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Champawat News: ब्यानधुरा धाम में 13 जनवरी की रात्रि को होगा देव जागरण
Sat, 10 Jan 2026 11:14 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sat, 10 Jan 2026 11:14 PM IST
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ब्यानधुरा धाम। संवाद
चंपावत। जिले के प्रसिद्ध धार्मिक और आस्था केंद्रों में अपना स्थान रखने वाले ब्यानधुरा धाम में 13 जनवरी की रात्रि को देव जागरण होगा। इस देव जागरण को देवताओं की विधानसभा के नाम से जाना जाता है। उत्तरायणी पर्व पर हर वर्ष आयोजित होने वाले देव जागरण में क्षेत्रीय और अन्य जिले के श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग लेते हैं।
चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जनपदों की सीमा से लगे सेनापानी रेंज के घने जंगलों के बीच स्थित ब्यानधुरा मंदिर सड़क से 35 किमी दूर एक ऊंची चोटी पर है। इस मंदिर में विराजमान देवता को ऐड़ी देवता कहा जाता है। वैसे तो पूरे कुमाऊं के विभिन्न स्थानों पर ऐड़ी देवता के मंदिर स्थित है लेकिन ब्यानधुरा स्थित इस ऐड़ी देवता के मंदिर की पौराणिक मान्यता उनमें से सबसे अधिक है।
मान्यता है कि देव जागरण के दौरान देव-मानव संवाद के माध्यम से श्रद्धालुओं की समस्याओं का समाधान होता है। इस अवसर पर विधिवत पूजा-अर्चना, अनुष्ठान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ देवताओं का आह्वान किया जाता रहा है। देव जागरण के उपरांत विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा।
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धनुष बाण चढ़ाने की परंपरा है
मंदिर कितना प्राचीन हैं, इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई हैं। मंदिर परिसर स्थित सैकड़ों धनुष-बाण आदि को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह ऐड़ी देवता का मंदिर एक प्राचीन पौराणिक मंदिर हैं। यहां धनुष बाण चढ़ाने की परंपरा है। मंदिर के पुजारी आज भी कहते हैं कि यहां के अस्त्रों के ढेर में ऐड़ी देवता का सबसे भारी धनुष भी उपस्थित है। मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष और पुजारी पंडित शंकर जोशी आचार्य ने बताया कि उत्तरायणी पर्व के अवसर पर आयोजित होने वाला यह देव जागरण क्षेत्र की प्राचीन लोक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंदिर समिति और स्थानीय लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं।
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चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जनपदों की सीमा से लगे सेनापानी रेंज के घने जंगलों के बीच स्थित ब्यानधुरा मंदिर सड़क से 35 किमी दूर एक ऊंची चोटी पर है। इस मंदिर में विराजमान देवता को ऐड़ी देवता कहा जाता है। वैसे तो पूरे कुमाऊं के विभिन्न स्थानों पर ऐड़ी देवता के मंदिर स्थित है लेकिन ब्यानधुरा स्थित इस ऐड़ी देवता के मंदिर की पौराणिक मान्यता उनमें से सबसे अधिक है।
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मान्यता है कि देव जागरण के दौरान देव-मानव संवाद के माध्यम से श्रद्धालुओं की समस्याओं का समाधान होता है। इस अवसर पर विधिवत पूजा-अर्चना, अनुष्ठान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ देवताओं का आह्वान किया जाता रहा है। देव जागरण के उपरांत विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा।
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धनुष बाण चढ़ाने की परंपरा है
मंदिर कितना प्राचीन हैं, इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई हैं। मंदिर परिसर स्थित सैकड़ों धनुष-बाण आदि को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह ऐड़ी देवता का मंदिर एक प्राचीन पौराणिक मंदिर हैं। यहां धनुष बाण चढ़ाने की परंपरा है। मंदिर के पुजारी आज भी कहते हैं कि यहां के अस्त्रों के ढेर में ऐड़ी देवता का सबसे भारी धनुष भी उपस्थित है। मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष और पुजारी पंडित शंकर जोशी आचार्य ने बताया कि उत्तरायणी पर्व के अवसर पर आयोजित होने वाला यह देव जागरण क्षेत्र की प्राचीन लोक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंदिर समिति और स्थानीय लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं।