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एक जैसी कांपैक्टर मशीन, दो नगर निकायें, दो अलग-अलग कीमतें

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2020 11:18 PM IST
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Different prices of similar compactor machines in two municipalities
लोहाघाट के कांपैक्टर मशीन में तैयार माल। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। चंपावत जिले की दो मैदानी नगर निकायों मेें एक ही तरह की कांपैक्टर मशीनों के दो अलग-अलग कीमत में खरीदी गई। बनबसा की मशीन का दाम टनकपुर की अपेक्षा 3.88 लाख रुपये कम है। वहीं भुगतान नहीं होने पर कंपनी ने टनकपुर पालिका से कमीशन मांगने का आरोप लगाया है।
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जिले की सबसे बड़ी टनकपुर नगर पालिका में 2019 में कांपैक्टर मशीन 9,45,831 रुपये में खरीदी गई। मशीन को लगाने के साथ बाकायदा काम भी शुरू हो गया। वहीं बनबसा नगर पंचायत में ऐसी ही मशीन को 5,56,936 रुपये में क्रय किया गया। बनबसा नगर पंचायत ने मशीन की रकम में से अब तक चार लाख का भुगतान किया है। टनकपुर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी का अतिरिक्त जिम्मा देख रहे डॉ. डीके शर्मा ने बताया कि सबसे कम कीमत वाले आवेदन को स्वीकार किया गया था। अलबत्ता अभी उनका भुगतान नहीं किया गया। वहीं मशीन देने वाली उत्तर प्रदेश की कंपनी ने आरोप लगाया कि नगर पालिका की ओर से कमीशन की मांग की जा रही है। इस बाबत उन्होंने डीएम को पत्र भेज पालिका के सभी कार्यों की जांच की भी मांग की है। साथ ही कहा कि वह बनबसा की दर पर मशीन का भुगतान लेने को तैयार है।
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कोट
टनकपुर नगर पालिका में कांपैक्टर मशीन की खरीद टेंडर प्रक्रिया से हुई। बनबसा की मशीन की कीमत कम होने की भनक लगने पर उन्होंने भुगतान नहीं करने के ईओ को निर्देश दिए। इसके बाद भुगतान को रोकने के साथ स्पष्टीकरण तलब किया गया। इससे खींझकर कंपनी कमीशन का आरोप लगा रही है। कमीशन का आरोप पूरी तरह गलत और आधारहीन है। - विपिन वर्मा, अध्यक्ष, नगर पालिका, टनकपुर।
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ऐसे काम करती है कांपैक्टर मशीन
चंपावत। कांपैक्टर मशीन का काम पॉलीथिन, प्लास्टिक और कांच की बोतलों को छोटा रूप देकर निस्तारित करना है। इसके जरिए तैयार सामग्री को नगर विकास विभाग के हल्द्वानी में बने प्लांट में भेजा जाना था। कांपैक्टर मशीन से बेकार पड़ी पॉलीथिन के छोटे-छोटे ब्रिक्स बनाए जाएंगे। ये मशीन एक समय में 40 टन पॉलीथिन को रिसाईकिल कर 4 टन पालीथिन में तब्दील करती है।
पांच साल बाद शुरू हुई चंपावत की कांपैक्टर मशीन
चंपावत। चंपावत नगर पालिका में 2014 में लगी कांपैक्टर मशीन पांच साल बाद शुरू हुई। इसके जरिए पॉलीथिन, प्लास्टिक व कांच की बोतलों के कचरे की समस्या का हल होने के साथ ही आय भी होती। चंपावत और आसपास के क्षेत्र में रोजाना औसतन करीब सात क्विंटल पॉलीथिन, प्लास्टिक व कांच का कचरा एकत्र होता है। चेयरमैन विजय वर्मा ने बताया कि ललुवापानी के पास 2014 में लगी इस मशीन को पांच साल बाद शुरू किया जा सका।

कांपैक्टर में तैयार है पौने दो लाख का माल
लोहाघाट (चंपावत)। लोहाघाट नगर पंचायत की कांपैक्टर मशीन सबसे शानदार काम कर रही है। इस मशीन ने अब तक करीब 1.75 लाख रुपये कीमत के प्लास्टिक और कांच की बोतल-शीशियों को कांपैक्ट किया है। प्लास्टिक की पन्नी को सात रुपये व कांच की बोतलों को 12 रुपये क्विंटल के हिसाब से खरीदा जाता है। नगर पंचायत अध्यक्ष गोविंद वर्मा का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से इस माल को बिक्री के लिए हल्द्वानी नहीं भेजा जा सका है। हालात में सुधार होने पर जल्द ही इसे बेचा जाएगा। कांपैक्टर मशीन के संचालन के लिए तीन पर्यावरण मित्र लगाए हैं। ये पर्यावरण मित्र न केवल मशीन का संचालन करते हैं, बल्कि नगर में पड़ी पॉलीथिन, प्लास्टिक व काच की बोतलों को भी एकत्र करते हैं।
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