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धरना-प्रदर्शन कर गिनाई मांगें
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Tue, 09 Jan 2018 10:33 PM IST
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चंपावत में धरने पर बैठे संघर्ष समिति सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत विकास एवं संघर्ष समिति ने जिले की विभिन्न समस्याओं के समाधान को लेकर पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत मोटर स्टेशन पर एक दिनी धरना-प्रदर्शन किया। बाद में डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को 13 सूत्री मांगों का ज्ञापन भेजा गया। समिति की ओर से मांगों को लेकर प्रत्येक मंगलवार को जिला मुख्यालय पर धरना देने का निर्णय लिया गया है।
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ज्ञापन में मुख्यालय में प्रशासनिक रूप से स्वीकृत बेस अस्पताल को वित्तीय स्वीकृति प्रदान किए जाने और भवन निर्माण के लिए कुमाऊं मंडल विकास निगम की अवशेष भूमि चिकित्सा विभाग को हस्तांतरित करने, मुख्यालय में अलग से एआरटीओ कार्यालय की स्थापना किए जाने, चंपावत-ढकना-धामीसौन-खेतीखान, सैदोलाबोरा-ललुवापानी लिंक और नरसिंहडांडा-गुरौली मोटर मार्गों को स्वीकृति प्रदान करने, खेल स्टेडियम का निर्माण करने, डिग्री कॉलेज में विज्ञान और एमएससी संकाय खोलने, सीवर लाइन का निर्माण किए जाने, आईटीआई में नए व्यावसायिक ट्रेड संचालित करने, निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज के लिए भवन और पदों की स्वीकृति प्रदान करने, प्रस्तावित जेल की भूमि को अन्यत्र स्थानांतरित करने, आधार कार्ड बनाने के केंद्र संचालित करने आदि की मांगों को प्रमुखता से उठाया गया है।
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मंगलवार को संघर्ष समिति अध्यक्ष बसंत सिंह तड़ागी के नेतृत्व में धरने पर बैठने और ज्ञापन देने वालों में हरेंद्र बोहरा, निलाप सिंह, नारायण राम टम्टा, रमेश चंद्र पुनेठा, हरीश सिंह चौधरी, प्रताप सिंह बिष्ट, मोहन सिंह चौधरी, दयाकिशन पांडेय, रमेश सिंह मनराल, हयात सिंह बोहरा, नारायण दत्त जोशी आदि थे।
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राज्य आंदोलनकारी घोषित करने की मांग
जिला विकास एवं संघर्ष समिति की जनसभा में चंपावत जिला बनाओ आंदोलन में शामिल रहे आंदोलनकारियों को राज्य आंदोलनकारी घोषित किए जाने की मांग उठाई गई। वक्ताओं का कहना था कि चंपावत जिले को लेकर चलाए गए आंदोलन के दौरान ही आरक्षण विरोधी और उत्तराखंड राज्य बनाओ आंदोलन साथ-साथ चल रहे थे, लेकिन जिला प्रशासन की जिला आंदोलनकारियों को राज्य आंदोलनकारी नहीं माना जा रहा है।