फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   education

अभियान:आदर्श स्कूलों का ये कैसा आदर्श

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 01 Aug 2019 10:24 PM IST
विज्ञापन
education
चंपावत आदर्श राजकीय इंटर कॉलेज भवन। - फोटो : CHAMPAWAT
जिला मुख्यालय का जीआईसी जिले के चार आदर्श राजकीय इंटर कॉलेजों में से एक है लेकिन इस कॉलेज को हकीकत में आदर्श बनाए जाने के लिए लंबा सफर तय करना होगा। प्रवक्ताओं और एलटी शिक्षकों के कुल पांच पद लंबे समय से रिक्त हैं। वहीं पूर्णकालिक प्रधानाचार्य भी नहीं है। इससे भी हैरतंगेज यह कि शिक्षकों को लिपिकीय कामकाज भी निपटाना पड़ रहा है।
विज्ञापन

2015 में आदर्श कॉलेज का दर्जा मिलने से चार साल पूर्व 2011 से इसे स्मार्ट कक्षा संचालित करने के लिए अनुमन्य किया गया था लेकिन यहां स्मार्ट कक्षाएं कभी नहीं चलीं। स्मार्ट कक्षाओं में कंप्यूटर और प्रोजेक्टर के जरिए शिक्षण कार्य होना था लेकिन इसके लिए न तकनीकी रूप से दक्ष स्टाफ है और न पर्याप्त स्थान मिल पाया। यहां सामान्य तकनीक से पढ़ाने के लिए भी पर्याप्त स्टाफ नहीं है।
विज्ञापन

11 प्रवक्ताओं में से महज सात हैं। हिंदी, भूगोल, जीव विज्ञान और कामर्स के प्रवक्ताओं के पद रिक्त हैं। शिक्षक घनश्याम जोशी के सेवानिवृत्त होने के बाद एलटी में भी विज्ञान विषय का पद खाली है। वहीं कॉलेज की लिखा-पढ़त के लिए एक भी बाबू नहीं है। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और कनिष्ठ सहायक के दोनों पद रिक्त हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस जिम्मेदारी को शिक्षक ही निभाने को मजबूर हैं। भूगोल की प्रयोगशाला के हाल भी खराब हैं। इधर सीईओ आरसी पुरोहित का कहना है कि प्रधानाचार्य और दो शिक्षकों का चंपावत तबादला किया गया था लेकिन उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। अब वे अपने स्तर से रिक्त पदों को भरने के लिए प्रयास करेंगे।
आठ साल में कम हो गए 143 छात्र
चंपावत। 1972 में स्थापित चंपावत जीआईसी में अब प्रवेश को लेकर कतई मारामारी नहीं रहती। लचर बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की कमी से यहां छात्रों की संख्या में लगातार कमी हो रही है। 2011 में यहां 533 छात्र थे। जो अब घटकर 390 तक आ पहुंचे हैं।

आदर्श जीआईसी में चार विषयों के प्रवक्ताओं के पद रिक्त हैं। वैकल्पिक तौर पर इन विषयों को एलटी शिक्षकों के जरिए पढ़ाया जा रहा है। वहीं एक भी लिपिक नहीं होने से इस कामी को भी शिक्षकों द्वारा करने की मजबूरी है। अलबत्ता स्मार्ट कक्षाओं के लिए हंस फाउंडेशन की मदद से दो कमरे जल्द शुरू किए जाएंगे। मनोज जोशी, कार्यवाहक प्रधानाचार्य, आदर्श जीआईसी, चंपावत
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed