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दो दिन में नहीं लिखे जा सके डॉक्टरों के मोबाइल नंबर
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
Updated Fri, 26 May 2017 10:34 PM IST
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जिला अस्पताल में अंकित किए गए डाक्टरों के नाम
- फोटो : अमर उजाला
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जिलाधिकारी डॉ.अहमद इकबाल के बुधवार को किए गए औचक निरीक्षण के दो दिन बाद जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं में मामूली सुधार हुआ है। अस्पताल में लगे दो आरओ सिस्टम में से एक काम करने लगा है, जबकि दूसरा आरओ सिस्टम अब भी बंद है। अस्पताल के मेन गेट पर डॉक्टरों के नाम लिखा बोर्ड जरूर लगा है, लेकिन उसमें मोबाइल नंबर नहीं लिखे हैं। निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देश के बाद भी अस्पताल के गेट पर डीएम का फोन नंबर नहीं लिखा है। पानी के अभाव में अस्पताल शौचालयों में अब भी ताले लटके हैं।
जिला अस्पताल में 24 मई को निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी को कई खामियां मिलीं। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को फटकार लगाते हुए खामियां को शीघ्र दुरुस्त करने की हिदायत दी थी। अस्पताल के मुख्य द्वार पर खुद के मोबाइल नंबर के साथ सभी डॉक्टरों के नाम और मोबाइल नंबर लिखे बोर्ड लगाने के निर्देश दिए थे। मेन गेट पर सिर्फ डॉक्टरों का नाम लिखा बोर्ड लगा है। अस्पताल के इमरजेंसी भवन में लगे आरओ सिस्टम से पानी जरूर आ रहा था, लेकिन लेबर रूम के पास लगा आरओ सिस्टम बंद पड़ा था। जनरल वार्ड के पास बने पुरुष शौचालय और डिस्पेंसरी के पास बने शौचालय बंद पड़े थे। टीबी जांच केंद्र के सीबीनाट मशीन वाले कक्ष का दरवाजा शुक्रवार को भी बंद नजर आया।
चस्पा की है दवाओं की उपलब्धता
डीएम के निरीक्षण के दो दिन बाद अस्पताल में कुछ बदलाव नजर आया है। निरीक्षण के दौरान डीएम द्वारा जो निर्देश दिए गए थे उनमें से कुछ पर अस्पताल प्रशासन अमल कर रहा है। जनरल वार्ड में बेड संख्या के क्रम लिखे हैं। ओपीडी कक्ष के बाहर इमरजेंसी दवाओं की उपलब्धता और अनुपलब्धता की जानकारी लिखी है। डिस्पेंसरी से दवाइयां लेने को सीनियर सिटीजन, महिला और पुरुष के लिए स्थान निर्धारित करने की सूची चस्पा की गई थी।
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कोट........
डॉक्टरों के नाम और मोबाइल नंबर का बोर्ड बनने में समय लगेगा। फिलहाल डॉक्टरों और डीएम का नाम एवं मोबाइल नंबर अस्थायी तौर पर ए फोर साइज के कागज पर चस्पा किया जाएगा। अस्पताल में तीन हजार लीटर क्षमता का पानी का एक टैंकर हर रोज सप्लाई किया जा रहा है, लेकिन ये पानी जरूरत के हिसाब से काफी कम है। इसको देखते हुए अस्पताल में दो महिला और दो पुरुष शौचालय ही खोले गए हैं। -डॉ.आरके जोशी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल, चंपावत।
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जिला अस्पताल में 24 मई को निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी को कई खामियां मिलीं। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को फटकार लगाते हुए खामियां को शीघ्र दुरुस्त करने की हिदायत दी थी। अस्पताल के मुख्य द्वार पर खुद के मोबाइल नंबर के साथ सभी डॉक्टरों के नाम और मोबाइल नंबर लिखे बोर्ड लगाने के निर्देश दिए थे। मेन गेट पर सिर्फ डॉक्टरों का नाम लिखा बोर्ड लगा है। अस्पताल के इमरजेंसी भवन में लगे आरओ सिस्टम से पानी जरूर आ रहा था, लेकिन लेबर रूम के पास लगा आरओ सिस्टम बंद पड़ा था। जनरल वार्ड के पास बने पुरुष शौचालय और डिस्पेंसरी के पास बने शौचालय बंद पड़े थे। टीबी जांच केंद्र के सीबीनाट मशीन वाले कक्ष का दरवाजा शुक्रवार को भी बंद नजर आया।
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चस्पा की है दवाओं की उपलब्धता
डीएम के निरीक्षण के दो दिन बाद अस्पताल में कुछ बदलाव नजर आया है। निरीक्षण के दौरान डीएम द्वारा जो निर्देश दिए गए थे उनमें से कुछ पर अस्पताल प्रशासन अमल कर रहा है। जनरल वार्ड में बेड संख्या के क्रम लिखे हैं। ओपीडी कक्ष के बाहर इमरजेंसी दवाओं की उपलब्धता और अनुपलब्धता की जानकारी लिखी है। डिस्पेंसरी से दवाइयां लेने को सीनियर सिटीजन, महिला और पुरुष के लिए स्थान निर्धारित करने की सूची चस्पा की गई थी।
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डॉक्टरों के नाम और मोबाइल नंबर का बोर्ड बनने में समय लगेगा। फिलहाल डॉक्टरों और डीएम का नाम एवं मोबाइल नंबर अस्थायी तौर पर ए फोर साइज के कागज पर चस्पा किया जाएगा। अस्पताल में तीन हजार लीटर क्षमता का पानी का एक टैंकर हर रोज सप्लाई किया जा रहा है, लेकिन ये पानी जरूरत के हिसाब से काफी कम है। इसको देखते हुए अस्पताल में दो महिला और दो पुरुष शौचालय ही खोले गए हैं। -डॉ.आरके जोशी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल, चंपावत।