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बर्बादी : 191 सरकारी भवनों में लटके हैं ताले
Sat, 28 Oct 2023 10:39 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sat, 28 Oct 2023 10:39 PM IST
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चंपावत के खर्ककार्की गांव का बंद पड़ा सामुदायिक और विपणन केंद्र भवन। संवाद
चंपावत। 20 करोड़ रुपये से अधिक लागत से बने 191 सरकारी भवनों के बुरे हाल हैं। इनका लंबे समय से कोई उपयोग नहीं हो रहा है। अधिकतर भवनों में बनने के बाद से ताले लटके हुए हैं।
चंपावत जिले में 191 सरकारी भवन बंद पड़े हैं। इनमें 49 प्राथमिक और जूनियर के बंद हो चुके स्कूल भवन भी शामिल हैं। इक्का दुक्का स्कूल भवनों में आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। सामुदायिक भवन, कृषि विपणन केंद्र, गांवों में विश्राम गृह आदि किसी काम नहीं आ रहे हैं। कृषि विपणन केंद्रों का काम न्याय पंचायत, ब्लॉक या नजदीक के दूसरे भवनों से किया जा रहा है। लंबे समय से उपयोग में नहीं आने से खाली पड़े सरकारी भवनों का रखरखाव भी मुश्किल हो रहा है।
उपयोगहीन भवनों पर एक नजर: चंपावत कलक्ट्रेट से 20 मीटर की दूरी पर कृषि ग्रोथ सेंटर, खर्ककार्की और सिप्टी का सामुदायिक और विपणन केंद्र भवन, पाटी के रौलमेल गांव में आठ साल से धूल फांक रहा कृषि विपणन केंद्र और आवासीय भवन, नेपाल सीमा से लगे चूका का सरकारी भवन, विश्रामगृह।
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बाक्स
कई सरकारी विभागों के पास नहीं हैं अपने भवन
चंपावत। चंपावत जिले में कई सरकारी विभागों के पास अपने भवन नहीं हैं। ऐसे में इन कार्यालयों का संचालन किराये के भवन में हो रहा है। संभागीय निरीक्षक कार्यालय, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी कार्यालय, चंपावत आयुर्वेदिक अस्पताल, श्रम विभाग शिविर कार्यालय, जल संस्थान, जल निगम, सीएनडीएस, उरेडा, पीएमजीएसवाई खंड, खादी ग्रामोद्योग, रेशम, लीड बैंक, मापतौल सहित कई विभागों को किराए में काफी धन खर्च करना पड़ रहा है।
कोट
बंद सरकारी भवनों को उपयोग में लाने के लिए संबंधित विभागों को पत्र भेजा जाएगा। दूसरे विभागों की जरूरत के अनुरूप होने पर उस विभाग को भी भवन आवंटित किया जाएगा।
नवनीत पांडे, डीएम, चंपावत।
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चंपावत जिले में 191 सरकारी भवन बंद पड़े हैं। इनमें 49 प्राथमिक और जूनियर के बंद हो चुके स्कूल भवन भी शामिल हैं। इक्का दुक्का स्कूल भवनों में आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। सामुदायिक भवन, कृषि विपणन केंद्र, गांवों में विश्राम गृह आदि किसी काम नहीं आ रहे हैं। कृषि विपणन केंद्रों का काम न्याय पंचायत, ब्लॉक या नजदीक के दूसरे भवनों से किया जा रहा है। लंबे समय से उपयोग में नहीं आने से खाली पड़े सरकारी भवनों का रखरखाव भी मुश्किल हो रहा है।
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उपयोगहीन भवनों पर एक नजर: चंपावत कलक्ट्रेट से 20 मीटर की दूरी पर कृषि ग्रोथ सेंटर, खर्ककार्की और सिप्टी का सामुदायिक और विपणन केंद्र भवन, पाटी के रौलमेल गांव में आठ साल से धूल फांक रहा कृषि विपणन केंद्र और आवासीय भवन, नेपाल सीमा से लगे चूका का सरकारी भवन, विश्रामगृह।
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कई सरकारी विभागों के पास नहीं हैं अपने भवन
चंपावत। चंपावत जिले में कई सरकारी विभागों के पास अपने भवन नहीं हैं। ऐसे में इन कार्यालयों का संचालन किराये के भवन में हो रहा है। संभागीय निरीक्षक कार्यालय, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी कार्यालय, चंपावत आयुर्वेदिक अस्पताल, श्रम विभाग शिविर कार्यालय, जल संस्थान, जल निगम, सीएनडीएस, उरेडा, पीएमजीएसवाई खंड, खादी ग्रामोद्योग, रेशम, लीड बैंक, मापतौल सहित कई विभागों को किराए में काफी धन खर्च करना पड़ रहा है।
कोट
बंद सरकारी भवनों को उपयोग में लाने के लिए संबंधित विभागों को पत्र भेजा जाएगा। दूसरे विभागों की जरूरत के अनुरूप होने पर उस विभाग को भी भवन आवंटित किया जाएगा।
नवनीत पांडे, डीएम, चंपावत।