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गर्मी बढ़ने के साथ ही गहराने लगा पेयजल संकट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Tue, 18 Apr 2017 10:23 PM IST
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गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ ही जिले के विभिन्न स्थानों में पीने के पानी का संकट बढ़ता जा रहा है।
घाटी वाले क्षेत्रों में अभी से ही पेयजल का संकट गहराने लगा है। जल संस्थान की ओर से अपनाए जा रहे वैकल्पिक उपाय भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। विभाग की ओर से आपूर्ति सुचारु बनाए रखने के लिए एक नया टैंकर खरीदा गया है, लेकिन कई स्थानों में असमान वितरण के कारण पेयजल की उपलब्धता के बावजूद संकट पैदा हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को अपनी दिनचर्या का अधिकांश समय पीने के पानी की व्यवस्था करने में लग रहा है। सूखीढांग क्षेत्र की धूरा ग्राम पंचायत में ग्रामीण वाहनों के जरिए हैंडपंप से पानी ढो रहे हैं।
धूरा की प्रधान लक्ष्मी देवी का कहना है कि ग्रामीण सूखीढांग से पानी ढो रहे हैं। क्षेत्र में चार हैंडपंप लगाने की घोषणा तो हुई थी लेकिन केवल चौड़ाकोट में सेनानी पटल के पास एक ही हैंडपंप लगाया गया है, जबकि तीन अन्य स्थानों में हैंडपंपों की सख्त जरूरत है।
उधर, पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष दीपक सिंह ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर ग्राम पंचायत दियूरी के तोक नैकिना में पेयजल संकट दूर करने की मांग उठाई है। चार सौ से अधिक की आबादी वाले गांव की प्यास बुझाने को जल संस्थान ने वर्ष 2001 में पेयजल योजना का निर्माण किया था। लेकिन वर्तमान में योजना के क्षतिग्रस्त होने से नैकिना तोक को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। जल संस्थान की ओर से जिला मुख्यालय के विभिन्न मोहल्लों में टैंकर और पिकअप वाहनों के जरिए आंशिक जलापूर्ति की जा रही है।
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छतार में मनमाने वितरण से उपभोक्ताओं में रोष
नगरपालिका के छतार वार्ड में जल संस्थान की ओर से मनमाने तरीके से पेयजल वितरण किए जाने पर उपभोक्ताओं ने रोष जताया है। उनका कहना है कि योजना में पर्याप्त पानी होने के बावजूद कुछ स्थानों में दिन भर में केवल एक बार दस से बीस मिनट तक ही सप्लाई दी जा रही है। जबकि कई स्थानों पर सुबह-शाम घंटों तक पानी दिया जा रहा है।
घाटी वाले क्षेत्रों में अभी से ही पेयजल का संकट गहराने लगा है। जल संस्थान की ओर से अपनाए जा रहे वैकल्पिक उपाय भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। विभाग की ओर से आपूर्ति सुचारु बनाए रखने के लिए एक नया टैंकर खरीदा गया है, लेकिन कई स्थानों में असमान वितरण के कारण पेयजल की उपलब्धता के बावजूद संकट पैदा हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को अपनी दिनचर्या का अधिकांश समय पीने के पानी की व्यवस्था करने में लग रहा है। सूखीढांग क्षेत्र की धूरा ग्राम पंचायत में ग्रामीण वाहनों के जरिए हैंडपंप से पानी ढो रहे हैं।
धूरा की प्रधान लक्ष्मी देवी का कहना है कि ग्रामीण सूखीढांग से पानी ढो रहे हैं। क्षेत्र में चार हैंडपंप लगाने की घोषणा तो हुई थी लेकिन केवल चौड़ाकोट में सेनानी पटल के पास एक ही हैंडपंप लगाया गया है, जबकि तीन अन्य स्थानों में हैंडपंपों की सख्त जरूरत है।
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उधर, पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष दीपक सिंह ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर ग्राम पंचायत दियूरी के तोक नैकिना में पेयजल संकट दूर करने की मांग उठाई है। चार सौ से अधिक की आबादी वाले गांव की प्यास बुझाने को जल संस्थान ने वर्ष 2001 में पेयजल योजना का निर्माण किया था। लेकिन वर्तमान में योजना के क्षतिग्रस्त होने से नैकिना तोक को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। जल संस्थान की ओर से जिला मुख्यालय के विभिन्न मोहल्लों में टैंकर और पिकअप वाहनों के जरिए आंशिक जलापूर्ति की जा रही है।
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छतार में मनमाने वितरण से उपभोक्ताओं में रोष
नगरपालिका के छतार वार्ड में जल संस्थान की ओर से मनमाने तरीके से पेयजल वितरण किए जाने पर उपभोक्ताओं ने रोष जताया है। उनका कहना है कि योजना में पर्याप्त पानी होने के बावजूद कुछ स्थानों में दिन भर में केवल एक बार दस से बीस मिनट तक ही सप्लाई दी जा रही है। जबकि कई स्थानों पर सुबह-शाम घंटों तक पानी दिया जा रहा है।