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टनकपुर-जौलजीबी सड़क की सीबीआई जांच की मांग
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ोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल।
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। सामरिक महत्व की नेपाल सीमा से लगी टनकपुर-जौलजीबी सड़क को लेकर महालेखा परीक्षक (एजी) की रिपोर्ट आने के बाद लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल फिर से मुखर हो गए हैं। एजी की रिपोर्ट में सड़क की डीपीआर को गलत बनाने के साथ 1.92 करोड़ रुपये के नुकसान की बात कही गई है। विधायक ने रविवार को अमर उजाला से फोन पर बात करते हुए कहा कि एजी की रिपोर्ट से सामरिक महत्व की नेपाल सीमा से लगी टीजे सड़क में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। ऐसे में इस मामले की उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआईं) से जांच करने की मांग की। साथ ही एजी की रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखा जाना चाहिए।
फर्त्याल ने टीजे सड़क के दूसरे पैकेज चूका से रूपालीगाड़ तक की निर्माणाधीन सड़क में डीपीआर और डंपिंग जोन में मलबे का निस्तारण करने में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। कहा कि सामरिक महत्व की यह सड़क दरसअल भ्रष्टाचार की सड़क बन गई है। विधायक का कहना है कि चूका से रुपालीगाड़ के 24.400 किमी सड़क 123 करोड़ (5.04 करोड़ रुपये प्रति किमी) में बनाई जा रही है। वहीं पहले पैकेज में ठुलीगाड़ से चूका के 17.875 किमी सड़क की लागत 67 करोड़ (3.74 करोड़ रुपये प्रति किमी) है। आरोप लगाया कि डीपीआर बनाते वक्त मौका मुआयना ठीक से नहीं किया गया।
वहीं दूसरे पैकेज में निविदा की गड़बड़ी के आरोप को खारिज करते हुए आर्बिट्रेशन से मिली क्लीन चिट के बाद पुराने ठेकेदार ने फिर से काम शुरू कर दिया है। विधायक फर्त्याल का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रवैये का पालन करते हुए इस जंग को मंजिल तक पहुंचाया जाएगा। सड़क कटिंग में ज्यादातर मलबे को डंपिंग जोन में नहीं डालकर पर्यावरण को नुकसान के साथ आर्थिक चपत लगाई जा रही है। मामले की जांच सीबीआई से कराने को सरकार को पत्र भेजेंगे, ताकि सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति साकार रूप ले सके।
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फर्त्याल ने टीजे सड़क के दूसरे पैकेज चूका से रूपालीगाड़ तक की निर्माणाधीन सड़क में डीपीआर और डंपिंग जोन में मलबे का निस्तारण करने में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। कहा कि सामरिक महत्व की यह सड़क दरसअल भ्रष्टाचार की सड़क बन गई है। विधायक का कहना है कि चूका से रुपालीगाड़ के 24.400 किमी सड़क 123 करोड़ (5.04 करोड़ रुपये प्रति किमी) में बनाई जा रही है। वहीं पहले पैकेज में ठुलीगाड़ से चूका के 17.875 किमी सड़क की लागत 67 करोड़ (3.74 करोड़ रुपये प्रति किमी) है। आरोप लगाया कि डीपीआर बनाते वक्त मौका मुआयना ठीक से नहीं किया गया।
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वहीं दूसरे पैकेज में निविदा की गड़बड़ी के आरोप को खारिज करते हुए आर्बिट्रेशन से मिली क्लीन चिट के बाद पुराने ठेकेदार ने फिर से काम शुरू कर दिया है। विधायक फर्त्याल का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रवैये का पालन करते हुए इस जंग को मंजिल तक पहुंचाया जाएगा। सड़क कटिंग में ज्यादातर मलबे को डंपिंग जोन में नहीं डालकर पर्यावरण को नुकसान के साथ आर्थिक चपत लगाई जा रही है। मामले की जांच सीबीआई से कराने को सरकार को पत्र भेजेंगे, ताकि सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति साकार रूप ले सके।
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