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मांग और दाम ने बदल दी मडुवे की किस्मत

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 18 Dec 2019 10:36 PM IST
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Demand and price changed Maduwe's fate
चंपावत में किराना की दुकान में रखा मडुवे का आटा। - फोटो : CHAMPAWAT
मांग और दाम ने बदल दी मडुवे की किस्मत
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गेहूं को पछाड़ रहा मडुवा, चार साल में बढ़ गया 11 फीसदी रकवा
मडुवे की खेती पर प्रोत्साहन राशि का भी पड़ रहा असर
चंद्रशेखर जोशी
चंपावत। कभी गरीबों का भोजन माने जाने वाले मडुवे की अब खूब मांग है। भरपूर मांग की वजह से अब मडुवे की कीमत गेहूं से दो गुने से भी ज्यादा है। जबर्दस्त बाजार के चलते मडुवे की खेती में तेजी से इजाफा हो रहा है। बीते चार साल में मडुवे की खेती में करीब 11 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
मौसम के अनुकूल होने के साथ मडुवा औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके चलते मडुवे की खेती भी बढ़ रही है। चंपावत जिले में इस वक्त 6848 हेक्टेयर में गेहूं की खेती हो रही है, जबकि 5739 हेक्टेयर क्षेत्र में मडुवे की खेती हो रही है। मडुवा सिर्फ पहाड़ में बोया जाता है, जबकि कुल खेती की करीब 30 प्रतिशत (2055 हेक्टेयर) गेहूं की खेती ही पहाड़ में हो रही है। शेष 70 फीसदी गेहूं की खेती टनकपुर-बनबसा में होती है।
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कमल जोशी, मनोज लडवाल, शेर सिंह महर सहित कई किसान बताते हैं कि अब मडुवे के आटे की जाड़ों में भरपूर बाजार है। मांग और दाम बढ़ने से मुनाफा भी खूब हो रहा है। इस वक्त चंपावत में गेहूं का आटा 24 रुपये, तो मडुवे का आटे 45 से 50 रुपये किलो है। इसके अलावा मडुवे के बिस्कुट भी बनने लगे हैं। बेहतर दाम मिलने से चार साल में मडुवे की खेती में करीब 11 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। 2015 में जिले में 5171 हेक्टेयर में मडुवा बोया जाता था जो अब 5739 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इस वक्त करीब 9043 मीट्रिक टन मडुवे का उत्पादन हुआ है।
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कोट
मडुवे की मांग बीते चार वर्षों में तेजी से बढ़ी है। इस कारण किसान इसकी ओर आकृष्ट हुए हैं। 2015 में स्थानीय फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए मिलने वाली मदद और अब परंपरागत कृषि विकास योजना से मिलने वाले बीज व जुताई के लिए मिलने वाली 300 रुपये प्रति हेक्टेयर रकम से किसान इस खेती को अपना रहा है। साथ ही आसानी से इसका बाजार भी उपलब्ध है।

राजेंद्र उप्रेती, मुख्य कृषि अधिकारी, चंपावत।
बाक्स
गरम तासीर और औषधीय गुणों से भरपूर
चंपावत। मडुवे की तासीर गरम होने से जाड़ों के लिए इसका बहुतायत में उपयोग हो रहा है। आयुर्वेदिक चिकित्सक डा. मोहम्मद शाहिद बताते हैं कि मडुवे में कैल्शियम, विटामिन ए बी, सी, लौह, खनिज एवं प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है। यह रेशायुक्त होने से पाचन तंत्र को भी सक्रिय रखता है।
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