 में अदरक की खेती 475 हेक्टेयर में की गई जिसमें करीब 3091 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ। तल्लादेश क्षेत्र के मंच गांव के 63 किसानों ने करीब 41 हेक्टेयर क्षेेत्र में अदरक की फसल बोई।  इनमें से गणेश राम, शेखर चंद्र, राजेंद्र सिंह, अमर राम, पान सिंह, बद्री सिंह, रमेश चंद्र सहित कुल 63 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल का बीमा कराया। इसके लिए उन्होंने 215035 का प्रीमियम अदा किया। 
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दुबडजैनल सहकारी समिति के सचिव खीम सिंह कुंवर के मुताबिक मौसम की मार से अदरक की फसल बर्बाद हुई लेकिन इन किसानों को बीमे की रकम के रूप में कुछ भी नहीं मिला। इन किसानों को करीब 21.53 लाख रुपये का क्लेम बनता है। मंच उप तहसील के दूसरे गांव सिमिया उरी, हर्तोला, तामली आदि के किसानों को नुकसान की भरपाई की गई है।
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 बताया जा रहा है कि फसल के नुकसान के मापन के लिए तहसील को आधार माना गया है और इसे ऑटोमेटिक वैदर स्टेशन से मापा जाता है। इस स्टेशन से बारिश, नमी, तापमान आदि के आंकड़ों के आधार पर फसल को हुए नुकसान का आकलन होता है। मंच उप तहसील में अदरक की खेती वाले दूसरे गांवों को इसी आधार पर मुआवजा दिया गया लेकिन मंच उप तहसील के मुख्यालय मंच गांव के किसान इससे वंचित रह गए हैं।


मंच गांव के किसानों को मुआवजा क्यों नहीं मिला, इसकी जांच की जाएगी। साथ ही बीमा रकम जमा कराने वाले इन 63 किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए बीमा कंपनी को पत्र भेजा जा रहा है।
 -एनके आर्या, जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत।

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