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Champawat News: आजाद भारत में उपेक्षित हाल में पहुंचा सेनानियों का ओलीगांव
Wed, 10 Apr 2024 11:21 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Wed, 10 Apr 2024 11:21 PM IST
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चंपावत। पूरे देश में 18वें लोकसभा चुनाव को लेकर प्रचार का शोर है। वहीं देश की आजादी की जंग अहम भूमिका निभाने वाले चंपावत जिले के खेतीखान क्षेत्र का प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का गांव ओलीगांव आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम से उनके मूल गांव में स्मारक तक नहीं बना है। गांव तक पहुंचने के लिए न तो अच्छे रास्ते हैं और न ही पेयजल की पुख्ता व्यवस्था ही है।
ओलीगांव के समीप ही स्थित ऐतिहासिक जागोली धर्मशाला कभी आजादी की लड़ाई की रणनीति तय करने का महत्वपूर्ण पड़ाव हुआ करती थी। आजादी के बाद दूसरे प्रधानमंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री 1934 में जागोली धर्मशाला में एक सप्ताह तक रुके थे। यहां उन्होंने काली कुमाऊं के बब्बर शेर पंडित हर्षदेव ओली के साथ अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति पर मंत्रणा की थी।
लाल बहादुर शास्त्री के अलावा तत्कालीन कांग्रेस के कई बडे़ नेताओं और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने भी जागोली में प्रवास किया था। खेतीखान के गोशनी में वर्ष 1901 में जागोली में मंदिर और धर्मशाला का निर्माण हुआ था। सेनानियों के गांव की उपेक्षा से क्षेत्रीय लोग आहत हैं।
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आठ मार्च 1890 को जन्मे काली कुमाऊं के बब्बर शेर के नाम से विख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित हर्षदेव ओली, छह मई 1897 को जन्मे सेनानी पंडित दुर्गादत्त ओली और 14 जून 1902 को जन्मे सेनानी पंडित दयाराम ओली का पैतृक गांव ओलीगांव आज भी पहचान को तरस रहा है। लंबी जेल काटने वाले इन सेनानियों के नाम से गांव में एक सरकारी स्मारक तक नहीं बना है।
गांव से करीब तीन किमी दूर खेतीखान बाजार में इंद्रा पार्क में इन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की प्रतिमा जरूर लगाई गई है। सेनानी के प्रपौत्र राजेश ओली आदि का कहना है कि बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने से ओलीगांव और गोशनी की ऐतिहासिक पहचान सिमटते जा रही है। वर्तमान में हो रहे लोक सभा चुनाव को लेकर सेनानियों के गांव में कोई खास हलचल अथवा उत्साह नहीं है। संवाद
कोट
खेतीखान की ऐतिहासिक जागोली धर्मशाला स्वाधीनता की जंग की मूक गवाह रही है। धर्मशाला के विकास के साथ ही सेनानियों के ओलीगांव में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की जरूरत है। - राजेश ओली, सेनानी हर्षदेव ओली के प्रपौत्र।
कोट
देश की आजादी की लड़ाई में खेतीखान क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही थी लेकिन आजाद भारत में सेनानियों के गांवों में बुनियादी सुविधाओं की दरकार बताती है कि कहीं न कहीं कुछ छूट रहा है। - देवेंद्र ओली, इतिहासकार, चंपावत।
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ओलीगांव के समीप ही स्थित ऐतिहासिक जागोली धर्मशाला कभी आजादी की लड़ाई की रणनीति तय करने का महत्वपूर्ण पड़ाव हुआ करती थी। आजादी के बाद दूसरे प्रधानमंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री 1934 में जागोली धर्मशाला में एक सप्ताह तक रुके थे। यहां उन्होंने काली कुमाऊं के बब्बर शेर पंडित हर्षदेव ओली के साथ अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति पर मंत्रणा की थी।
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लाल बहादुर शास्त्री के अलावा तत्कालीन कांग्रेस के कई बडे़ नेताओं और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने भी जागोली में प्रवास किया था। खेतीखान के गोशनी में वर्ष 1901 में जागोली में मंदिर और धर्मशाला का निर्माण हुआ था। सेनानियों के गांव की उपेक्षा से क्षेत्रीय लोग आहत हैं।
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आठ मार्च 1890 को जन्मे काली कुमाऊं के बब्बर शेर के नाम से विख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित हर्षदेव ओली, छह मई 1897 को जन्मे सेनानी पंडित दुर्गादत्त ओली और 14 जून 1902 को जन्मे सेनानी पंडित दयाराम ओली का पैतृक गांव ओलीगांव आज भी पहचान को तरस रहा है। लंबी जेल काटने वाले इन सेनानियों के नाम से गांव में एक सरकारी स्मारक तक नहीं बना है।
गांव से करीब तीन किमी दूर खेतीखान बाजार में इंद्रा पार्क में इन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की प्रतिमा जरूर लगाई गई है। सेनानी के प्रपौत्र राजेश ओली आदि का कहना है कि बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने से ओलीगांव और गोशनी की ऐतिहासिक पहचान सिमटते जा रही है। वर्तमान में हो रहे लोक सभा चुनाव को लेकर सेनानियों के गांव में कोई खास हलचल अथवा उत्साह नहीं है। संवाद
कोट
खेतीखान की ऐतिहासिक जागोली धर्मशाला स्वाधीनता की जंग की मूक गवाह रही है। धर्मशाला के विकास के साथ ही सेनानियों के ओलीगांव में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की जरूरत है। - राजेश ओली, सेनानी हर्षदेव ओली के प्रपौत्र।
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देश की आजादी की लड़ाई में खेतीखान क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही थी लेकिन आजाद भारत में सेनानियों के गांवों में बुनियादी सुविधाओं की दरकार बताती है कि कहीं न कहीं कुछ छूट रहा है। - देवेंद्र ओली, इतिहासकार, चंपावत।