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दिगालीचौड़ आईटीआई ः न पर्याप्त ट्रेड और न ही पढ़ाने वाले

Fri, 15 Dec 2017 10:18 PM IST
नवल जोशी, चंपावत।  
नवल जोशी, चंपावत।   Updated Fri, 15 Dec 2017 10:18 PM IST
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Diglichord ITI: Not enough trade nor teachers
दिगालीचौड़ में निर्माणाधीन आईटीआई भवन। - फोटो : amar ujala

नेपाल सीमा से लगे लोहाघाट विकासखंड का दिगालीचौड़ औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) ग्रामीण क्षेत्र के नौजवानों की उम्मीद पर खरा नहीं उतर पा रहा है। यहां न पर्याप्त ट्रेड हैं और नहीं पढ़ाने वाले। और तो और लंबे समय से चल रहा फीटर का ट्रेड भी दो साल से बंद है। वर्तमान में आईटीआई में महज एक ही ट्रेड चल रहा है। पर्याप्त ट्रेड न होने से यहां छात्र संख्या भी घट रही है।

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2006 में दिगालीचौड़ के आईटीआई को स्वीकृति मिली। स्वीकृति के पांच वर्ष बाद 2011 में किराये के भवन में इलेक्ट्रिशियन और फिटर से आईटीआई का संचालन शुरू हुआ। पहले सत्र में दोनों ट्रेडों में 16-16 छात्रों ने प्रवेश भी लिया। मगर पिछले साल से फीटर ट्रेड की पढ़ाई बंद है।
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इसके चलते यहां एकमात्र इलेक्ट्रिशियन ट्रेड का संचालन हो रहा है। इस वक्त इसमें 13 छात्र पंजीकृत हैं। अनुदेशक नहीं होने की वजह से सितंबर 2016 से फिटर ट्रेेड में प्रवेश बंद कर दिए गए हैं। स्टाफ की कमी से आईटीआई के संचालन में दिक्कतें आ रही हैं।
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फिटर अनुदेशक, फोरमैन, प्रशासनिक सहायक, स्टोर कीपर और कला व गणित के शिक्षक के पद रिक्त हैं। जबकि अनुदेशक विद्युतकार, कनिष्ठ सहायक, दो चौकीदार, एक स्वच्छक, एक चपरासी का पद पर उपनल से भरा गया है। छात्र और ग्रामीणों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्र के इस आईटीआई में सभी ट्रेडों में पर्याप्त स्टाफ और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के साथ ही नए उपयोगी ट्रेडों को खोला जाना चाहिए।

धन नहीं मिलने से लटक गया भवन
दिगालीचौड़ के मानाढुंगा में आईटीआई भवन निर्माण के लिए ग्रामीणों द्वारा करीब 51 नाली भूमि उपलब्ध कराई गई है। जिसमें भवन निर्माण का कार्य प्रगति पर है। प्रारंभिक चरण में भवन निर्माण में एक करोड़ 93 लाख रुपये व्यय हो चुके है। धन नहीं मिलने से अप्रैल से निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है।



निदेशालय से अब वाह्यस्रोत के जरिये अनुदेशकों की तैनाती नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि भवन निर्माण के बाद अनुदेशकों की तैनाती की कार्यवाही की जाएगी।
- आरएस मर्तोलिया, प्रधानाचार्य, नोडल आईटीआई, टनकपुर।

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