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सड़क की दूरी से गांव के स्कूल से दूर हुआ परीक्षा केंद्र
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मोटर मार्ग से फासला और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी विकास के लिए ही ग्रहण नहीं है, बल्कि इसकी मार नौनिहालों पर भी पड़ रही है। डांडा, ककनई और बुड़म गांव के हाईस्कूल और इंटर बोर्ड के अभ्यर्थियों को इसका सीधा नुकसान हो रहा है।
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यहां के अभ्यर्थियों की पढ़ाई तो गांव के राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) में ही होती है, लेकिन परीक्षा नहीं। बोर्ड परीक्षा के लिए गांव से 51 किमी दूर टनकपुर जाना इनकी मजबूरी है। इस बार डांडा जीआईसी को बोर्ड परीक्षा का केंद्र बनाने के लिए ग्राम पंचायत की ओर से प्रस्ताव भेजा भी गया, लेकिन शिक्षा विभाग ने सुविधाओं की कमी की दलील देते हुए प्रस्ताव को खारिज कर दिया। 20 किमी पैदल दूरी पर स्थित डांडा, ककनई और बुड़म गांव में एक जीआईसी और एक हाईस्कूल है।
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हाईस्कूल के 42 और इंटर के 17 बोर्ड परीक्षार्थी हैं। इन छात्र-छात्राओं की पढ़ाई गांव में होती है, लेकिन परीक्षा के लिए टनकपुर जीआईसी जाना इनकी बेबसी है। पूर्व ग्राम प्रधान खष्टी देवी ने बताया कि इस दिक्कत से बचने के लिए 2021 की बोर्ड परीक्षा के लिए डांडा को परीक्षा केंद्र बनाने का शिक्षा विभाग को ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव भेजा था, लेकिन शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।
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डांडा से कम परीक्षार्थियों पर बने परीक्षा केंद
जीआईसी रेगड़ू- 23
जीआईसी पनियां- 36
जीआईसी बापरू- 37
इन कारणों से खारिज हुआ प्रस्ताव
-सड़क से अधिक दूरी होना
-नकल रोकने वाले उड़नदस्ते को नियंत्रण करने में परेशानी
-मोबाइल नेटवर्क और आवासीय दिक्कतें
-वीरान रास्ते और जंगली जानवरों का खतरा
डांडा जीआईसी को बोर्ड का परीक्षा केंद्र बनाने का प्रस्ताव प्राप्त हुआ था। इस प्रस्ताव के परीक्षण से पूर्व उन्होंने स्वयं स्थलीय निरीक्षण किया, लेकिन 20 किमी से अधिक पैदल दूरी और निष्पक्ष और शांतिपूर्ण परीक्षा कराने के लिए कई जरूरी बुनियादी सुविधाओं के अभाव के चलते प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया।
-आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।
परीक्षा केंद्र पर खर्च होते हैं पांच हजार रुपये
हाईस्कूल और इंटर की छात्राओं को पढ़ाई के लिए एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ता है, लेकिन बोर्ड इम्तिहान देने में उन्हें करीब चार से पांच हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह ने बताया कि छात्राओं को टनकपुर में किराये, भोजन सहित दूसरी व्यवस्थाओं पर खर्च करना पड़ता है। इसके अलावा देखरेख के लिए परिवार के एक सदस्य को भी साथ रहना होता है। कमोबेश इतना ही खर्च छात्रों को भी करना पड़ता है। वहीं नई जगह परीक्षा देने का असर उनके परीक्षा प्रदर्शन पर भी पड़ता है।