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Champawat News: 21वीं सदी में भी कठिन डगर, सिस्टम बेखबर
Thu, 05 Sep 2024 11:38 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Thu, 05 Sep 2024 11:38 PM IST
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चंपावत। जहां एक ओर 21 वीं सदी में पग-पग पर स्कूल खोले गए हैं वहीं सीमांत तल्ला देश के 10 ग्राम पंचायतों बच्चों को यातायात सुविधा के अभाव में 25 से 30 किमी पैदल चलना पड़ रहा है। क्षेत्र में उच्च माध्यमिक विद्यालय नहीं होने से बच्चे शिक्षा लेने के लिए 20 से 30 किमी पैदल तीन क्लस्टर विद्यालयों में पढ़ने जाते हैं।
तल्ला देश क्षेत्र के 10 ग्राम पंचायतों के विद्यालयों के बच्चों के लिए पढ़ाई काफी मुश्किल है। वह रोज पढ़ाई के लिए संघर्ष करते हैं। रोजाना समय से उठकर विद्यालय पहुंचना और पैदल आना जाना उनके लिए कठिन चुनौती होती है। वाहन की कोई व्यवस्था नहीं होने से उनके लिए स्कूल पहुंचना आसान नहीं होता है। 174 बच्चों को पढ़ाई के लिए क्लस्टर विद्यालय जीआईसी तामली, मंच, धौन जाना पड़ता है। दुर्गम जंगल के रास्ते से पैदल चलकर विद्यालयों तक पहुंचने में बच्चों को परेशानी होती है। इस कारण क्षेत्र की अधिकांश बालिकाओं के लिए कक्षा 10 की पढ़ाई के बाद इंटर की पढ़ाई मुश्किल होती है।
ग्राम पंचायत दूरी (किमी में)
नीड़ 22
रमैला 24
हरम 20
रियासी बमनगांव 10
आमनी 24
तरकुली 30
सिमिया उरी 20
पोलप 10
सल्ली 24
स्कूल के लिए सुबह पांच बजे घर से निकल जाते हैं बच्चे
चंपावत। स्कूल जाने के लिए 10 गांवों के बच्चे करीब चार बजे उठते हैं और पांच बजे स्कूल के लिए निकल जाते हैं। थकावट भरा सफर कर स्कूल पहुंचते हैं। सबसे अधिक दिक्कत सर्दियों में होती है, जब बच्चे 10 बजे स्कूल पहुंचते हैं और साढ़े चार बजे छुट्टी होने पर देर शाम छह बजे घर आते हैं।
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कोट
जीआईसी धौन जाना आसान नहीं होता है। बारिश में सबसे अधिक दिक्कत होती है। पहाड़ी से सड़क पर मलबा आता है तो दूसरी तरफ रास्ते में कीचड़ होता है। ऐसे में पूरे कपड़े चलते-चलते खराब हो जाते हैं। वाहन की कोई सुविधा नहीं है। झुंड बनाकर जाना मजबूरी है। - अर्जुन सिंह रावत, छात्र, ग्राम पंचायत सल्ली।
कोट
तल्ला देश के स्कूली बच्चों के लिए वाहन सुविधा के लिए सीएम को पत्र दिया है। 174 बच्चों को दुर्गम रास्तों से होकर स्कूल पैदल पहुंचना पड़ता है। थकान से चूर इन बच्चों के लिए स्कूल में भी पढ़ाई भी आसान नहीं होती है। - दीपेश चंद्र शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता ग्रांम पंचायत नीड़।
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तल्ला देश क्षेत्र के 10 ग्राम पंचायतों के विद्यालयों के बच्चों के लिए पढ़ाई काफी मुश्किल है। वह रोज पढ़ाई के लिए संघर्ष करते हैं। रोजाना समय से उठकर विद्यालय पहुंचना और पैदल आना जाना उनके लिए कठिन चुनौती होती है। वाहन की कोई व्यवस्था नहीं होने से उनके लिए स्कूल पहुंचना आसान नहीं होता है। 174 बच्चों को पढ़ाई के लिए क्लस्टर विद्यालय जीआईसी तामली, मंच, धौन जाना पड़ता है। दुर्गम जंगल के रास्ते से पैदल चलकर विद्यालयों तक पहुंचने में बच्चों को परेशानी होती है। इस कारण क्षेत्र की अधिकांश बालिकाओं के लिए कक्षा 10 की पढ़ाई के बाद इंटर की पढ़ाई मुश्किल होती है।
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ग्राम पंचायत दूरी (किमी में)
नीड़ 22
रमैला 24
हरम 20
रियासी बमनगांव 10
आमनी 24
तरकुली 30
सिमिया उरी 20
पोलप 10
सल्ली 24
स्कूल के लिए सुबह पांच बजे घर से निकल जाते हैं बच्चे
चंपावत। स्कूल जाने के लिए 10 गांवों के बच्चे करीब चार बजे उठते हैं और पांच बजे स्कूल के लिए निकल जाते हैं। थकावट भरा सफर कर स्कूल पहुंचते हैं। सबसे अधिक दिक्कत सर्दियों में होती है, जब बच्चे 10 बजे स्कूल पहुंचते हैं और साढ़े चार बजे छुट्टी होने पर देर शाम छह बजे घर आते हैं।
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जीआईसी धौन जाना आसान नहीं होता है। बारिश में सबसे अधिक दिक्कत होती है। पहाड़ी से सड़क पर मलबा आता है तो दूसरी तरफ रास्ते में कीचड़ होता है। ऐसे में पूरे कपड़े चलते-चलते खराब हो जाते हैं। वाहन की कोई सुविधा नहीं है। झुंड बनाकर जाना मजबूरी है। - अर्जुन सिंह रावत, छात्र, ग्राम पंचायत सल्ली।
कोट
तल्ला देश के स्कूली बच्चों के लिए वाहन सुविधा के लिए सीएम को पत्र दिया है। 174 बच्चों को दुर्गम रास्तों से होकर स्कूल पैदल पहुंचना पड़ता है। थकान से चूर इन बच्चों के लिए स्कूल में भी पढ़ाई भी आसान नहीं होती है। - दीपेश चंद्र शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता ग्रांम पंचायत नीड़।